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पश्चिमी यूपी हाई कोर्ट बेंच की मांग पर सीएम योगी से मिले अधिवक्ता, बोले- यह हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं

On: September 21, 2026
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पश्चिमी यूपी हाई कोर्ट बेंच की मांग पर सीएम योगी से मिले अधिवक्ता
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मेरठ, सोमवार, 21 सितंबर 2026। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाई कोर्ट बेंच की स्थापना की लंबे समय से चली आ रही मांग को लेकर सोमवार को मेरठ में अधिवक्ताओं और प्रशासन के बीच दिनभर हलचल रही। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के लिए केंद्रीय संघर्ष समिति के बैनर तले बड़ी संख्या में अधिवक्ता सक्रिय रहे। सुबह मुख्यमंत्री से मिलने का समय नहीं मिलने पर कचहरी परिसर में नारेबाजी और प्रदर्शन हुआ, वहीं अधिवक्ताओं को लेकर जा रही बस को पुलिस द्वारा रोके जाने पर भी स्थिति तनावपूर्ण हो गई। बाद में अधिकारियों के हस्तक्षेप से नौ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री से वार्ता हुई।

करीब साढ़े तीन बजे वेदव्यासपुरी स्थित आरएएफ अतिथिगृह में हुई इस मुलाकात में अधिवक्ताओं ने पश्चिमी यूपी में हाई कोर्ट की खंडपीठ स्थापित करने की मांग मुख्यमंत्री के सामने रखी। अधिवक्ता पदाधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने कहा कि हाई कोर्ट बेंच की स्थापना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आती और यह सुप्रीम कोर्ट से संबंधित विषय है।

पश्चिमी यूपी हाई कोर्ट बेंच की मांग पर क्या बोले अधिवक्ता?

केंद्रीय संघर्ष समिति के चेयरमैन अनुज शर्मा, संयोजक परवेज आलम, जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रविंद्र सिंह और महामंत्री प्रशांत गुप्ता ने मुख्यमंत्री को मांगपत्र सौंपा। अधिवक्ताओं ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों में करीब दो लाख वकील और लगभग सात करोड़ की आबादी है। उनके मुताबिक लंबित मुकदमों और क्षेत्रफल को देखते हुए इस क्षेत्र में हाई कोर्ट बेंच की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है।

अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री से कहा कि यह मांग करीब 50 वर्षों से उठाई जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार इसे अनुचित मानती है तो स्पष्ट रूप से इनकार कर दे।

प्रतिनिधिमंडल के पदाधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने बेंच की स्थापना को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए इसे अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया। हालांकि अधिवक्ताओं ने इसके बाद भी एक वैकल्पिक रास्ता सुझाया।

विधानसभा से प्रस्ताव भेजने की भी मांग

अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री से कहा कि जम्मू-कश्मीर की लद्दाख बेंच की तरह उत्तर प्रदेश विधानसभा से भी पश्चिमी यूपी में हाई कोर्ट बेंच की स्थापना का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट को भेजा जा सकता है।

प्रतिनिधिमंडल ने इस संबंध में नियमों की जानकारी मुख्यमंत्री को दी। पदाधिकारियों के मुताबिक, इस पर मुख्यमंत्री ने उनसे संबंधित नियम लिखकर देने को कहा और इसके बाद वहां से चले गए।

प्रतिनिधिमंडल में मेरठ बार के पूर्व अध्यक्ष गजेंद्र सिंह धामा, प्रबोध शर्मा, जबर सिंह, वीरेंद्र सिंह सिरोही और सतीश राजबल समेत अन्य अधिवक्ता शामिल रहे।

50 साल से चल रहा है हाई कोर्ट बेंच आंदोलन

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाई कोर्ट बेंच की मांग कोई नई नहीं है। अधिवक्ता करीब पांच दशक से इस मांग को लेकर अलग-अलग चरणों में आंदोलन करते रहे हैं। हाल के दिनों में भी इस मुद्दे को लेकर पश्चिमी यूपी के 22 जिलों में न्यायिक कार्य से विरत रहने और आंदोलन तेज करने के फैसले लिए गए हैं।

सितंबर में ही केंद्रीय संघर्ष समिति की ओर से पश्चिमी यूपी के सभी 22 जिलों में प्रत्येक बुधवार को कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया गया था। अधिवक्ताओं का कहना है कि विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र और प्रदेश सरकार से बेंच को लेकर ठोस निर्णय कराने के लिए आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।

सीएम के जवाब के बाद आंदोलन तेज करने की तैयारी

मुख्यमंत्री से वार्ता के बाद केंद्रीय संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बैठक कर आगे की रणनीति पर चर्चा की। समिति के अनुसार, मंगलवार को सहारनपुर में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के कार्यक्रम के दौरान काले झंडे दिखाकर विरोध दर्ज कराने का फैसला किया गया है। मेरठ में दोनों बार एसोसिएशनों की संयुक्त आमसभा भी बुलाई जाएगी।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब कुछ दिन पहले ही केंद्रीय विधि मंत्री से मुलाकात के बाद अधिवक्ताओं ने दावा किया था कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाई कोर्ट बेंच का मुद्दा सरकार के विचार में है और इस विषय पर नियमित स्तर पर चर्चा हो रही है।

जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में भी नहीं उठा बेंच का मुद्दा

अधिवक्ता पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री से हुई वार्ता के दौरान मेरठ के सांसद अरुण गोविल, राज्यसभा सदस्य लक्ष्मीकांत बाजपेयी, प्रभारी जिला मंत्री असीम अरुण, राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर और कैंट विधायक अमित अग्रवाल मौजूद थे। समिति के पदाधिकारियों का दावा है कि इस दौरान किसी जनप्रतिनिधि ने मुख्यमंत्री के सामने हाई कोर्ट बेंच की मांग नहीं उठाई।

इस पर अधिवक्ताओं में नाराजगी है। उनका कहना है कि पश्चिमी यूपी की इस पुरानी मांग को राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर गंभीरता से उठाने की जरूरत है।

फिलहाल मुख्यमंत्री से हुई वार्ता के बाद गेंद एक बार फिर केंद्र और न्यायिक स्तर की प्रक्रिया की ओर जाती दिखाई दे रही है। दूसरी ओर अधिवक्ताओं ने आंदोलन जारी रखने का संकेत दिया है। आने वाले दिनों में मेरठ और पश्चिमी यूपी के अन्य जिलों में इस मुद्दे को लेकर गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।

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