लखनऊ /17 सितंबर 2026: विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को राजधानी लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला-2026 का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के साथ मार्जिन मनी ऋण पोर्टल की शुरुआत की और कारीगरों व कामगारों को टूलकिट तथा ऋण सहायता से जुड़ी सुविधाएं प्रदान कीं। मेले में विभिन्न पारंपरिक और आधुनिक ट्रेड से जुड़े कारीगर अपने उत्पादों और हुनर को प्रदर्शित कर रहे हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब सरकारें सैफई में महोत्सव आयोजित करने, मुंबई से कलाकार बुलाने और बर्मिंघम की बग्गी लाकर जन्मदिन मनाने में व्यस्त हों, तब पारंपरिक कारीगरों और हस्तशिल्पियों के बारे में सोचने का समय कहां से मिलता। योगी ने कहा कि उस दौर में स्वदेशी और आत्मनिर्भरता जैसे विषय भी प्राथमिकता में नहीं थे।
विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला से कारीगरों को बाजार से जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने पारंपरिक हुनर को केवल विरासत के रूप में सुरक्षित रखने के बजाय उसे रोजगार और बाजार से जोड़ने की दिशा में काम किया है। उनके मुताबिक, उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर वर्ष 2018 में वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना लागू की गई और इसके अगले वर्ष 2019 में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना शुरू की गई।
उन्होंने कहा कि पिछले सात-आठ वर्षों में छह लाख से अधिक हस्तशिल्पियों और कारीगरों को प्रशिक्षण के साथ 15 हजार रुपये तक की टूलकिट उपलब्ध कराई गई है। सरकार का जोर इस बात पर है कि कारीगर का हुनर केवल स्थानीय बाजार तक सीमित न रहे, बल्कि उसे बेहतर डिजाइन, तकनीक, वित्तीय सहायता और बड़े बाजार से जोड़ा जाए।
विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला इसी सोच का एक मंच है, जहां पारंपरिक कारीगरी के साथ स्वदेशी उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
पांच नए पारंपरिक ट्रेड जोड़ने की बात
मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते समय और बाजार की जरूरतों को देखते हुए पारंपरिक ट्रेड के दायरे को बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कारीगरों के लिए प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक और वित्तीय सहायता को रोजगार की नई संभावनाओं से जोड़ने पर जोर दिया।
योगी ने भगवान विश्वकर्मा की शिल्प परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में निर्माण और तकनीकी कौशल की परंपरा बहुत पुरानी है। भगवान शिव का त्रिशूल, इंद्र का वज्र और भगवान श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र जैसे उदाहरणों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कारीगरों के कौशल और सृजनात्मक क्षमता को रेखांकित किया।
‘कारीगर के पास हुनर था, लेकिन बाजार दूर था’
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों के दौरान आर्थिक तंगी और गरीबी का हवाला देकर बड़ी संख्या में कारीगरों को आवश्यक सुविधाओं से दूर रखा गया। उनके अनुसार कारीगरों के पास हुनर तो था, लेकिन बाजार तक पहुंच, बैंकिंग व्यवस्था, डिजाइन और बदलती तकनीक से जुड़ने के अवसर सीमित रहे।
योगी ने कहा कि इसका असर यह हुआ कि जो व्यक्ति कभी अपने हुनर के दम पर उद्यम चलाता था, वह धीरे-धीरे मजदूरी करने को मजबूर हो गया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में सत्ता संभालने के बाद उनकी सरकार ने इस स्थिति को बदलने के लिए हस्तशिल्पियों और पारंपरिक कारीगरों को योजनाओं से जोड़ने पर काम किया।
कारीगरों के लिए 10 लाख रुपये तक ऋण की व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने बताया कि सीएम युवा उद्यमी योजना के तहत युवाओं को पांच लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त और गारंटीमुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। कारीगरों के लिए ऋण की सीमा 10 लाख रुपये तक किए जाने की बात भी उन्होंने कही।
उन्होंने बताया कि 25 से 29 सितंबर तक प्रदेश के विभिन्न जिलों में टूलकिट वितरण के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सरकार की योजनाओं का उद्देश्य कारीगरों को शुरुआती संसाधन उपलब्ध कराने के साथ उन्हें अपना काम बढ़ाने के लिए वित्तीय आधार देना है।
योगी ने इसी क्रम में कहा कि उत्तर प्रदेश कभी बीमारू नहीं था, बल्कि इसे संचालित करने वाले राजनेताओं की मानसिकता बीमारू थी। यह टिप्पणी उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों की नीतियों और उनके कार्यकाल में कारीगरों की स्थिति पर सवाल उठाते हुए की।
उत्तर प्रदेश ट्रेड शो में 2,500 से अधिक एग्जिबिटर्स
मुख्यमंत्री ने आगामी उत्तर प्रदेश ट्रेड शो का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर में आयोजित होने वाले ट्रेड शो में 2,500 से अधिक एग्जिबिटर्स और 650 से ज्यादा फॉरेन बायर्स के शामिल होने की उम्मीद है।
योगी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस ट्रेड शो में 12 हजार करोड़ से 15 हजार करोड़ रुपये तक का कारोबार हो सकता है। इसका मकसद उत्तर प्रदेश के उत्पादों को बड़े घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ना है।
मेले में कारीगरों के उत्पाद बने आकर्षण
लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में शुरू हुए विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेले में अलग-अलग जिलों से आए कारीगरों और उद्यमियों ने अपने उत्पादों के स्टॉल लगाए हैं। यहां हस्तशिल्प, पारंपरिक कला और स्थानीय उत्पादों को प्रदर्शित किया जा रहा है। मेले के माध्यम से कारीगरों को स्वरोजगार से जुड़ी सरकारी योजनाओं और बाजार के अवसरों की जानकारी भी दी जा रही है।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विभाग के मंत्री भूपेंद्र चौधरी, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार तथा MSME विभाग के प्रमुख सचिव शशि भूषण लाल सुशील समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
विश्वकर्मा जयंती के मौके पर आयोजित यह कार्यक्रम ऐसे समय में हुआ है जब सरकार पारंपरिक कारीगरी को स्वरोजगार, बाजार और आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर जोर दे रही है। मेले में प्रदर्शित उत्पादों के जरिए स्थानीय हुनर को सीधे बाजार से जोड़ने की कोशिश भी दिखाई देती है।









