लखनऊ, 02 फरवरी 2026 (सोमवार): खेत वही रहेंगे, लेकिन सोच बदलेगी—यही संदेश सोमवार को हुई उच्चस्तरीय बैठक से निकला। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने कृषि विभाग को निर्देश दिए कि वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक के लिए ऐसी कार्ययोजना तैयार की जाए, जिसमें गन्ने के साथ तिलहन और दलहन की अंतःफसली खेती को मिशन मोड में लागू किया जाए। लक्ष्य साफ है—उत्पादन बढ़े, लागत घटे और किसानों की आय स्थिर व बहुगुणित हो।
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में लगभग 29.50 लाख हेक्टेयर में गन्ने की खेती होती है—जिसमें 14.64 लाख हेक्टेयर नया बोया क्षेत्र और 14.86 लाख हेक्टेयर पेड़ी शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतना बड़ा रकबा यदि वैज्ञानिक ढंग से अंतःफसली मॉडल अपनाए, तो बिना गन्ने की पैदावार घटाए किसानों को अतिरिक्त लाभ मिल सकता है।
रबी में सरसों–मसूर, जायद में उड़द–मूंग
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि रबी सीजन में सरसों व मसूर और जायद सीजन में उड़द व मूंग को प्राथमिकता दी जाए। यह संयोजन न केवल मिट्टी की उर्वरता को सहारा देता है, बल्कि बाजार में तेलहन–दलहन की मांग को भी साधता है। किसानों को एक ही खेत से दोहरी उपज, कम जोखिम और बेहतर नकदी प्रवाह मिल सकता है।
इस मॉडल के वैज्ञानिक आधार के लिए कृषि विश्वविद्यालयों और Krishi Vigyan Kendra (KVK) की सक्रिय भागीदारी तय की गई है। अंतःफसल चयन, वर्षवार रोडमैप, प्रशिक्षण, सहायता और अनुदान—सबका स्पष्ट ढांचा बनाने के निर्देश दिए गए।
अनुसंधान संस्थानों की सिफारिशों पर अमल
गन्ना आधारित अंतःफसली प्रणाली को मजबूत करने के लिए Indian Institute of Sugarcane Research की सिफारिशों के अनुरूप फसल संयोजन अपनाने पर जोर दिया गया। इससे यह सुनिश्चित होगा कि गन्ने की मुख्य फसल प्रभावित न हो और सहायक फसलों से अतिरिक्त आय का मार्ग खुले।
मिशन मोड में क्रियान्वयन, वर्षवार रोडमैप
मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना कागजों तक सीमित न रहे। वर्षवार लक्ष्य, सहायता–अनुदान का ढांचा, प्रशिक्षण मॉड्यूल, और मैदानी निगरानी—इन चार स्तंभों पर इस पहल को खड़ा किया जाए। KVK और कृषि विश्वविद्यालय गांव-गांव मॉडल प्लॉट विकसित कर किसानों को व्यवहारिक प्रशिक्षण देंगे।
कृषि अर्थव्यवस्था और GVA पर असर
यह पहल केवल खेत की उपज तक सीमित नहीं है। सरकार का आकलन है कि बड़े पैमाने पर अंतःफसली खेती अपनाने से प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था और ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की दिशा में यह कदम कृषि क्षेत्र को नई गति देगा।
किसानों के लिए कम जोखिम, स्थिर आय
अंतःफसली मॉडल का बड़ा लाभ यह है कि यदि किसी एक फसल में बाजार या मौसम का जोखिम हो, तो दूसरी फसल संतुलन बना लेती है। इससे आय में उतार-चढ़ाव कम होता है और खेती अधिक टिकाऊ (sustainable) बनती है। मिट्टी की सेहत, नमी का बेहतर उपयोग और खरपतवार नियंत्रण जैसे अप्रत्यक्ष लाभ भी मिलते हैं।










