नई दिल्ली/10 सितंबर 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को लेकर अगले बड़े लक्ष्यों की तस्वीर दुनिया के सामने रखी है। गुरुवार, 10 सितंबर को पेरिस में आयोजित इंटरनेशनल स्पेस समिट को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य 2035 तक अपना भारतीय स्पेस स्टेशन स्थापित करना और 2040 तक एक भारतीय को चंद्रमा पर भेजना है।
प्रधानमंत्री ने भारत की अब तक की अंतरिक्ष उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश का अंतरिक्ष कार्यक्रम केवल राष्ट्रीय गौरव तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य ऐसी तकनीक और वैज्ञानिक क्षमताएं विकसित करना है, जिनका लाभ भारत के साथ-साथ पूरी मानवता को मिले।
2035 तक भारतीय स्पेस स्टेशन, 2040 में चंद्रमा पर पहुंचने का लक्ष्य
पीएम मोदी ने कहा कि भारत की अंतरिक्ष यात्रा लगातार नए पड़ाव पार कर रही है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष एक भारतीय ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन का दौरा किया था। अब देश की नजर इससे भी बड़े लक्ष्यों पर है।
प्रधानमंत्री के मुताबिक, 2035 तक एक भारतीय स्पेस स्टेशन स्थापित करना और 2040 तक एक भारतीय को चंद्रमा पर भेजना भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के प्रमुख आगामी लक्ष्य हैं।
यह घोषणा भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम को लेकर भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। चंद्रमा पर भारतीय को भेजने का लक्ष्य देश के अंतरिक्ष अभियान को मानवयुक्त चंद्र मिशन की दिशा में एक बड़े चरण तक ले जाएगा।
चंद्रयान-3 और आदित्य-L1 का पीएम मोदी ने किया जिक्र
इंटरनेशनल स्पेस समिट में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के हालिया अंतरिक्ष अभियानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 ने भारत को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के पास सफलतापूर्वक उतरने वाला पहला देश बनाया।
इसके साथ ही उन्होंने आदित्य-L1 मिशन का जिक्र करते हुए कहा कि यह मिशन सूर्य के रहस्यों को समझने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। इन अभियानों को भारत की बढ़ती वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता के उदाहरण के तौर पर पेश करते हुए प्रधानमंत्री ने भारतीय वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीशियनों के योगदान की सराहना की।
उन्होंने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने कई पीढ़ियों के वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों की मेहनत से वैश्विक प्रतिष्ठा हासिल की है।
ISRO के साथ निजी अंतरिक्ष क्षेत्र भी बढ़ा रहा कदम
प्रधानमंत्री ने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की बढ़ती भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ISRO की विशेषज्ञता और उत्कृष्टता के साथ देश के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की उद्यमशीलता जुड़ रही है।
भारत में अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ने से आने वाले वर्षों में नए प्रयोग, तकनीकी विकास और व्यावसायिक अवसरों का दायरा बढ़ने की उम्मीद है। सरकार भी अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी निवेश और नवाचार को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम कर रही है।
सुरक्षित और टिकाऊ अंतरिक्ष के लिए भारत का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरिक्ष के भविष्य को लेकर भारत का रुख भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानूनों पर आधारित सुरक्षित और टिकाऊ स्पेस डोमेन का समर्थन करता है।
उन्होंने वैज्ञानिक डेटा के खुले और ईमानदार इस्तेमाल पर जोर देते हुए कहा कि अंतरिक्ष से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारी का उपयोग साझा उद्देश्यों के लिए किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि अंतरिक्ष की संभावनाएं असीमित हैं, लेकिन इसके इस्तेमाल को लेकर जिम्मेदारी भी सामूहिक है।
प्रधानमंत्री ने फ्रांस और दुनिया के अन्य देशों को भारत के अगली पीढ़ी के अंतरिक्ष अनुसंधान में साझेदार बनने का आह्वान किया।
फ्रांस के साथ अंतरिक्ष सहयोग का भी किया उल्लेख
पीएम मोदी ने भारत और फ्रांस के लंबे अंतरिक्ष सहयोग को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि 1960 के दशक में थुम्बा से भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत के समय से ही फ्रांस भारत का भरोसेमंद साझेदार रहा है।
आज दोनों देशों का सहयोग पृथ्वी अवलोकन से लेकर उन्नत अंतरिक्ष तकनीकों तक विस्तृत हो चुका है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह साझेदारी वैज्ञानिक उत्कृष्टता को मानवीय उद्देश्यों के साथ जोड़ती है।
उन्होंने फ्रांस और दुनिया के अन्य देशों को भारत के अगले अंतरिक्ष अभियान में सहभागी बनने का निमंत्रण दिया। प्रधानमंत्री का संदेश साफ था—अंतरिक्ष की खोज और तकनीकी प्रगति किसी एक देश की उपलब्धि भर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए साझा जिम्मेदारी भी है।











