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उत्तर प्रदेश बना सुशासन का रोल मॉडल, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने की योगी सरकार के प्रशासनिक सुधारों की तारीफ

On: October 23, 2026
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उत्तर प्रदेश बना सुशासन का रोल मॉडल
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लखनऊ/23 अक्टूबर 2026: उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक सुधारों और सरकारी कर्मचारियों के प्रशिक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सराहना की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 से प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाने पर जोर दिया गया है। उत्तर प्रदेश ने इन प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए क्षमता विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। मिशन कर्मयोगी और आई-गॉट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर प्रदेश की भागीदारी को उन्होंने दूसरे राज्यों के लिए प्रेरणादायक बताया।

उत्तर प्रदेश प्रशासनिक सुधार में बना राष्ट्रीय उदाहरण

लखनऊ में आयोजित उत्तर क्षेत्रीय कार्यशाला में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में किए जा रहे प्रशासनिक प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश ने क्षमता विकास और सरकारी प्रशिक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है।

मंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश में कार्यक्रमों के आयोजन के दौरान प्रशासनिक सहयोग और मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत रुचि से कार्यों को सुचारु रूप से पूरा करने में मदद मिलती है। उनके मुताबिक, उत्तर प्रदेश का अनुभव अन्य राज्यों को भी प्रशासनिक सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में प्रेरित कर सकता है।

मिशन कर्मयोगी और आई-गॉट प्लेटफॉर्म पर यूपी की बड़ी उपलब्धि

उत्तर प्रदेश प्रशासनिक सुधार के तहत सरकारी कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने और उन्हें नई तकनीकों के अनुरूप तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि मिशन कर्मयोगी का उद्देश्य कर्मचारियों को केवल नियमों के अनुसार काम करने तक सीमित रखने के बजाय उनकी जिम्मेदारियों, भूमिकाओं और अपेक्षित दक्षताओं के आधार पर प्रशिक्षित करना है।

आई-गॉट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर देशभर में लगभग 1.70 करोड़ कार्मिकों के पंजीकरण के बीच उत्तर प्रदेश के 19 लाख से अधिक उपयोगकर्ता पंजीकृत हैं। प्रदेश में योग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे विषयों पर भी बड़ी संख्या में प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे किए गए हैं।

इसके अतिरिक्त, उन्नति पोर्टल पर उत्तर प्रदेश के 350 से अधिक प्रशिक्षण संस्थानों और प्रशिक्षण इकाइयों का पंजीकरण किया गया है। ये आंकड़े सरकारी कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए डिजिटल माध्यमों के बढ़ते इस्तेमाल को दर्शाते हैं।

भर्ती प्रक्रिया से डिजिटल सेवाओं तक प्रशासनिक बदलावों का जिक्र

डॉ. जितेंद्र सिंह ने केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2014 के बाद शुरू किए गए विभिन्न प्रशासनिक सुधारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने राजपत्रित अधिकारियों से दस्तावेजों के सत्यापन की अनिवार्यता समाप्त करने और सरकारी भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने जैसे कदमों को महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने रोजगार मेले, केंद्रीयकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (CPGRAMS) और डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र जैसी पहलों का भी जिक्र किया। डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र में बायोमेट्रिक और फेस रिकग्निशन तकनीक के इस्तेमाल से पेंशनभोगियों के लिए जीवन प्रमाण प्रस्तुत करने की प्रक्रिया आसान हुई है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रशासन में नियम-आधारित कार्यप्रणाली के साथ-साथ भूमिका-आधारित दृष्टिकोण अपनाना भी जरूरी है, ताकि प्रत्येक कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी और अपेक्षित परिणामों को स्पष्ट रूप से समझ सके।

ई-पोर्टल पर 19 लाख से अधिक कर्मचारी पंजीकृत, 47 करोड़ से ज्यादा लर्निंग आवर्स

उत्तर क्षेत्रीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एसपी गोयल ने प्रशिक्षण और क्षमता विकास से जुड़े आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि प्रदेश में ई-पोर्टल पर 19 लाख से अधिक सरकारी कार्मिक पंजीकृत हो चुके हैं।

मुख्य सचिव के अनुसार, पोर्टल के माध्यम से लगभग 3.75 करोड़ प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे किए गए हैं, जबकि कुल 47 करोड़ से अधिक लर्निंग आवर्स दर्ज किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं की सफलता का आकलन केवल उनकी संख्या से नहीं होना चाहिए। असली कसौटी यह है कि योजनाओं का लाभ आम नागरिक तक कितनी प्रभावी, पारदर्शी और समान रूप से पहुंच रहा है।

एसपी गोयल ने प्रशिक्षण संस्थानों, विभिन्न विभागों और कर्मचारियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि नई तकनीकों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक हो सकता है।

नागरिक-केंद्रित प्रशासन पर जोर, आठ राज्यों और चार केंद्रशासित प्रदेशों की भागीदारी

क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सक्षम, दक्ष और नागरिक-केंद्रित सिविल सेवाओं का निर्माण आवश्यक है। इसके लिए मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत भूमिका-आधारित प्रशिक्षण को दक्षता-आधारित प्रणाली में बदलने पर जोर देना होगा।

उन्होंने साधना सप्ताह के दौरान शुरू की गई उन्नति अभियान, कर्मयोगी कर्तव्य कार्यक्रम और कर्मयोगी क्वालिटी फ्रेमवर्क जैसी पहलों का उल्लेख किया। इनका उद्देश्य कर्मचारियों में सेवा भाव विकसित करना, प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और प्रशासनिक दक्षता को बेहतर बनाना है।

कार्यशाला में आठ राज्यों और चार केंद्रशासित प्रदेशों की भागीदारी रही। इस दौरान प्रशिक्षण संस्थानों की क्षमता बढ़ाने और आधुनिक प्रशिक्षण पद्धतियों को अपनाने पर चर्चा की गई।

सुशासन और क्षमता विकास पर योगी सरकार का फोकस

उत्तर प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों को डिजिटल प्रशिक्षण उपलब्ध कराने, नई तकनीकों से जोड़ने और नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने की पहल प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आई-गॉट कर्मयोगी और उन्नति पोर्टल पर दर्ज भागीदारी इस प्रयास का एक प्रमुख हिस्सा है।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सुशासन और प्रशासनिक क्षमता विकास के क्षेत्र में अपनी भूमिका आगे भी मजबूत करेगा। अब इन पहलों की दीर्घकालिक सफलता इस बात से भी आंकी जाएगी कि प्रशिक्षण से कर्मचारियों के कामकाज में कितना सुधार आता है और आम नागरिकों को सरकारी सेवाओं का लाभ कितनी आसानी से मिलता है।

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