नई दिल्ली (13 फरवरी 2026): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को पूर्ववर्ती कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए कहा कि एक समय देश पंगु नीतियों, घोटालों और मजबूरी में लिए गए फैसलों की वजह से वैश्विक स्तर पर भरोसा खो चुका था। उन्होंने दावा किया कि आज भारत ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पर सवार होकर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है और दुनिया भारत को नए नजरिए से देख रही है।
प्रधानमंत्री का यह बयान उस समय आया जब केंद्र सरकार अपनी आर्थिक और रणनीतिक नीतियों को विकास के नए चरण के रूप में प्रस्तुत कर रही है। अपने संबोधन में उन्होंने अतीत और वर्तमान की तुलना करते हुए कहा कि पहले सुधार संकट आने के बाद किए जाते थे, जबकि अब सुधार पहले से योजना बनाकर किए जा रहे हैं।
यूपीए सरकार पर पीएम के आरोप: घोटाले और फैसलों में देरी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 2014 से पहले देश में नीतिगत निर्णय लेने की रफ्तार धीमी थी और अक्सर घोटालों की चर्चा सुर्खियों में रहती थी। उनके मुताबिक, उस दौर में निवेशकों और वैश्विक भागीदारों का भरोसा कमजोर पड़ा।
उन्होंने कहा, “जब देश में नीतिगत लकवा और घोटालों का माहौल हो, तब दुनिया भरोसा करने से हिचकती है।” प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि उस समय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अपेक्षित रफ्तार से आगे नहीं बढ़ सका और बड़े देशों के साथ सीमित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट ही हुए।
उनके मुताबिक, सीमा क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण भी लालफीताशाही के कारण प्रभावित रहा। उन्होंने यह भी कहा कि सुधार अक्सर तब किए गए जब देश किसी बड़े संकट में फंस चुका था।
1991 आर्थिक संकट और 26/11 का जिक्र
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में 1991 के आर्थिक संकट और 26/11 मुंबई आतंकी हमले का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय की सरकारों ने निर्णय “मजबूरी” में लिए, दूरदर्शिता के आधार पर नहीं।
उन्होंने कहा कि 1991 में देश लगभग आर्थिक रूप से दिवालिया होने की स्थिति में पहुंच गया था, जिसके बाद उदारीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई। वहीं 26/11 के बाद ही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का गठन हुआ। पीएम के अनुसार, ये कदम जरूरी जरूर थे, लेकिन समय रहते सुधार नहीं किए गए।
‘राष्ट्र प्रथम नीति’ और सरकार की उपलब्धियां
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मौजूदा सरकार मिशन मोड में काम कर रही है और नीतिगत स्पष्टता के साथ विकास को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने बजट में पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) बढ़ाने, बायोफार्मा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने का जिक्र किया।
उन्होंने दावा किया कि भारत अब कई देशों के साथ बड़े व्यापार समझौते कर रहा है और वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी मजबूत भागीदारी सुनिश्चित कर रहा है। प्रधानमंत्री के शब्दों में, “आज दुनिया भारत पर भरोसा करती है, क्योंकि देश आत्मविश्वास के साथ फैसले ले रहा है।”
भारत का अपना विकास मॉडल
पीएम मोदी ने कहा कि भारत अब किसी दूसरे देश का मॉडल कॉपी करने के बजाय अपना विकास मॉडल तैयार कर रहा है। उन्होंने साल 2015 में नीति आयोग की स्थापना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह बदलाव देश की सोच में बड़ा मोड़ था।
उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में हर देश अपनी ताकत बढ़ाने में लगा है और भारत भी तेजी से वैश्विक विकास का अहम इंजन बनकर उभर रहा है। उनके अनुसार, नीतियों में निरंतरता और सुधार की गति ही आने वाले वर्षों में भारत की असली ताकत बनेगी।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें उन्होंने एक ओर यूपीए शासनकाल की नीतियों पर सवाल उठाए, तो दूसरी ओर मौजूदा सरकार की उपलब्धियों को ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ के रूपक के जरिए जनता के सामने रखा। आने वाले समय में यह बहस और तेज हो सकती है कि देश की विकास यात्रा में किस दौर की नीतियों ने ज्यादा प्रभाव छोड़ा।










