नई दिल्ली/30 अगस्त 2026: नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बीच भारत एक बार फिर अपने पड़ोसी देश के लिए मदद का बड़ा हाथ बढ़ाने की तैयारी में है। भारत सरकार नेपाल के लिए बड़े राहत पैकेज पर विचार कर रही है। फिलहाल नई दिल्ली का फोकस राहत सामग्री, बचाव अभियान, चिकित्सा सहायता और तकनीकी विशेषज्ञों को नेपाल भेजने पर है। वित्तीय पैकेज को लेकर अंतिम फैसला आपदा से हुए नुकसान और नेपाल की जरूरतों के विस्तृत आकलन के बाद होने की संभावना है।
नई दिल्ली में इस बात के भी संकेत हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे से लौटने के बाद राहत पैकेज को लेकर आगे निर्णय लिया जा सकता है। आपदा के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बात कर भारत की ओर से हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया था।
भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, रविवार तक नेपाल के आपदा प्रभावित क्षेत्रों से 149 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। मंत्रालय की ओर से इन नागरिकों के नामों की सूची भी सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की गई है।
नेपाल के लिए राहत पैकेज से पहले भारत ने तेज किया राहत अभियान
वित्तीय सहायता की घोषणा से पहले भारत ने जमीन पर राहत और बचाव अभियान को प्राथमिकता दी है। भारतीय वायुसेना के विमान लगातार राहत सामग्री लेकर काठमांडू पहुंच रहे हैं। अब तक चार उड़ानों के जरिए करीब 68.5 टन राहत सामग्री नेपाल भेजी जा चुकी है।
इस राहत सामग्री में तंबू, कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, स्वच्छता किट, सोलर लैंप, दवाइयां, खाद्य पैकेट, जनरेटर, पानी शुद्ध करने वाली गोलियां और जल निकासी पंप शामिल हैं। यानी जरूरत के अलग-अलग मोर्चों को ध्यान में रखते हुए सहायता भेजी जा रही है।
भारत ने केवल राहत सामग्री ही नहीं भेजी है। डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मियों की टीम के साथ बिजली परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश और बचाव में मदद करने वाले विशेषज्ञ दल भी नेपाल पहुंचे हैं। डीएनए पहचान के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम भी भेजी गई है।
त्रिशूली क्षेत्र की जलविद्युत परियोजनाओं पर भी नजर
आपदा से नेपाल के त्रिशूली क्षेत्र में 11 जलविद्युत परियोजनाओं के प्रभावित होने की सूचना सामने आई है। इन परियोजनाओं में बड़ी संख्या में कर्मचारियों के सुरंगों में फंसे होने की आशंका जताई गई है।
ऐसे में भारतीय विशेषज्ञ दलों की भूमिका महज राहत वितरण तक सीमित नहीं है। सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश, तकनीकी आकलन और जरूरत के मुताबिक बचाव कार्य में विशेषज्ञ सहायता महत्वपूर्ण हो सकती है।
संपर्क मार्ग बहाल करने के लिए बेली ब्रिज का सामान भेजा
बाढ़ और भूस्खलन के कारण प्रभावित संपर्क मार्गों को दोबारा चालू करना भी बड़ी चुनौती है। भारत ने इसके लिए बेली ब्रिज से जुड़े उपकरण नेपाल भेजे हैं।
एक बेली ब्रिज पहले से नेपाल में मौजूद है, जबकि अतिरिक्त पुलों के उपकरण और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम भी रविवार को नेपाल पहुंची। ऐसे अस्थायी पुल आपदा के दौरान टूटे या क्षतिग्रस्त संपर्क मार्गों को जल्दी बहाल करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, फिलहाल भारत का ध्यान मानवीय सहायता, चिकित्सा सेवाओं और बचाव सहयोग पर केंद्रित है।
नुकसान का आकलन होने के बाद तय होगा वित्तीय पैकेज
नेपाल के लिए अलग से वित्तीय राहत पैकेज की औपचारिक घोषणा अभी नहीं हुई है। भारत सरकार नुकसान के वास्तविक पैमाने, पुनर्निर्माण की जरूरतों और नेपाल सरकार की मांग का आकलन कर रही है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, आवश्यकता पड़ने पर भारत पुनर्वास और बुनियादी ढांचे की बहाली के लिए बड़ा आर्थिक पैकेज उपलब्ध करा सकता है। हालांकि इसकी राशि और स्वरूप पर अंतिम फैसला बाद में होगा।
आपदा में कई भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। उनके बचाव, पहचान और सुरक्षित वापसी का काम लगातार जारी है।
2015 के भूकंप में भी भारत बना था नेपाल का बड़ा मददगार
नेपाल के साथ भारत की आपदा के समय मदद की कहानी नई नहीं है। वर्ष 2015 में आए विनाशकारी भूकंप के दौरान भी भारत ने बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया था।
तब भारत ने ‘ऑपरेशन मैत्री’ शुरू कर नेपाल में राहत सामग्री, बचाव दल और जरूरी सहायता पहुंचाई थी। इसके बाद राहत और पुनर्निर्माण के लिए भारत की ओर से करीब एक अरब डॉलर की सहायता दिए जाने की बात सामने आई थी। इसके अतिरिक्त विकास और पुनर्निर्माण से जुड़ी परियोजनाओं के लिए भी एक अरब डॉलर की सहायता का प्रावधान किया गया था।
यही वजह है कि इस बार भी नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा के बीच भारत की भूमिका पर सबकी नजर है। तत्काल राहत से लेकर संपर्क व्यवस्था और तकनीकी बचाव तक भारत की सक्रियता दिख रही है। अब निगाह इस बात पर है कि नुकसान के व्यापक आकलन के बाद नई दिल्ली की ओर से प्रस्तावित नेपाल राहत पैकेज का स्वरूप क्या होता है।













