नई दिल्ली, 19 अगस्त 2026। युवाओं, खासकर GenZ के साथ सरकार का सीधा संवाद बढ़ाने के लिए केंद्र ने एक नई पहल की तैयारी शुरू की है। मोदी सरकार का GenZ प्लान अब विश्वविद्यालयों तक पहुंच बनाने पर केंद्रित है। प्रस्तावित ‘वन डे, वन यूनिवर्सिटी’ कार्यक्रम के तहत केंद्रीय मंत्री हर दिन एक विश्वविद्यालय का दौरा कर छात्रों से बातचीत करेंगे।
इस पहल का मकसद सिर्फ औपचारिक मुलाकात तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार छात्रों की चिंताओं, देश से जुड़े मुद्दों पर उनकी राय और युवाओं के लिए चल रही योजनाओं को लेकर उनकी प्रतिक्रिया सीधे जानना चाहती है।
मोदी सरकार का GenZ प्लान क्या है?
समाचार एजेंसी पीटीआई को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, ‘वन डे, वन यूनिवर्सिटी’ नाम से प्रस्तावित इस कार्यक्रम के जरिए केंद्रीय मंत्रियों को अलग-अलग विश्वविद्यालयों में भेजने की तैयारी है।
दौरों के दौरान मंत्री छात्रों के साथ संवाद करेंगे। देश को प्रभावित करने वाले विभिन्न मुद्दों पर युवाओं की राय ली जाएगी। इसके अलावा शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और युवाओं से संबंधित सरकारी योजनाओं की जानकारी भी छात्रों तक पहुंचाई जाएगी।
यानी सरकार का फोकस अब केवल सोशल मीडिया के जरिए युवाओं तक पहुंचने पर नहीं, बल्कि कैंपस में आमने-सामने संवाद स्थापित करने पर भी है।
विश्वविद्यालयों में छात्रों से सीधे संवाद करेंगे केंद्रीय मंत्री
प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत केंद्रीय मंत्रियों का विश्वविद्यालयों का दौरा नियमित रूप से कराने की योजना है। इसका उद्देश्य अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों के युवाओं तक पहुंच बनाना है।
विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों के साथ बातचीत के दौरान उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं को समझने की कोशिश की जाएगी। यह संवाद दोतरफा रखने की योजना है, ताकि छात्र केवल सरकार की योजनाओं की जानकारी हासिल न करें, बल्कि अपनी बात भी सीधे केंद्रीय मंत्रियों के सामने रख सकें।
युवाओं के बीच रोजगार, शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, तकनीक और भविष्य की संभावनाएं जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में रहते हैं। ऐसे में विश्वविद्यालयों में सीधा संवाद सरकार को जमीनी स्तर पर छात्रों की प्राथमिकताओं को समझने का अवसर दे सकता है।
NEET विवाद के बाद बढ़ा GenZ से कनेक्ट करने पर जोर
सरकार की इस पहल को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब NEET पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में छात्रों और युवाओं के प्रदर्शन हुए थे।
छात्रों के आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी केंद्रीय मंत्रियों से GenZ के साथ संवाद और जुड़ाव बढ़ाने पर जोर दिया था। इसके बाद प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर युवाओं से जुड़ने वाली रील्स भी साझा की थीं।
प्रधानमंत्री की इन सोशल मीडिया पोस्ट को युवाओं के बीच अच्छा रिस्पॉन्स मिला। हालांकि, विश्वविद्यालयों में सीधे पहुंचकर संवाद करने की रणनीति डिजिटल प्लेटफॉर्म से आगे बढ़कर आमने-सामने संपर्क स्थापित करने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है।
प्रह्लाद जोशी और मनसुख मंडाविया को मिली समन्वय की जिम्मेदारी
सूत्रों के मुताबिक, इस प्रस्तावित कार्यक्रम के समन्वय की जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी और युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मंडाविया को दी गई है।
दोनों मंत्री विश्वविद्यालयों और अन्य केंद्रीय मंत्रियों के साथ कार्यक्रम के संचालन और समन्वय से जुड़े काम देखेंगे। योजना को देश के अलग-अलग हिस्सों में विश्वविद्यालयों तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।
कैबिनेट बैठक में भी हुई चर्चा
सूत्रों के अनुसार, बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में भी ‘वन डे, वन यूनिवर्सिटी’ पहल पर चर्चा हुई।
फिलहाल इस कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा और विश्वविद्यालयों के दौरे का पूरा कार्यक्रम सामने आना बाकी है। लेकिन यदि इसे व्यापक स्तर पर लागू किया जाता है तो केंद्रीय मंत्रियों की सीधे विश्वविद्यालय परिसरों तक पहुंच बढ़ेगी।
मोदी सरकार का GenZ प्लान ऐसे समय में सामने आया है, जब देश की युवा आबादी नीतियों, शिक्षा, रोजगार और भविष्य से जुड़े फैसलों को लेकर अधिक मुखर है। ऐसे में कैंपस में सीधा संवाद सरकार के लिए युवाओं की नब्ज समझने का एक नया माध्यम बन सकता है।











