लखनऊ | 25 जनवरी 2026 (रविवार) — उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर चल रही विकास परियोजनाएं अब सख्त मॉनिटरिंग के दायरे में हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में इंफ्रास्ट्रक्चर, सिंचाई, ऊर्जा, शिक्षा और औद्योगिक विकास से जुड़ी प्रमुख परियोजनाओं की प्रगति का बारीकी से आकलन किया। उनका स्पष्ट संदेश था—निर्माण केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि तय समयसीमा में, उच्च गुणवत्ता के साथ और जन-उपयोगिता को केंद्र में रखकर पूरा होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मेगा प्रोजेक्ट्स उत्तर प्रदेश को निवेश और आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बना रहे हैं। ऐसे में विकास परियोजनाएं समयबद्ध तरीके से पूरी कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
गंगा एक्सप्रेसवे: फरवरी 2026 तक पूर्ण करने के निर्देश
594 किमी लंबे गंगा एक्सप्रेसवे की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने फरवरी 2026 के अंत तक निर्माण पूरा कराने के निर्देश दिए। यह एक्सप्रेसवे 12 जनपदों से होकर गुजरता है और 500 से अधिक गांवों को प्रत्यक्ष लाभ देगा।
बैठक में बताया गया कि सड़क गुणवत्ता की जांच रफनेस इंडेक्स और राइडिंग कम्फर्ट इंडेक्स जैसे आधुनिक मानकों पर की जा रही है। वे-साइड अमेनिटीज, रेस्ट एरिया, रोड सेफ्टी फीचर्स, साइनेज और एक्सेस-कंट्रोल सिस्टम को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना कृषि, उद्योग और लॉजिस्टिक्स—तीनों के लिए गेमचेंजर साबित होगी।
सिंचाई परियोजनाएं: किसानों की आय से सीधा संबंध
मध्य गंगा नहर परियोजना (स्टेज-2) की समीक्षा में बताया गया कि इसके पूर्ण होने पर अमरोहा, मुरादाबाद और संभल के बड़े हिस्से में सिंचाई सुविधा का विस्तार होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी विकास परियोजनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देती हैं।
एरच सिंचाई परियोजना (बुंदेलखंड) को जल संरक्षण, सिंचाई और पेयजल उपलब्धता की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए अपूर्ण कार्यों को तुरंत पूरा करने के निर्देश दिए गए।
ऊर्जा सुरक्षा: रिहंद-ओबरा पंप स्टोरेज परियोजनाएं
रिहंद और ओबरा क्षेत्र की जल विद्युत परियोजनाओं की समीक्षा में पंप स्टोरेज आधारित योजनाओं पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की ऊर्जा जरूरतों और नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर उपयोग के लिए ये विकास परियोजनाएं अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, जो औद्योगिक विस्तार को भी ऊर्जा सुरक्षा देंगी।
जेवर एयरपोर्ट: फेज-3 के लिए भूमि अधिग्रहण तेज करें
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर की प्रगति की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने तीसरे चरण के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि प्रथम चरण के संचालन के बाद प्रतिवर्ष एक करोड़ से अधिक यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं मिल सकेंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जेवर एयरपोर्ट प्रदेश को वैश्विक कनेक्टिविटी, निवेश और एयर कार्गो हब के रूप में नई पहचान देगा। आगामी चरणों की तैयारी समय रहते सुनिश्चित की जाए।
लॉजिस्टिक हब और ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी पर जोर
ग्रेटर नोएडा में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब और मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब की प्रगति पर मुख्यमंत्री ने कार्य तेज करने को कहा। संबंधित रेलवे स्टेशनों के निर्माण के लिए केंद्र सरकार के मंत्रालयों से सतत संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए।
दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और बहराइच-श्रावस्ती-बलरामपुर-सिद्धार्थनगर-संतकबीरनगर नई रेल लाइन कनेक्टिविटी पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने भूमि उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारियों को निर्देशित किया।
मॉडल कंपोजिट स्कूल: 75 जनपदों में 150 स्कूल
मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट स्कूल योजना की समीक्षा करते हुए 75 जनपदों में 150 स्कूल स्थापित करने के लक्ष्य पर तेजी लाने के निर्देश दिए गए। इन स्कूलों में डिजिटल कक्षाएं, विज्ञान प्रयोगशालाएं, खेल सुविधाएं और समग्र शैक्षिक अवसंरचना विकसित की जाएगी।
जहां भूमि चयन लंबित है, वहां स्थानीय प्रशासन के सहयोग से प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने को कहा गया। चिल्ला एलिवेटेड फ्लाईओवर के कार्यों में भी तेजी लाने की जरूरत बताई गई।
“विकास का अर्थ समय पर गुणवत्तापूर्ण परिणाम” — मुख्यमंत्री
बैठक के अंत में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में विकास का अर्थ केवल निर्माण नहीं, बल्कि समय पर, गुणवत्तापूर्ण और जन-उपयोगी परिणाम है। उन्होंने सभी विभागों को नियमित समीक्षा और तेज क्रियान्वयन के निर्देश दिए।








