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फिर साथ दिखे मोदी-पुतिन, दिल्ली में एक कार में किया सफर; बिश्केक के बाद दूसरी बार दिखी ‘कार डिप्लोमेसी’

On: September 11, 2026
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फिर साथ दिखे मोदी-पुतिन, दिल्ली में एक कार में किया सफर
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नई दिल्ली/11 सितंबर 2026: नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन से पहले भारत और रूस के रिश्तों की गर्माहट एक बार फिर कैमरों में कैद हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मुलाकात के बाद एक ही कार में सफर किया। दोनों नेता पुतिन की सुरक्षित मानी जाने वाली बख्तरबंद ‘ऑरस सेनाट लिमोजिन’ में साथ रवाना हुए। कूटनीतिक हलकों में नेताओं के इस तरह अनौपचारिक रूप से साथ समय बिताने को ‘कार डिप्लोमेसी’ के तौर पर देखा जा रहा है।

दोनों नेताओं की यह तस्वीर इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि कुछ समय पहले भी वे एक साथ कार में सफर करते नजर आए थे। ऐसे दौर में, जब भारत-रूस के रिश्तों पर कारोबार, ऊर्जा और रक्षा सहयोग के साथ वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों का असर है, इस तरह की सहज मुलाकात अपने आप में एक संदेश देती है।

मोदी-पुतिन की ‘कार डिप्लोमेसी’ ने खींचा ध्यान

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे से गले मिलकर अभिवादन किया और इसके बाद करीब 45 मिनट तक द्विपक्षीय बातचीत हुई।

बैठक में व्यापार, ऊर्जा और रक्षा समेत भारत-रूस संबंधों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। बातचीत खत्म होने के बाद दोनों नेताओं का एक ही वाहन में सफर करना इस मुलाकात को और खास बना गया।

पुतिन की जिस ऑरस सेनाट लिमोजिन में दोनों नेताओं ने सफर किया, उसे उसकी सुरक्षा और मजबूत बख्तरबंद संरचना के कारण ‘फोर्ट्रेस ऑन व्हील्स’ यानी ‘पहियों पर किला’ भी कहा जाता है।

चीन के बाद दिल्ली में भी एक साथ कार में दिखे

मोदी और पुतिन का इस तरह एक ही कार में सफर करना पहली घटना नहीं है। इससे पहले चीन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान भी दोनों नेता पुतिन की ऑरस सेनाट में साथ सफर करते नजर आए थे। उस दौरान भी दोनों की कार यात्रा ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं।

यही वजह है कि दिल्ली में दोबारा सामने आई यह तस्वीर महज एक यात्रा से ज्यादा चर्चा का विषय बन गई है। कूटनीति में औपचारिक बैठकें अपने स्थान पर महत्वपूर्ण होती हैं, लेकिन नेताओं के बीच सहज बातचीत और साथ बिताया गया निजी समय भी रिश्तों की मजबूती का संकेत माना जाता है।

क्या है ‘कार डिप्लोमेसी 4.0’?

आज की कूटनीति केवल बंद कमरे में होने वाली बैठकों और संयुक्त बयानों तक सीमित नहीं है। नेताओं की अनौपचारिक मुलाकातें, साथ में यात्रा करना और सार्वजनिक रूप से सहज नजर आना भी रिश्तों का संदेश देने का माध्यम बन चुके हैं।

मोदी-पुतिन की यह कार यात्रा इसी बदलती कूटनीतिक शैली की एक मिसाल के तौर पर देखी जा रही है। ‘कार डिप्लोमेसी 4.0’ के नाम से चर्चित इस तरह की तस्वीरें यह बताती हैं कि शीर्ष नेताओं के बीच व्यक्तिगत सहजता भी रणनीतिक साझेदारी की धारणा को मजबूत करने में भूमिका निभाती है।

हालांकि, किसी कार यात्रा को सीधे तौर पर किसी बड़े नीतिगत फैसले से जोड़ना उचित नहीं होगा। इसका महत्व मुख्य रूप से उस राजनीतिक और कूटनीतिक माहौल में है, जिसमें यह मुलाकात हुई।

भारत के लिए रूस क्यों है अहम?

भारत और रूस के रिश्ते दशकों पुराने हैं और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी कई क्षेत्रों में फैली हुई है। रक्षा सहयोग इसका प्रमुख आधार रहा है। भारत की सैन्य क्षमताओं के विकास में रूसी रक्षा प्रणालियों और उपकरणों की लंबे समय से भूमिका रही है।

रक्षा के अलावा ऊर्जा और व्यापार भी दोनों देशों के संबंधों के महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दे और अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं।

ऐसे में BRICS सम्मेलन से पहले मोदी और पुतिन की मुलाकात को केवल एक औपचारिक द्विपक्षीय बैठक के तौर पर नहीं देखा जा रहा। दोनों देशों के बीच रणनीतिक रिश्तों की दिशा और भविष्य के आर्थिक सहयोग को लेकर भी इस बातचीत पर नजर है।

दिसंबर 2025 में भारत आए थे पुतिन

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इससे पहले दिसंबर 2025 में भारत की यात्रा पर आए थे। इसके बाद सितंबर 2026 की शुरुआत में किर्गिस्तान में आयोजित SCO शिखर सम्मेलन के दौरान भी प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन की मुलाकात हुई थी।

अब नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन के बीच दोनों नेताओं की मुलाकात और फिर एक ही कार में साथ सफर करने की तस्वीर ने भारत-रूस संबंधों को लेकर चर्चा को एक अलग आयाम दे दिया है। औपचारिक वार्ता के साथ सामने आया यह अनौपचारिक दृश्य यह संकेत जरूर देता है कि दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संवाद का अपना एक सहज और व्यक्तिगत पक्ष भी है।

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