लखनऊ/10 सितंबर 2026: उत्तर प्रदेश सरकार ने दिल्ली के ओखला स्थित सिंचाई विभाग की जमीन से जुड़े कथित अवैध कब्जे और मतदाता सूची में नाम दर्ज होने के विवाद को लेकर अपना रुख सख्त कर लिया है। अदालतों में लंबित मामलों की प्रभावी पैरवी और जमीन से जुड़े विवादों के जल्द निस्तारण के लिए अधिशासी अभियंता बीके सिंह को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
मामला दिल्ली के जामिया नगर स्थित खिजर बाबा कॉलोनी से जुड़ा है, जहां सिंचाई विभाग की कथित जमीन पर बसी आबादी के कुछ निवासियों के मतदाता सूची में नाम दर्ज होने को लेकर विवाद सामने आया है। विभाग का कहना है कि जमीन से जुड़े मामलों की कानूनी लड़ाई को अब अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जाएगा।
ओखला की जमीन पर कब्जे को लेकर क्या है विवाद?
सिंचाई विभाग के मुताबिक, यमुना किनारे बाढ़ नियंत्रण और नहरों के रखरखाव से जुड़ी जमीन का एक हिस्सा लंबे समय से विभाग के अधीन रहा है। विभाग का दावा है कि आजादी से पहले यह व्यवस्था संयुक्त प्रांत के अधीन थी और बाद में उत्तर प्रदेश के हिस्से में रही। दिल्ली के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद यमुना तट से जुड़ी सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण की कुछ जमीनें उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के नाम दर्ज हुईं।
विभाग के अनुसार, बाद के वर्षों में इस जमीन के कुछ हिस्सों पर कब्जे हो गए और वहां आबादी बस गई। इसी जमीन पर खिजर बाबा कॉलोनी का मामला भी अदालतों तक पहुंचा है।
2002 में सिंचाई विभाग के पक्ष में आया फैसला
जमीन पर कब्जे को लेकर अदालत में दायर याचिका पर सुनवाई के बाद वर्ष 2002 में ओखला, जामिया नगर और पुस्ता रोड से संबंधित जमीन के मामले में सिंचाई विभाग के पक्ष में फैसला आया था।
इसके बाद वर्ष 2004 में विभाग ने जमीन के कुछ हिस्सों से कब्जा हटाया। हालांकि, आबादी वाले इलाकों में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। इसी दौरान 115 लोगों ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
इन लोगों की ओर से दावा किया गया कि उनके पास आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और बिजली-पानी के बिल जैसे दस्तावेज मौजूद हैं। उनका तर्क था कि जिस जमीन को लेकर विवाद है, वह पुरानी ग्राम सीमा और लाल डोरा क्षेत्र का हिस्सा है।
दिसंबर 2025 के फैसले के बाद फिर बढ़ा विवाद
मामले में दिसंबर 2025 में अदालत का फैसला सिंचाई विभाग के पक्ष में आया। इसके बाद कॉलोनी की एक मस्जिद और कुछ मकानों को सील किया गया था।
हालांकि, आगे की कार्रवाई शुरू होने से पहले अदालत की ओर से एक नया आदेश आया, जिसके तहत कार्रवाई पर रोक लगा दी गई। इसके चलते फिलहाल जमीन से जुड़ा मामला न्यायिक प्रक्रिया में लंबित है।
यही वजह है कि प्रदेश सरकार ने अब मामले की पैरवी को अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी एक नोडल अधिकारी को दी है।
बीके सिंह को मिली कानूनी पैरवी की जिम्मेदारी
सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता एवं विभागाध्यक्ष संदीप के मुताबिक, अधिशासी अभियंता बीके सिंह को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। उन्हें अदालतों में लंबित मामलों की प्रभावी पैरवी करने और कानूनी प्रक्रिया के जरिए विवाद का जल्द निस्तारण कराने की जिम्मेदारी दी गई है।
विभाग का फोकस फिलहाल जमीन से जुड़े कानूनी मामलों पर है। करीब छह एकड़ जमीन को लेकर विवाद चल रहा है।
वोटर लिस्ट में नाम को लेकर विभाग ने साफ किया रुख
मतदाता सूची में कॉलोनी के निवासियों के नाम दर्ज होने के सवाल पर सिंचाई विभाग ने अपनी भूमिका स्पष्ट की है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया में सिंचाई विभाग का कोई हस्तक्षेप नहीं है।
यानी जमीन के स्वामित्व और कब्जे का विवाद एक अलग कानूनी विषय है, जबकि मतदाता सूची में नाम दर्ज करने या हटाने का अधिकार संबंधित निर्वाचन तंत्र के पास होता है। ऐसे में दोनों मामलों को अलग-अलग प्रक्रियाओं के तहत देखा जाना है।
फिलहाल ओखला की इस जमीन को लेकर कानूनी विवाद अदालत में लंबित है। नोडल अधिकारी की नियुक्ति के बाद सरकार की कोशिश मामले की पैरवी को मजबूत करने और लंबी चल रही कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की है।









