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वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता में भारत की उपलब्धि पर पीएम मोदी ने युवाओं को खिलाई मिठाई, स्किल एंबेसडर बनने का किया आह्वान

On: October 9, 2026
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वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता में भारत की उपलब्धि पर पीएम मोदी ने युवाओं को खिलाई मिठाई
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नई दिल्ली (शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026)। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले युवा प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता-2026 में हिस्सा लेने वाले भारतीय दल से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने युवाओं की उपलब्धियों की सराहना की, उनके अनुभव सुने और उन्हें देश में कौशल विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री ने अपने हाथों से प्रतिभागियों को मिठाई भी खिलाई।

शंघाई में आयोजित इस प्रतियोगिता में भारत ने 70 देशों के बीच दसवां स्थान हासिल किया। भारतीय दल ने छह रजत पदक और उत्कृष्टता के 20 पदक जीते। इस प्रदर्शन को देखते हुए प्रधानमंत्री ने दल के 70 सदस्यीय समूह को अपने सरकारी आवास पर आमंत्रित किया। उन्होंने पदक जीतने वाले प्रतिभागियों के साथ उन युवाओं का भी उत्साह बढ़ाया, जो प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर लौटे थे।

वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता में भारत का प्रदर्शन, 70 देशों के बीच दसवां स्थान

वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता में भारत का दसवें स्थान पर पहुंचना देश के कौशल प्रशिक्षण और युवाओं की व्यावहारिक क्षमताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने का अवसर रहा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भारतीय दल ने छह रजत पदक और 20 उत्कृष्टता पदक हासिल किए। इससे पहले 2024 में फ्रांस में आयोजित प्रतियोगिता में भारत 13वें स्थान पर रहा था।

प्रधानमंत्री मोदी ने प्रतिभागियों को बधाई देते हुए उनके प्रयासों की सराहना की। मुलाकात का उद्देश्य केवल उपलब्धियों का जश्न मनाना नहीं था, बल्कि युवाओं को कौशल विकास के क्षेत्र में अपनी भूमिका आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करना भी था।

पीएम मोदी ने युवाओं से पूछा- विदेश जाकर कैसा रहा अनुभव?

प्रधानमंत्री के साथ मुलाकात के दौरान प्रतिभागियों को खुलकर अपनी बात रखने का अवसर मिला। एक प्रतिभागी के मुताबिक, शुरुआत में सभी ने प्रधानमंत्री के साथ समूह तस्वीर खिंचवाई। इसके बाद प्रधानमंत्री युवाओं के बीच पहुंचे और उनसे अनौपचारिक बातचीत की।

उन्होंने पूछा कि कितने प्रतिभागी पहली बार विदेश गए थे और वहां उनका अनुभव कैसा रहा। इसके बाद युवाओं से कहा गया कि जो भी अपनी बात साझा करना चाहता है, वह हाथ उठाकर अपनी बात रख सकता है। बताया गया कि करीब 15 से 17 प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए।

प्रधानमंत्री ने युवाओं से उनके संबंधित कौशल, काम में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में दूसरे देशों के प्रतिभागियों की तकनीकों के बारे में भी सवाल किए। चर्चा के दौरान युवाओं ने बताया कि विश्व स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए गर्व का अनुभव रहा।

प्रतिभागियों ने कौशल विकास के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। उनके अनुभवों से यह समझने का अवसर मिला कि प्रशिक्षण, अभ्यास और आधुनिक उपकरणों तक पहुंच किसी युवा की तैयारी में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

युवाओं को बनाया जाएगा कौशल विकास का एंबेसडर

प्रधानमंत्री ने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे अपने अनुभवों को दूसरे युवाओं तक पहुंचाएं और कौशल विकास के एंबेसडर के रूप में काम करें। उनका जोर इस बात पर रहा कि प्रतियोगिताओं में हासिल किया गया अनुभव केवल व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित न रहे, बल्कि देश के अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणा बने।

व्यावहारिक कौशल के महत्व पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि तकनीकी और पेशेवर क्षमताएं उतनी ही जरूरी हैं, जितनी अकादमिक डिग्रियां। रोजगार की बदलती जरूरतों के बीच युवाओं के लिए केवल औपचारिक शिक्षा तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है। उन्हें अपने क्षेत्र में वास्तविक काम करने की दक्षता भी विकसित करनी होगी।

बदलती तकनीक के साथ नई स्किल्स सीखना जरूरी

प्रधानमंत्री ने तकनीक में तेजी से हो रहे बदलावों का उल्लेख करते हुए युवाओं को लगातार नई स्किल्स सीखने और अपनी मौजूदा क्षमताओं को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित किया। उनके संदेश का प्रमुख पहलू यह था कि बदलते तकनीकी दौर में सीखने की प्रक्रिया लगातार जारी रहनी चाहिए।

उन्होंने प्रतिभागियों से विश्व बाजार की जरूरतों के अनुरूप अपने कौशल विकसित करने और प्रतियोगिता से मिले अनुभवों का उपयोग करने का आग्रह किया। साथ ही, उनसे सुझाव साझा करने को कहा, ताकि भारत के कौशल प्रशिक्षण तंत्र को और बेहतर बनाया जा सके।

आज उद्योगों में ऑटोमेशन, डिजिटल तकनीक और आधुनिक उत्पादन प्रणालियों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। ऐसे में युवाओं के लिए नए उपकरणों, कार्यप्रणालियों और तकनीकी बदलावों के अनुरूप खुद को तैयार करना महत्वपूर्ण हो गया है।

आईआईटी और आईआईएम की तरह महत्वपूर्ण हैं स्किल ट्रेनिंग संस्थान

बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने कौशल प्रशिक्षण संस्थानों की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्किल ट्रेनिंग संस्थानों का महत्व आईआईटी और आईआईएम से कम नहीं है।

इस संदेश के पीछे व्यावहारिक प्रशिक्षण को व्यापक पहचान देने का विचार है। उद्योगों को ऐसे युवाओं की जरूरत होती है, जो विषय का सैद्धांतिक ज्ञान रखने के साथ उसे वास्तविक परिस्थितियों में लागू भी कर सकें। प्रभावी कौशल प्रशिक्षण इस अंतर को कम करने में मदद कर सकता है।

प्रधानमंत्री ने युवाओं से अपने अनुभवों और सुझावों के माध्यम से प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान देने का आग्रह किया। उन्होंने भारत को कुशल मानव संसाधन का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए युवाओं, सरकार और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।

इस अवसर पर कौशल विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयन्त चौधरी भी मौजूद थे।

कौशल विकास के क्षेत्र में युवाओं की भूमिका अहम

वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता में भाग लेने वाले भारतीय युवाओं के साथ प्रधानमंत्री की यह मुलाकात कौशल विकास, व्यावहारिक शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के महत्व को रेखांकित करती है। पदक जीतने वाले प्रतिभागियों को सम्मान देने के साथ अन्य प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाना भी इस संवाद का हिस्सा रहा।

युवाओं के लिए अब चुनौती अपनी उपलब्धियों को आगे के अवसरों में बदलने की है। वहीं, प्रशिक्षण संस्थानों और उद्योगों के लिए ऐसे माहौल का निर्माण जरूरी है, जिसमें युवाओं को आधुनिक तकनीक सीखने, अपनी दक्षता परखने और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आगे बढ़ने के अवसर मिल सकें।

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