लखनऊ/27 सितंबर 2026: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को लखनऊ में प्रेस वार्ता के दौरान SIR विवाद को लेकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों पर निशाना साधा। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल राजनीतिक हितों के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े कर रहे हैं और इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
मुख्यमंत्री ने विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR), चुनाव आयोग और ईवीएम को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि चुनाव में जीत का श्रेय राजनीतिक दल अपनी मेहनत को देते हैं, जबकि हार की स्थिति में चुनाव आयोग और ईवीएम पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
SIR विवाद पर योगी ने विपक्ष से पूछे सवाल
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पहले भी होती रही है। उन्होंने 1952, 1962 और 2003 के SIR का उल्लेख किया और कहा कि इस बार कांग्रेस, सपा और आरजेडी की ओर से जिस तरह विरोध किया जा रहा है, वह उचित नहीं है।
निर्वाचन आयोग के दस्तावेजों के मुताबिक बिहार में पिछला Intensive Revision वर्ष 2003 में हुआ था। आयोग के अनुसार SIR का उद्देश्य पात्र मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करना और मृत, स्थानांतरित या अपात्र मतदाताओं के नामों को हटाकर मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है।
उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में 2026 की SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता अपने नाम से संबंधित जानकारी निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर भी देख सकते हैं। आयोग ने इसके लिए अलग ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध कराई है।
‘जीतें तो पुरुषार्थ, हारें तो EVM और चुनाव आयोग’
प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों के चुनावी रवैये पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जब वे चुनाव जीतते हैं तो इसका श्रेय अपने राजनीतिक पुरुषार्थ को देते हैं, लेकिन चुनाव हारने पर ईवीएम और चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराते हैं।
योगी ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में चुनाव परिणामों को स्वीकार करने के साथ संस्थाओं की विश्वसनीयता का भी सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने ईवीएम को ‘ब्लैक बॉक्स’ कहे जाने पर भी आपत्ति जताई और कांग्रेस के पुराने चुनावी रुख का उल्लेख किया।
यह मुख्यमंत्री का राजनीतिक बयान है; विपक्षी दल SIR और चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी अलग आपत्तियां और सवाल सार्वजनिक रूप से रखते रहे हैं।
संवैधानिक संस्थाओं को लेकर भी साधा निशाना
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को राजनीतिक मुद्दों के लिए संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा करने से बचना चाहिए। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाए जाने को भी दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग ने फॉर्म-6 और मतदाता सूची में छूटे लोगों से जुड़े मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट की है। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस से अपने आरोपों और बयानों पर पुनर्विचार करने तथा संवैधानिक संस्थाओं और नागरिकों से माफी मांगने की मांग की।
आपातकाल और राफेल का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के इतिहास का उल्लेख करते हुए 25 जून 1975 को लागू किए गए आपातकाल को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनी हुई सरकारों को प्रभावित करने वाले कदम उठाए गए।
योगी ने राफेल विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस ने उस समय भी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) जैसी संवैधानिक संस्था पर सवाल उठाए थे। उन्होंने इसे विपक्ष की संस्थाओं के प्रति कथित रवैये से जोड़कर पेश किया।
बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर पर भी कांग्रेस से सवाल
मुख्यमंत्री ने बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सैन्य अभियानों पर सवाल उठाते समय राजनीतिक दलों को सावधानी बरतनी चाहिए।
योगी ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों को लेकर विपक्ष की टिप्पणियों पर भी सवाल उठे हैं। उन्होंने इसे देश की सुरक्षा और सेना के मनोबल से जोड़ते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा।
SIR को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका क्या है?
भारत निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जो देश में लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति चुनावों के प्रशासन की जिम्मेदारी संभालती है। संविधान का अनुच्छेद 324 निर्वाचन आयोग को चुनावों की निगरानी, निर्देशन और नियंत्रण से संबंधित अधिकार देता है।
SIR के तहत मतदाता सूची की व्यापक जांच और पुनरीक्षण किया जाता है। निर्वाचन आयोग के मुताबिक इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र नागरिक मतदाता सूची में शामिल हों और अपात्र नामों को हटाया जा सके।
लखनऊ की प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की आलोचना को राजनीतिक और संस्थागत सवालों से जोड़ते हुए अपनी बात रखी। दूसरी ओर, SIR को लेकर विपक्षी दलों की आपत्तियां भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बनी हुई हैं।









