सैटेलाइट निगरानी, भारी जुर्माना और नोडल अधिकारी तैनाती से पराली रोकने की नई रणनीति लागू
लखनऊ (Sat, 11 Oct 2025)। उत्तर प्रदेश में अब पराली जलाने की घटनाओं पर कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलों को सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 तक Stubble Burning की घटनाओं को “शून्य” स्तर पर लाया जाए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि पराली जलाना सिर्फ खेत की समस्या नहीं, बल्कि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य दोनों के लिए खतरा है। इसलिए किसानों को वैकल्पिक उपायों के प्रति जागरूक किया जाए और ग्राम स्तर पर प्रभावी मॉनीटरिंग तंत्र बनाया जाए।
सैटेलाइट से निगरानी और जुर्माने की नई व्यवस्था
योगी सरकार के हालिया आदेशों के तहत अब सैटेलाइट तकनीक से पराली जलाने की घटनाओं की रियल-टाइम ट्रैकिंग की जाएगी। जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे सभी “हॉटस्पॉट क्षेत्रों” को चिह्नित करें और संबंधित किसानों से संवाद स्थापित करें।
सरकार ने जुर्माने की राशि भी तय की है —
- दो एकड़ से कम भूमि पर पराली जलाने पर ₹2,500,
- दो से पांच एकड़ तक ₹5,000,
- और पांच एकड़ से अधिक पर ₹15,000 तक का पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति शुल्क लगाया जाएगा।
इसके साथ ही हर 50 से 100 किसानों पर एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी, जो अपने क्षेत्र में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जिम्मेदार होंगे।
“संवेदनशील जिलों में विशेष सतर्कता बरती जाए” – सीएम योगी
मुख्यमंत्री ने कहा, “प्रदूषण पर नियंत्रण केवल नियमों से नहीं, बल्कि सामूहिक चेतना से संभव है। अधिकारियों को चाहिए कि वे किसानों को वैकल्पिक तकनीकों जैसे हैप्पी सीडर, सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम और कम्पोस्टिंग विधियों के उपयोग के लिए प्रेरित करें।”
उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों और स्थानीय निकायों से भी अपील की कि वे इस जन-अभियान में सक्रिय भूमिका निभाएं। योगी ने कहा, “पराली जलाने की आदत बदलना आसान नहीं, लेकिन जब सरकार, किसान और समाज एक साथ आएंगे, तो यह संभव होगा।”
फील्ड स्तर पर निगरानी और त्वरित कार्रवाई का आदेश
मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि राजस्व, पुलिस, कृषि, ग्राम्य विकास और पंचायती राज विभागों के कर्मचारी फसल कटाई के समय सक्रिय निगरानी रखें। यदि कोई किसान पराली जलाते हुए पाया जाए, तो उसे मौके पर रोकते हुए तत्काल जुर्माना लगाया जाए।
साथ ही, जिलाधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि हर माह रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाए, ताकि प्रगति की सतत समीक्षा हो सके।
पर्यावरण बचाने का सामूहिक संकल्प
राज्य सरकार का लक्ष्य केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि पर्यावरणीय चेतना का प्रसार भी है। सरकार चाहती है कि किसान पराली को “कचरा” नहीं बल्कि “संसाधन” मानें। इसके लिए कृषि विभाग द्वारा गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, जिसमें पराली के विकल्पों को व्यावहारिक ढंग से समझाया जाएगा।
सीएम योगी ने कहा, “हमारा प्रयास है कि प्रदेश के किसान प्रदूषण मुक्त खेती की दिशा में अग्रसर हों। यह केवल प्रशासनिक पहल नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी जिम्मेदारी है।”








