लखनऊ (13 फरवरी 2026)। उत्तर प्रदेश विधानसभा में स्वास्थ्य व्यवस्था पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ शब्दों में कहा कि सरकार के लिए केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देने वाले परिणाम ही असली मापदंड हैं। उन्होंने विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए बदलावों को आंकड़ों और योजनाओं के साथ प्रस्तुत किया और बताया कि प्रदेश का फोकस अब केवल इलाज तक सीमित नहीं, बल्कि एक मजबूत हेल्थ इकोनॉमी बनाने पर भी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीति में बड़े-बड़े दावों से ज्यादा अहम यह है कि जनता को क्या वास्तविक लाभ मिला। इसी आधार पर उन्होंने इंसेफेलाइटिस नियंत्रण से लेकर मेडिकल कॉलेजों के विस्तार, पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्तियों और आयुष्मान भारत योजना तक कई उपलब्धियां सदन में रखीं।
उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य क्षेत्र की उपलब्धियां: इंसेफेलाइटिस नियंत्रण से मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर तक
सीएम योगी ने कहा कि जिस इंसेफेलाइटिस ने कभी पूर्वांचल के कई जिलों में भय का माहौल बना दिया था, उस बीमारी पर अब प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा चुका है। उन्होंने विपक्ष को संबोधित करते हुए कहा कि पहले इस बीमारी से कई बच्चों की मौत होती थी, लेकिन सरकार ने इसे प्राथमिकता मानकर लगातार अभियान चलाया।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि केंद्र और राज्य की संयुक्त रणनीति, बेहतर निगरानी और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के कारण अब स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। उन्होंने इसे सरकार की संवेदनशील नीति और परिणाम-आधारित कामकाज का उदाहरण बताया।
स्वास्थ्य ढांचे की बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि “वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज” की सोच को आगे बढ़ाया गया है। प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 36 से बढ़कर 81 तक पहुंच चुकी है, जिसमें अमेठी का नया मेडिकल कॉलेज भी शामिल है। गोरखपुर और रायबरेली में एम्स जैसे संस्थानों का संचालन प्रदेश के स्वास्थ्य मानचित्र में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
बिना भेदभाव चिकित्सा सुविधाएं, आयुष्मान योजना का विस्तार
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की नीति स्पष्ट है—स्वास्थ्य सेवाओं में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं। गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए विधायक निधि के उपयोग में भी लचीलापन रखा गया है, ताकि जरूरतमंदों तक आर्थिक सहायता तेजी से पहुंच सके।
आयुष्मान भारत योजना के तहत प्रदेश में 5.46 करोड़ गोल्डन कार्ड जारी किए जाने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि गरीब और कमजोर वर्गों को अब इलाज के लिए आर्थिक संकट से जूझना नहीं पड़ रहा।
उन्होंने यह भी कहा कि डायलिसिस सुविधा अब प्रत्येक जिले में निःशुल्क उपलब्ध है। साथ ही आईसीयू, मिनी आईसीयू, डिजिटल एक्स-रे, ब्लड बैंक, ऑक्सीजन प्लांट और डायलिसिस यूनिट जैसी सुविधाओं का विस्तार किया गया है, जिससे जिला स्तर पर ही बेहतर उपचार संभव हो सके।
भर्ती और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
सदन में मुख्यमंत्री ने बताया कि स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े पैमाने पर नियुक्तियां की गई हैं। अब तक 41,868 पैरामेडिक्स की भर्ती की जा चुकी है, जबकि चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में 4,110 से अधिक भर्तियां हुईं। कुल मिलाकर स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा से जुड़े 45,978 पदों पर नियुक्तियां पूरी की गई हैं।
उन्होंने निजी अस्पतालों की मनमानी पर भी सख्त रुख दिखाया और कहा कि यदि सरकार सीजीएचएस दरों पर भुगतान कर रही है, तो अस्पतालों को भी पारदर्शिता और सहयोग सुनिश्चित करना होगा। ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री आरोग्य मेलों और 108 व 102 एंबुलेंस सेवाओं को मजबूत किया गया है।
भविष्य की तैयारी: एआई, टेलीमेडिसिन और फार्मा हब बनने की दिशा
मुख्यमंत्री योगी ने साफ संकेत दिया कि उत्तर प्रदेश अब पारंपरिक स्वास्थ्य सेवाओं से आगे बढ़कर आधुनिक हेल्थ टेक्नोलॉजी की ओर कदम बढ़ा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार एआई, जीनोमिक्स, टेलीमेडिसिन, मेडटेक और हेल्थटेक जैसे क्षेत्रों में निवेश और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित करने पर काम कर रही है।
फार्मा सेक्टर को लेकर उन्होंने कहा कि प्रदेश सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं का उपभोक्ता राज्य नहीं रहेगा, बल्कि दवा उत्पादन और मेडिकल उपकरण निर्माण का बड़ा केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ललितपुर में फार्मा पार्क और गौतम बुद्ध नगर में मेडिकल डिवाइस पार्क की परियोजनाएं इसी रणनीति का हिस्सा हैं।
राजनीतिक संदेश और प्रशासनिक फोकस
विधानसभा में दिया गया यह बयान केवल उपलब्धियों की सूची नहीं था, बल्कि सरकार का स्पष्ट संदेश भी था कि उसकी प्राथमिकता ‘घोषणाओं की राजनीति’ से ज्यादा ‘परिणाम आधारित प्रशासन’ है। सीएम योगी ने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है और सरकार आने वाले वर्षों में भी इसी दिशा में काम करती रहेगी।
स्वास्थ्य क्षेत्र में किए जा रहे ये बदलाव संकेत देते हैं कि उत्तर प्रदेश आने वाले समय में न केवल चिकित्सा सेवाओं के विस्तार बल्कि हेल्थ इंडस्ट्री और निवेश के लिहाज से भी एक महत्वपूर्ण राज्य बन सकता है।











