चित्तौड़गढ़/लखनऊ, 15 मार्च 2026 (रविवार)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजस्थान के ऐतिहासिक शहर चित्तौड़गढ़ की वीरभूमि से विभाजनकारी सोच पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि बांटने वाली राजनीति न केवल समाज की एकता को कमजोर करती है, बल्कि देश को फिर से गुलामी की ओर धकेलने का खतरा पैदा करती है।
रविवार को ईनाणी सिटी सेंटर में आयोजित जौहर श्रद्धांजलि समारोह को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने साफ कहा कि कुछ लोग जातिवाद और अफवाहों के सहारे समाज में अविश्वास का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी राजनीति भारत की सामाजिक संरचना को भीतर से कमजोर कर सकती है।
रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तियों से दिया संदेश
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रसिद्ध कवि रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तियां सुनाकर वीरता और एकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा—
“मूल जानना बड़ा कठिन है नदियों का-वीरों का,
धनुष छोड़कर और गोत्र क्या होता रणधीरों का…”
सीएम योगी ने कहा कि इतिहास गवाह है कि वीरों की पहचान उनके कर्म से होती है, न कि जाति या वंश से। उनके अनुसार जो लोग समाज को जाति के नाम पर बांटते हैं, वे दरअसल कायरता और संकीर्ण सोच को बढ़ावा देते हैं।
राम मंदिर का विरोध करने वालों पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में उन लोगों की भी आलोचना की जिन्होंने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का विरोध किया था। उन्होंने कहा कि यही लोग अब अलग-अलग मुद्दों के बहाने समाज को बांटने का प्रयास कर रहे हैं।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कुछ लोगों ने तो भगवान राम और श्रीकृष्ण के अस्तित्व पर भी सवाल उठाए थे। उनके मुताबिक ऐसे तत्वों ने राम मंदिर आंदोलन को कमजोर करने की हर संभव कोशिश की और रामसेतु को भी तोड़ने की बात कही थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन प्रयासों का उद्देश्य देश में अविश्वास का माहौल बनाना और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े करना था।
वीरभूमि चित्तौड़गढ़ की गौरवगाथा का किया स्मरण
सीएम योगी ने अपने भाषण में चित्तौड़गढ़ और मेवाड़ की ऐतिहासिक विरासत का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह धरती केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की अस्मिता और स्वाभिमान का प्रतीक है।
उन्होंने महाराणा प्रताप, महाराणा सांगा, महारानी पद्मिनी और बप्पा रावल जैसे महान योद्धाओं को याद करते हुए कहा कि इन वीरों ने अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि देश और धर्म की रक्षा के लिए संघर्ष किया।
योगी ने कहा कि चित्तौड़गढ़ का किला केवल पत्थरों से बना एक दुर्ग नहीं है, बल्कि यह सदियों से भारत की स्वतंत्रता और सम्मान का प्रहरी बनकर खड़ा है।
जौहर की परंपरा को बताया नारी अस्मिता का प्रतीक
मुख्यमंत्री ने इतिहास के तीन बड़े जौहर—1303, 1535 और 1568—का उल्लेख करते हुए कहा कि यह घटनाएं भारतीय नारी के अदम्य साहस और स्वाभिमान की मिसाल हैं।
उन्होंने महारानी पद्मिनी के नेतृत्व में हुए जौहर को नारी गरिमा की रक्षा का प्रतीक बताया। योगी ने कहा कि माता सीता के संकल्प की तरह ही महारानी पद्मिनी ने भी परिस्थितियों के सामने झुकने के बजाय आत्मसम्मान को सर्वोपरि रखा।
उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा पर भी बोले
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सरकार ने अपराध और महिला सुरक्षा के मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है।
योगी के अनुसार आज 25 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में बेटियां न केवल स्कूल और कॉलेज जा रही हैं, बल्कि नाइट शिफ्ट में काम करके भी सुरक्षित घर लौट रही हैं। उन्होंने कहा कि हर महिला को सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन का अधिकार मिलना चाहिए।
राष्ट्रनायकों के संघर्ष से लेने की अपील
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज और गुरु गोबिंद सिंह के संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन महान व्यक्तित्वों ने सत्ता या व्यक्तिगत हित के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
उन्होंने कहा कि इतिहास में वही लोग अमर होते हैं, जो राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हैं।
कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद
इस अवसर पर मेवाड़ के महाराणा विश्वराज सिंह, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, राजस्थान सरकार के मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़, सांसद सीपी जोशी सहित कई जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी ने पंजाब के पूर्व राज्यपाल वीपी सिंह की एक पुस्तक का विमोचन भी किया और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित किया।







