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Rule of Law पर सीएम योगी का बड़ा बयान, बोले- माफिया राज से मुक्त हुआ यूपी, अब कानून का शासन

On: October 17, 2026
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Rule of Law पर सीएम योगी का बड़ा बयान
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लखनऊ/17 अक्टूबर 2026: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब ‘रूल ऑफ माफिया’ से मुक्त होकर ‘रूल ऑफ लॉ’ यानी कानून के शासन की दिशा में आगे बढ़ चुका है। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति या पद संविधान से ऊपर नहीं हो सकता। युवा अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने न्याय, संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक सिद्धांतों की रक्षा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब अन्याय सामने हो, तब चुप रहना विकल्प नहीं होना चाहिए।

मुख्यमंत्री शनिवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ के पंचम दीक्षांत समारोह में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने प्रदेश की कानून-व्यवस्था, न्यायपालिका की भूमिका, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर अपराध और विकसित भारत के लक्ष्य पर अपने विचार रखे। समारोह में मेधावी विद्यार्थियों को पदक देकर सम्मानित भी किया गया।

रूल ऑफ माफिया से रूल ऑफ लॉ तक पहुंचा उत्तर प्रदेश: योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था और निवेश के माहौल को लेकर कई तरह की आशंकाएं रहती थीं। उनके अनुसार, माफिया का प्रभाव विकास की राह में बाधा बनता था। वर्तमान सरकार ने कानून का शासन स्थापित करने और प्रदेश की छवि बदलने के लिए काम किया है।

उन्होंने युवा अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि संविधान की सर्वोच्चता लोकतंत्र की बुनियाद है। किसी व्यक्ति, संस्था या पद को संविधान से ऊपर नहीं माना जा सकता।

मुख्यमंत्री ने अधिवक्ताओं से न्याय के पक्ष में मजबूती से खड़े होने की अपील की। उन्होंने कहा कि इतिहास अपना फैसला सुनाएगा, लेकिन उस फैसले के पक्ष में तथ्यों और तर्कों के साथ बहस करने की जिम्मेदारी विधि विशेषज्ञों की है।

समारोह की शुरुआत मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और पुष्प अर्पित करने के साथ हुई। छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। इसके बाद मुख्यमंत्री ने मेधावी विद्यार्थियों को पदक प्रदान किए।

आपातकाल ने समझाया कानून के शासन का महत्व

मुख्यमंत्री ने 15 अगस्त 1947 और 26 जनवरी 1950 के साथ 25 जून 1975 को भी भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की महत्वपूर्ण तारीख बताया। उन्होंने आपातकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि इस दौर ने ‘रूल ऑफ लॉ’ और ‘रूलर ऑफ लॉ’ के बीच का अंतर समझाया।

उन्होंने न्यायमूर्ति एचआर खन्ना की असहमति का उदाहरण देते हुए कहा कि सिद्धांतों के पक्ष में लिया गया निर्णय व्यक्ति को इतिहास में विशेष स्थान दिला सकता है। मुख्यमंत्री ने युवा अधिवक्ताओं से संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने का आग्रह किया।

उनका संदेश था कि कानून का वास्तविक महत्व तभी है, जब उसका पालन सत्ता और समाज के सभी वर्गों पर समान रूप से हो।

‘सत्यं वद, धर्मं चर’ को जीवन में उतारें युवा अधिवक्ता

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवा विधि स्नातकों को भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि ‘सत्यं वद, धर्मं चर, स्वाध्यायान्मा प्रमदः’ जैसे सिद्धांतों को केवल अपने चैंबर की दीवारों पर लिखने के बजाय जीवन में अपनाना चाहिए।

उन्होंने सत्यनिष्ठा और निरंतर अध्ययन को एक अच्छे अधिवक्ता की पहचान बताया। मुख्यमंत्री ने डॉ. राम मनोहर लोहिया के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि एक आदर्श विधिवेत्ता में शिव जैसा मस्तिष्क, कृष्ण जैसा हृदय और राम जैसा वचन होना चाहिए।

उनके अनुसार, अधिवक्ता का पेशा केवल मुकदमे जीतने तक सीमित नहीं है। समाज में न्याय सुनिश्चित करने, कमजोर वर्गों की सहायता करने और लोगों के अधिकारों की रक्षा करने में भी वकीलों की अहम भूमिका होती है।

2047 तक विकसित भारत के निर्माण में युवा वकीलों की भूमिका

मुख्यमंत्री ने विकसित भारत के लक्ष्य को एक मुकदमे की तरह प्रस्तुत करते हुए कहा कि 140 करोड़ देशवासियों के इस संकल्प की पैरवी तथ्यों, साक्ष्यों और ईमानदारी के आधार पर करनी होगी।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में युवा अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश को वर्ष 2029-30 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए कार्ययोजना तैयार की गई है।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने पेशेवर ज्ञान का इस्तेमाल समाज की समस्याओं को समझने और उनके समाधान में करें। उन्होंने गांवों में जमीन तथा पारिवारिक विवादों के समाधान में योगदान देने की जरूरत पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि किसी अधिवक्ता की सबसे बड़ी पूंजी उसकी साख होती है। गलत काम करने का दबाव आने पर भी सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए।

AI को सहायक बनाएं, अपने विवेक का विकल्प नहीं

दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते इस्तेमाल और उससे जुड़ी चुनौतियों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि AI काम को आसान बना सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय इंसान के विवेक और जिम्मेदारी के आधार पर ही होना चाहिए।

