लखनऊ (शुक्रवार, 25 सितंबर 2026)। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने प्रदेश के चिकित्सकों से मरीजों के पर्चे पर दवाओं और मेडिकल जांचों के नाम हिंदी अथवा देवनागरी लिपि में लिखने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि मरीज को यह समझ में आना चाहिए कि उसे कौन-सी दवा दी जा रही है और कौन-सी जांच कराने की सलाह दी गई है।
ब्रजेश पाठक बोले- मरीज की समझ को मिले प्राथमिकता
उपमुख्यमंत्री ने चिकित्सकों से आग्रह किया कि मरीजों को दी जाने वाली पर्ची पर दवाओं और जांचों के नाम हिंदी या देवनागरी लिपि में भी लिखे जाएं। उनका कहना है कि इससे मरीज और उसके परिजन यह आसानी से समझ सकेंगे कि डॉक्टर ने कौन-सी दवा लिखी है और किस तरह की जांच कराने की सलाह दी गई है।
ब्रजेश पाठक ने यह भी कहा कि वह व्यक्तिगत स्तर पर हिंदी में नाम लिखी दवाओं को प्राथमिकता देंगे। उन्होंने हिंदी का इस्तेमाल करने वाले चिकित्सकों को सम्मानित करने की बात भी कही है।
भोजपुरी, अवधी और स्थानीय भाषाओं में मरीजों से करें संवाद
ब्रजेश पाठक ने केवल पर्चे की भाषा तक अपनी अपील सीमित नहीं रखी। उन्होंने डॉक्टरों से मरीजों के साथ उनकी मातृभाषा और स्थानीय बोलियों में बातचीत करने का आग्रह किया।
उन्होंने भोजपुरी और अवधी जैसी भाषाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि डॉक्टर मरीज की सहज भाषा में उसकी समस्या समझेंगे और उपचार से जुड़ी सलाह देंगे तो मरीज के लिए चिकित्सकीय निर्देशों को समझना आसान हो सकता है। इससे डॉक्टर और मरीज के बीच विश्वास भी मजबूत होने की उम्मीद है।
दरअसल, अस्पताल में पहुंचने वाला हर मरीज मेडिकल शब्दावली से परिचित नहीं होता। ऐसे में बीमारी, दवा, जांच और सावधानियों की जानकारी सरल भाषा में मिलना उसके लिए काफी महत्वपूर्ण हो जाता है।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती का किया उल्लेख
उपमुख्यमंत्री ने शुक्रवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती का उल्लेख करते हुए भारतीय भाषाओं, विशेषकर हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग को बढ़ावा देने की बात कही।
उन्होंने राष्ट्रनायकों और महापुरुषों के विचारों से प्रेरणा लेते हुए जनसामान्य से जुड़ी व्यवस्थाओं में देशज भाषाओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उनके संदेश का केंद्र यह रहा कि सरकारी और जनसेवा से जुड़े क्षेत्रों में संवाद ऐसी भाषा में हो, जिसे आम नागरिक आसानी से समझ सके।
प्रधानमंत्री मोदी के विदेशों में हिंदी संवाद का दिया उदाहरण
ब्रजेश पाठक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरों के दौरान हिंदी और भारतीय भाषाओं में संवाद का उदाहरण भी दिया। उन्होंने चिकित्सकों से चिकित्सा क्षेत्र में भारतीय भाषाओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा सेवा केवल दवा लिख देने तक सीमित नहीं है। मरीज को उसकी बीमारी, जांच और उपचार के बारे में समझाना भी डॉक्टर-मरीज संवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी वजह से उन्होंने स्थानीय और देशज भाषाओं के इस्तेमाल को चिकित्सा व्यवस्था में अधिक स्थान देने की अपील की।
‘चले देश में देशज भाषा’ का दिया संदेश
ब्रजेश पाठक ने ‘राष्ट्रनायकों की अभिलाषा, चले देश में देशज भाषा’ के भाव के साथ चिकित्सकों से इस पहल को जनसेवा का हिस्सा बनाने का आग्रह किया है। उनका जोर इस बात पर है कि मरीज को इलाज की जानकारी ऐसी भाषा में मिले, जिसे वह बिना किसी झिझक और भ्रम के समझ सके।
दवाओं और जांचों के नाम हिंदी या देवनागरी में लिखने तथा मरीजों से उनकी स्थानीय भाषा में संवाद करने की यह अपील अब चिकित्सा क्षेत्र में भाषा को लेकर नई चर्चा का विषय बनी है।









