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युद्ध में AI का बढ़ेगा इस्तेमाल, भारतीय नौसेना ने तैयार किया भविष्य का रोडमैप; समुद्री सुरक्षा पर खास जोर

On: October 19, 2026
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युद्ध में AI का बढ़ेगा इस्तेमाल, भारतीय नौसेना ने तैयार किया भविष्य का रोडमैप
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नई दिल्ली/19 अक्टूबर 2026: भारतीय नौसेना भविष्य के युद्धों की बदलती चुनौतियों को देखते हुए अपनी सैन्य क्षमताओं को आधुनिक बनाने पर जोर दे रही है। हवा, समुद्र और पानी के भीतर अभियानों के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्वायत्त प्रणालियों और क्वांटम तकनीक को भी प्राथमिकता दी जा रही है। नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल अजय कोचर ने सोमवार को कहा कि भारतीय नौसेना का लक्ष्य एक ऐसे बहुआयामी और नेटवर्क आधारित सैन्य बल के रूप में विकसित होना है, जो बदलते सुरक्षा परिदृश्य में प्रभावी ढंग से काम कर सके।

नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोचर ने स्पष्ट किया कि आधुनिक तकनीक अपनाने का उद्देश्य केवल सैन्य उपकरणों का आधुनिकीकरण नहीं है। इसके जरिए नौसेना की परिचालन क्षमता, विभिन्न इकाइयों के बीच तालमेल और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना भी महत्वपूर्ण है।

युद्ध में AI का इस्तेमाल और स्वायत्त प्रणालियां होंगी अहम

दुनिया के विभिन्न हिस्सों में बदलते संघर्षों ने आधुनिक युद्ध में तकनीक की भूमिका को पहले से अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। भारतीय नौसेना भी इन घटनाक्रमों से मिले सबक के आधार पर अपनी भविष्य की तैयारियों को आगे बढ़ा रही है।

वाइस एडमिरल अजय कोचर के मुताबिक, भविष्य के सैन्य अभियानों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्वायत्त प्रणालियों की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल से नौसेना को अपनी परिचालन जरूरतों और संभावित खतरों के अनुरूप क्षमताएं विकसित करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, AI आधारित सैन्य प्रणालियों की उपयोगिता के साथ उनकी विश्वसनीयता, नियंत्रण और सुरक्षा भी महत्वपूर्ण विषय हैं। इसलिए इन तकनीकों को अपनाने के दौरान परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप तैयारी करना जरूरी होगा।

काउंटर-यूएएस और क्वांटम तकनीक पर भी नजर

नौसेना की भविष्य की रणनीति में काउंटर-यूएएस यानी मानवरहित हवाई प्रणालियों का मुकाबला करने वाली तकनीक भी शामिल है। आधुनिक संघर्षों में ड्रोन और अन्य मानवरहित प्रणालियों के बढ़ते इस्तेमाल ने सैन्य प्रतिष्ठानों तथा महत्वपूर्ण ठिकानों की सुरक्षा को नई चुनौती दी है।

कोचर ने क्वांटम तकनीक को भी निकट भविष्य में तेजी से विकसित होने वाला क्षेत्र बताया। उनके अनुसार, नौसेना इन उभरती तकनीकों से जुड़े विकास पर नजर रख रही है और उन्हें भविष्य की आवश्यकताओं के संदर्भ में देख रही है।

क्वांटम तकनीक का संभावित उपयोग सुरक्षित संचार, संवेदन प्रणालियों और उन्नत कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में हो सकता है। हालांकि, इनके वास्तविक सैन्य उपयोग का दायरा संबंधित तकनीक के विकास और परीक्षण पर निर्भर करेगा।

पश्चिम एशिया संकट के बीच समुद्री सुरक्षा पर जोर

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और समुद्री मार्गों की सुरक्षा से जुड़े सवालों पर नौसेना के उप प्रमुख ने कहा कि मौजूदा संकटों ने नौसेना की गतिविधियों और तैनाती संबंधी सोच को प्रभावित किया है।

उन्होंने ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा का भी उल्लेख किया। कोचर के अनुसार, इस अभियान के तहत महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर हमलों के बीच कई जहाजों को सुरक्षित भारतीय तटों तक पहुंचाने में सहायता मिली।

भारत के लिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा रणनीतिक और आर्थिक, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। देश की ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का बड़ा हिस्सा समुद्री परिवहन पर निर्भर करता है। ऐसे में क्षेत्रीय संघर्षों के दौरान जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना नौसेना की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल है।

नेटवर्क आधारित सैन्य बल बनाने की दिशा में भारतीय नौसेना

वाइस एडमिरल अजय कोचर ने कहा कि नौसेना के भविष्य की दिशा केवल युद्ध और मौजूदा संघर्षों से तय नहीं होती। बदलती परिस्थितियों के अनुसार तकनीक अपनाना और सैन्य क्षमताओं को लगातार मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है।

इसी सोच के तहत भारतीय नौसेना हवा, सतह, पानी के भीतर और डिजिटल तकनीक से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में अपनी तैयारियों को आगे बढ़ा रही है। नेटवर्क आधारित सैन्य बल की अवधारणा का उद्देश्य अलग-अलग प्लेटफॉर्म और इकाइयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है, ताकि जरूरत के समय सूचनाओं का प्रभावी आदान-प्रदान और अभियान संचालन संभव हो सके।

निष्कर्ष: भारतीय नौसेना की भावी रणनीति में AI, स्वायत्त प्रणालियों, काउंटर-यूएएस और क्वांटम तकनीक की भूमिका महत्वपूर्ण होती जा रही है। इसके साथ पश्चिम एशिया जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में समुद्री मार्गों की सुरक्षा भी प्राथमिकता बनी हुई है। आने वाले समय में तकनीकी विकास और परिचालन तैयारियों के बीच संतुलन भारतीय नौसेना की क्षमता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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