नई दिल्ली/28 सितंबर 2026। देशभर में लंबित ट्रैफिक चालानों की वसूली को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अहम सुझाव दिया। अदालत ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा कि वे बकाया ट्रैफिक चालान की रकम वसूलने के लिए व्यावहारिक उपाय तलाशें। इसी दौरान जस्टिस जेबी पारदीवाला ने सुझाव दिया कि बकाया चालान को बिजली बिल जैसे अन्य सरकारी बकाये से जोड़कर वसूली का तरीका भी तलाशा जा सकता है।
हालांकि, इसे अभी देशभर में लागू होने वाला नया नियम नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने बिजली बिल में चालान जोड़ने का कोई अनिवार्य आदेश नहीं दिया है, बल्कि अधिकारियों को बकाया रकम की वसूली के लिए ऐसे विकल्पों पर विचार करने को कहा है।
ट्रैफिक चालान की वसूली पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि केवल ई-चालान जारी कर देना पर्याप्त नहीं है। असली चुनौती जुर्माने की रकम की वसूली है। अदालत के सामने बताया गया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में करीब 45,000 करोड़ रुपये के ई-चालान वसूली के लिए लंबित हैं। इनमें से करीब 25,000 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है।
जस्टिस जेबी पारदीवाला ने अधिकारियों को जमीनी स्तर पर ऐसे तरीके तलाशने की जरूरत बताई, जिनसे लंबित जुर्माने की राशि वास्तव में वसूल हो सके। अदालत ने यह भी कहा कि पुलिस हजारों या लाखों ई-चालान जारी कर सकती है, लेकिन अगर जुर्माने की रकम वसूल नहीं होती तो केवल चालान की संख्या बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
क्या बिजली बिल में जुड़ जाएगा आपका ट्रैफिक चालान?
फिलहाल ऐसा कोई देशव्यापी नियम लागू नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को सुझाव के रूप में देखा जाना चाहिए। अदालत ने अधिकारियों को यह सोचने के लिए कहा कि बिजली बिल जैसी सरकारी देनदारियों के साथ बकाया ट्रैफिक चालान को जोड़कर वसूली की कोई प्रभावी व्यवस्था बनाई जा सकती है या नहीं।
इसलिए वाहन मालिकों के लिए यह समझना जरूरी है कि सोमवार की सुनवाई के बाद तुरंत बिजली के बिल में चालान जुड़ना शुरू नहीं हो गया है। इसके लिए संबंधित सरकारों और विभागों को अलग से नियम या व्यवस्था बनानी होगी।
बकाया चालान पर गाड़ी से जुड़ी सेवाएं रोकने का सुझाव
सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ बिजली बिल का विकल्प ही नहीं सुझाया। अदालत ने बकाया चालान वाले वाहनों के संबंध में कई तरह की प्रशासनिक पाबंदियों पर विचार करने को कहा है।
इनमें शामिल हैं:
- वाहन के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) के नवीनीकरण पर रोक लगाने पर विचार।
- बकाया चालान वाले वाहन के लिए डुप्लीकेट RC जारी करने पर रोक।
- ऐसे वाहन के स्वामित्व हस्तांतरण को रोकने की संभावना।
- चालान का भुगतान होने तक फिटनेस सर्टिफिकेट जारी नहीं करने पर विचार।
- परिवहन पोर्टल पर बकाया चालान वाले वाहनों को ब्लैकलिस्ट करने की संभावना।
- लंबित चालान से जुड़े ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण को रोकने पर विचार।
इनमें से सभी उपाय तत्काल लागू हो गए हैं, ऐसा नहीं है। ये वे विकल्प हैं जिन पर अदालत ने बकाया जुर्माने की प्रभावी वसूली के संदर्भ में विचार करने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट किस मामले में कर रहा है सुनवाई?
यह मामला S Rajaseekaran v. Union of India & Ors. से संबंधित है और सुनवाई जस्टिस जेबी पारदीवाला तथा जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने की। मामला इलेक्ट्रॉनिक तरीके से ट्रैफिक नियमों के प्रवर्तन और लंबित ई-चालानों की वसूली से जुड़ा है।
अदालत का फोकस इस बात पर है कि डिजिटल व्यवस्था के जरिए बड़ी संख्या में चालान जारी होने के बावजूद बकाया जुर्माने की वसूली किस तरह प्रभावी बनाई जाए।
वाहन मालिकों के लिए क्या मतलब?
अगर किसी वाहन पर ट्रैफिक चालान लंबित है तो फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उसे नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर लंबित जुर्मानों की वसूली के लिए ज्यादा प्रभावी व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया है।
भविष्य में यदि राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से वाहन सेवाओं को बकाया चालानों से जोड़ने के लिए नियम बनाए जाते हैं, तो RC नवीनीकरण, फिटनेस सर्टिफिकेट, स्वामित्व हस्तांतरण या ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित सेवाओं पर इसका असर पड़ सकता है।
लेकिन बिजली बिल से ट्रैफिक चालान की वसूली अभी केवल सुप्रीम कोर्ट के सुझाव के स्तर पर है, इसे लागू नियम बताना फिलहाल सही नहीं होगा।
45 हजार करोड़ के बकाये ने बढ़ाई चिंता
ई-चालान व्यवस्था ने ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को डिजिटल तरीके से दर्ज करना आसान बनाया है, लेकिन अदालत के सामने रखे गए आंकड़े बताते हैं कि जुर्माने की वसूली अब बड़ी चुनौती बन चुकी है। करीब 45,000 करोड़ रुपये के बकाये में से लगभग 25,000 करोड़ रुपये की वसूली होने के बाद भी बड़ी राशि लंबित है।
यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को केवल चालान काटने के बजाय वसूली की पूरी प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर ध्यान देने को कहा है।