उन्होंने आगाह किया कि लापरवाही से तैयार किया गया कानूनी मसौदा किसी निर्दोष व्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकता है। इसी तरह डीपफेक और साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों ने डिजिटल साक्ष्यों की विश्वसनीयता को लेकर नई चुनौतियां खड़ी की हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में साइबर थाने स्थापित हैं और प्रदेश के 1,583 थानों में साइबर हेल्प डेस्क संचालित हैं। उन्होंने ‘एआई प्रज्ञा’ पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से 10 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने युवा अधिवक्ताओं से तकनीक का उपयोग जिम्मेदारी से करने और कानूनी प्रक्रियाओं में मानवीय विवेक को प्राथमिकता देने की अपील की।

दूसरों के जीवन में बदलाव से तय होगी सफलता: न्यायमूर्ति विक्रम नाथ

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि डिग्री प्राप्त करना मंजिल नहीं, बल्कि एक नई यात्रा की शुरुआत है। शिक्षा की वास्तविक परीक्षा विश्वविद्यालय से बाहर शुरू होती है, जहां व्यक्ति को अपने ज्ञान और कौशल का इस्तेमाल समाज के लिए करना होता है।

उन्होंने कहा कि किसी विद्यार्थी की सफलता का आकलन इस बात से भी किया जाना चाहिए कि उसने दूसरों के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव लाया। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने युवा विधि स्नातकों से संवैधानिक मूल्यों, करुणा और संवेदनशीलता को अपने पेशेवर जीवन का हिस्सा बनाने का आग्रह किया।

कानून के शासन को मजबूत करें विद्यार्थी: मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली ने कहा कि विधि शिक्षा के क्षेत्र में डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का विशेष स्थान है। संस्थान ने न्यायपालिका, विधि शिक्षा और लोकसेवा के लिए योग्य पेशेवर तैयार करने में योगदान दिया है।

उन्होंने विश्वास जताया कि यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी संस्थान की प्रतिष्ठा और उच्च मानकों को आगे बढ़ाएंगे। मुख्य न्यायाधीश ने कानून के शासन को मजबूत करने और न्याय व्यवस्था के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।

20 वर्षों में 250 से अधिक न्यायिक अधिकारी तैयार किए: कुलपति

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अमर पाल सिंह ने संस्थान की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले 20 वर्षों में विश्वविद्यालय ने उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों की न्यायिक सेवाओं को 250 से अधिक अधिकारी दिए हैं।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त विधि विशेषज्ञ विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। विधि शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत या भौतिक सफलता हासिल करना नहीं, बल्कि समाज की सेवा करना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान का इस्तेमाल वंचित और जरूरतमंद वर्गों के कल्याण के लिए करने की अपील की।

रुपाली जायसवाल और तेजस्वनी कौशल को स्वर्ण पदक

दीक्षांत समारोह में विभिन्न पाठ्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।

एलएलएम पाठ्यक्रम में रुपाली जायसवाल को स्वर्ण पदक, चित्रा सिंह को रजत पदक और सौम्या गिरी को कांस्य पदक प्रदान किया गया। एलएलबी ऑनर्स में तेजस्वनी कौशल ने स्वर्ण पदक हासिल किया, जबकि ईशा अग्रवाल को रजत और निशा वर्मा को कांस्य पदक मिला।

ईशा अग्रवाल को तीन प्रायोजित स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया। इनमें क्रिमिनल लॉ के लिए जस्टिस ओपी प्रधान मेमोरियल, कॉन्स्टिट्यूशनल लॉ के लिए पद्मावती मोहनलाल जरीवाला और स्टूडेंट ऑफ द ईयर के लिए वीरेंद्र भाटिया स्वर्ण पदक शामिल हैं।

इसके अलावा, तान्या वर्मा को टैक्सेशन में प्रदीप कुमार अग्रवाल मेमोरियल स्वर्ण पदक मिला। मालविका पचौरी को सर्वश्रेष्ठ मूटिंग के लिए केके लूथरा मेमोरियल स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।

साइबर लॉ और बौद्धिक संपदा अधिकार में भी मेधावियों का सम्मान

डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को भी पदक प्रदान किए गए।

साइबर लॉ में भास्कर पांडे, जयंत अग्रवाल और चिराग निगम को क्रमशः स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक मिला। बौद्धिक संपदा अधिकार के पाठ्यक्रम में आशी पांडे ने स्वर्ण, रितेश मेहता ने रजत और ईशा अस्थाना ने कांस्य पदक प्राप्त किया।

मीडिया लॉ में अंशुमान सिंह को स्वर्ण पदक और संतुष्ट सोनकर को रजत पदक प्रदान किया गया।

दीक्षांत समारोह में कई प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद

समारोह में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली, उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, कुलपति प्रो. अमर पाल सिंह, विभागाध्यक्ष प्रो. मनीष सिंह और कुलसचिव केशव कुमार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

इसके अलावा न्यायमूर्तियों, विश्वविद्यालय के शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।

निष्कर्ष: डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानून के शासन, संवैधानिक मूल्यों और न्याय के प्रति प्रतिबद्धता को प्रमुखता से उठाया। युवा अधिवक्ताओं से उन्होंने पेशेवर ईमानदारी बनाए रखने, तकनीक का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने की अपील की। समारोह में मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान भी किया गया, जिन्होंने विधि शिक्षा के क्षेत्र में अपनी उपलब्धियों से संस्थान का गौरव बढ़ाया।

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