लखनऊ, 6 फरवरी 2026। आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और डॉग बाइट की घटनाओं को लेकर राज्य सरकार ने व्यापक ढांचा खड़ा करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश के सभी नगर निगमों और जनपद मुख्यालयों पर डॉग शेल्टर होम और ABC (Animal Birth Control) सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। शासन ने भूमि चिह्नीकरण, बजट निर्धारण और परियोजना स्वीकृति की प्रक्रियाओं को एक साथ आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
सरकार का कहना है कि यह पहल जन सुरक्षा और पशु कल्याण—दोनों लक्ष्यों को संतुलित तरीके से साधेगी, और पूरी कार्यवाही न्यायालयीय दिशा-निर्देशों व पशु-कल्याण मानकों के अनुरूप होगी।
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुरूप ढांचा
यह पूरी प्रक्रिया Supreme Court of India द्वारा समय-समय पर दिए गए दिशा-निर्देशों और Animal Birth Control Rules के अनुरूप आगे बढ़ाई जा रही है। मॉडल यह है कि नसबंदी, टीकाकरण, आश्रय और पुनर्वास—इन चार स्तंभों पर शहरी प्रबंधन खड़ा किया जाए, ताकि समस्या का स्थायी और मानवीय समाधान निकले।
DPR, बजट और मानक सुविधाएं
शासन ने प्रत्येक शेल्टर होम के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के निर्देश दिए हैं। प्राप्त प्रस्तावों के अनुसार प्रति शेल्टर होम ₹470 लाख से ₹531 लाख तक लागत का अनुमान है। DPR में निम्न बिंदुओं को अनिवार्य किया गया है:
- क्षमता और केनेल डिज़ाइन
- पशु-चिकित्सा कक्ष, ऑपरेशन थिएटर (ABC हेतु)
- भोजन, स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन
- एंटी-रेबीज टीकाकरण व्यवस्था
- प्रशिक्षित स्टाफ और सुरक्षा प्रोटोकॉल
शासन स्तर पर इन DPR को सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है और अब क्रियान्वयन चरण तेज किया जा रहा है।
नगर निगमों में जमीन चिह्नीकरण
प्रगति रिपोर्ट के अनुसार प्रयागराज नगर निगम क्षेत्र में ग्राम मऊर उपरहट, तहसील सोरांव में भूमि चिह्नित कर ली गई है। लखनऊ नगर निगम में भूमि उपलब्धता को लेकर कार्यकारिणी बोर्ड से प्रस्ताव स्वीकृत हो चुका है। अन्य नगर निगमों से भी त्वरित सूचनाएं मांगी गई हैं, ताकि राज्यभर में एक समान मॉडल लागू हो सके।
जनपद मुख्यालयों पर भी तेजी
जनपद स्तर पर भी ABC सेंटर और शेल्टर होम के लिए भूमि तय की जा रही है:
- ललितपुर: 12.182 हेक्टेयर
- हरदोई: 0.2 हेक्टेयर
- बुलंदशहर: 2000 वर्ग मीटर
- फतेहपुर: 0.769 हेक्टेयर
शेष जनपदों से प्रस्ताव मिलते ही वहां भी चिह्नीकरण और स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
मानवीय, वैज्ञानिक और स्थायी समाधान
सरकार का रुख स्पष्ट है—आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान दंडात्मक नहीं, बल्कि मानवीय (humane) और वैज्ञानिक (scientific) तरीकों से किया जाए। ABC के माध्यम से संख्या नियंत्रण, टीकाकरण से रोग-नियंत्रण, और शेल्टर से सुरक्षित आश्रय—इन उपायों से डॉग बाइट की घटनाओं में कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है।
शहरी इलाकों में यह ढांचा तैयार होने के बाद स्थानीय निकायों, पशु-चिकित्सा विभाग और स्वयंसेवी संगठनों के समन्वय से संचालन की रूपरेखा भी तय की जाएगी।
फिलहाल, प्रदेश में डॉग शेल्टर होम और ABC सेंटर की यह पहल प्रशासनिक प्राथमिकता पर है—ताकि आमजन की सुरक्षा और पशु कल्याण साथ-साथ सुनिश्चित हो सके।








