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एआई से मैन्यूफैक्चरिंग तक, ‘भारत में निवेश’ के लिए सबसे अनुकूल माहौल; अमेरिका में निवेशकों से बोलीं सीतारमण

On: August 29, 2026
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भारत में निवेश’ के लिए सबसे अनुकूल माहौल, अमेरिका में निवेशकों से बोलीं सीतारमण
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नई दिल्ली/29 अगस्त 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अमेरिकी कंपनियों और निवेशकों को भारत में निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए कहा है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच भारत में निवेश के लिए माहौल बेहद अनुकूल है। शिकागो में निवेशकों के साथ संवाद के दौरान उन्होंने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मैन्यूफैक्चरिंग, रक्षा उत्पादन, फूड प्रोसेसिंग और वित्तीय सेवाओं समेत कई क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं गिनाईं।

सीतारमण ने कहा कि भारत के पास मजबूत घरेलू मांग, निवेश आधारित आर्थिक विकास, बड़ा और सक्षम बाजार, कुशल मानव संसाधन तथा तेजी से विकसित हो रहा भौतिक और डिजिटल बुनियादी ढांचा है। उनके मुताबिक, इन सभी खूबियों का एक साथ होना भारत को वैश्विक निवेश के लिए अलग तरह का आकर्षण देता है।

भारत में निवेश के लिए कई सेक्टर में अवसर

शिकागो में अमेरिकी कंपनियों और पूंजी निवेशकों से बातचीत के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि भारत में निवेश का अवसर किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। एआई और एनालिटिक्स से लेकर इंजीनियरिंग उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा निर्माण, खाद्य प्रसंस्करण और वित्तीय सेवाओं तक कई क्षेत्रों में संभावनाएं मौजूद हैं।

उन्होंने निवेशकों को भारत के डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की ताकत से भी अवगत कराया। सीतारमण ने यूपीआई, आधार, डिजिलॉकर और ओएनडीसी जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे कंपनियों को भारत में नए डिजिटल उत्पाद और सेवाएं विकसित करने में मदद मिल सकती है।

उनका जोर इस बात पर रहा कि भारत केवल एक बड़ा उपभोक्ता बाजार नहीं है। यहां से कंपनियां दुनिया के दूसरे बाजारों के लिए भी उत्पादन, तकनीकी समाधान और नए उत्पाद तैयार कर सकती हैं।

एआई और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बताया बड़ी ताकत

भारत में तेजी से बढ़ता डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर निवेशकों के लिए एक अहम अवसर के रूप में सामने आ रहा है। वित्त मंत्री ने कहा कि देश में मौजूद डिजिटल प्लेटफॉर्म कंपनियों को बड़े पैमाने पर डेटा, भुगतान और डिजिटल सेवाओं से जुड़ा इकोसिस्टम उपलब्ध कराते हैं।

एआई, डेटा एनालिटिक्स और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में भारत की कुशल युवा आबादी को भी उन्होंने निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण ताकत बताया। इससे वैश्विक कंपनियों को भारत में तकनीकी उत्पादों के विकास के साथ-साथ शोध और नवाचार के लिए भी आधार मिल सकता है।

GIFT City में वित्तीय सेवाओं का बढ़ता दायरा

सीतारमण ने गुजरात की गिफ्ट सिटी का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यहां वित्तीय सेवाओं से जुड़ी करीब 1,250 कंपनियां पंजीकृत हो चुकी हैं।

वित्त मंत्री ने निवेशकों से गिफ्ट सिटी के जरिए भारत में वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में मौजूद अवसरों का लाभ उठाने को कहा। सरकार इसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय गतिविधियों के लिए भारत के एक महत्वपूर्ण केंद्र के तौर पर विकसित कर रही है।

इलेक्ट्रॉनिक्स में असेंबली से कंपोनेंट मैन्यूफैक्चरिंग की ओर बढ़ रहा भारत

वित्त मंत्री ने इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में भारत की बदलती भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश अब केवल इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की असेंबली तक सीमित रहने के बजाय कंपोनेंट मैन्यूफैक्चरिंग को गहराई देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

सरकार मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के अलावा अन्य नीतिगत समर्थन भी उपलब्ध करा रही है। इसका उद्देश्य देश में उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ वैश्विक कंपनियों को भारत में अपनी सप्लाई चेन विकसित करने के लिए आकर्षित करना है।

यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक कंपनियां अपनी सप्लाई चेन को अधिक विविध बनाने की कोशिश कर रही हैं। भारत इस बदलते परिदृश्य में उत्पादन और निर्यात के एक बड़े केंद्र के रूप में अपनी जगह मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

दुनिया के लिए उत्पादन का प्लेटफॉर्म बन सकता है भारत

सीतारमण ने अमेरिकी निवेशकों से कहा कि भारत में उन्हें दर्जनों क्षेत्रों में निवेश के अवसर मिल सकते हैं। यहां स्थापित होने वाली कंपनियां केवल भारतीय बाजार को ध्यान में रखकर उत्पादन करने के बजाय वैश्विक बाजारों के लिए भी उत्पाद तैयार कर सकती हैं।

वित्त मंत्री ने भारत की मजबूत घरेलू मांग, कुशल श्रमशक्ति और तेजी से विकसित हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर को वैश्विक कंपनियों के लिए अहम लाभ बताया। उनका संदेश साफ था—भारत में निवेश का मतलब सिर्फ एक बड़े बाजार तक पहुंच नहीं, बल्कि वैश्विक उत्पादन और सप्लाई चेन का हिस्सा बनने का अवसर भी है।

कनाडा और जापान के बाद अमेरिका पर निवेश आकर्षित करने का फोकस

वित्त मंत्री का अमेरिकी निवेशकों के साथ संवाद ऐसे समय हुआ है जब सरकार विदेशों में भारतीय अर्थव्यवस्था और निवेश के अवसरों को लेकर लगातार संपर्क बढ़ा रही है। इससे पहले सीतारमण कनाडा दौरे पर थीं। वहां भारत और कनाडा ने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 70 अरब डॉलर तक ले जाने की दिशा में सहमति जताई है।

वहीं, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल में जापान की यात्रा के दौरान निवेशकों और उद्यमियों से मुलाकात की थी। सरकार की इन कोशिशों का व्यापक उद्देश्य विदेशी पूंजी और तकनीक को भारत की उत्पादन क्षमता, रोजगार और वैश्विक सप्लाई चेन से जोड़ना है।

शिकागो में सीतारमण का अमेरिकी निवेशकों को संदेश इसी रणनीति का अगला हिस्सा माना जा सकता है। भारत अब खुद को केवल निवेश पाने वाले बाजार के तौर पर नहीं, बल्कि वैश्विक उत्पादन, नवाचार और सप्लाई चेन के एक प्रमुख प्लेटफॉर्म के रूप में पेश कर रहा है।

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