नई दिल्ली/28 सितंबर 2026। आतंकवाद के खिलाफ देश की रणनीति को अगले दशक के लिए और मजबूत करने की तैयारी है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को नई दिल्ली में ‘प्रहार-सीटी (आतंकवाद-रोधी) नीति और रणनीति’ पर आयोजित सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने आतंकवादी घटनाओं का लगातार विश्लेषण कर अगले 10 वर्षों के लिए एक मजबूत और ठोस ‘प्रहार’ तंत्र विकसित करने पर जोर दिया।
गृह मंत्री ने कहा कि ‘प्रहार’ की पहुंच नीति और दस्तावेजों तक सीमित न रहे, बल्कि इसे थाना स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। इसके लिए केंद्रीय एजेंसियों और राज्यों की पुलिस के बीच लगातार समन्वय जरूरी है। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ हर स्तर पर त्वरित और परिणामोन्मुखी कार्रवाई की जरूरत बताई।
‘प्रहार’ के सात स्तंभों पर हुई चर्चा
सम्मेलन में भारत की आतंकवाद-रोधी रणनीति के सात प्रमुख स्तंभों पर चर्चा हुई। इनमें रोकथाम, प्रतिक्रिया, आंतरिक क्षमताओं को एकजुट करना, मानवाधिकार और कानून के शासन पर आधारित प्रक्रिया, आतंकवाद के लिए अनुकूल परिस्थितियों को कम करना, अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में तालमेल तथा पूरे समाज के दृष्टिकोण के साथ रिकवरी और लचीलापन शामिल हैं।
गृह मंत्रालय के अनुसार ‘प्रहार’ भारत की व्यापक राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी नीति और रणनीति है, जिसे 23 फरवरी 2026 को पेश किया गया था। इसका उद्देश्य आतंकवादी गतिविधियों और कट्टरपंथ से निपटने के लिए केंद्र, राज्य और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच समन्वित व्यवस्था तैयार करना है।
थाना स्तर तक पहुंचेगी ‘प्रहार’ रणनीति
अमित शाह ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ रणनीति का असर तभी दिखाई देगा, जब उसकी कार्यप्रणाली जमीनी स्तर तक पहुंचे। उन्होंने ‘प्रहार’ के प्रत्येक बिंदु पर सक्रिय और परिणाम आधारित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने आतंकवादी खतरों को कम करने के लिए उठाए जा रहे कदमों का जिक्र करते हुए हर स्तर पर स्वचालित आतंकवाद-रोधी प्रतिक्रिया प्रणाली को संस्थागत बनाने पर जोर दिया। उनका कहना था कि किसी भी कार्रवाई में अनावश्यक देरी न हो और संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बना रहे।
2019 से 2026 के बीच 36 देशों से 288 भगोड़े वापस
सम्मेलन में विदेशों में छिपे भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाने की कार्रवाई का भी जिक्र हुआ। अमित शाह के मुताबिक, 2019 से 2026 के बीच 36 देशों से 288 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया गया है।
यह आंकड़ा केवल प्रत्यर्पण तक सीमित नहीं है। विदेश में मौजूद आरोपियों और अपराधियों को भारतीय कानून के दायरे में लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, केंद्रीय एजेंसियों और राज्य पुलिस के बीच समन्वय को महत्वपूर्ण बताया गया है।
इससे पहले गृह मंत्रालय ने भी बताया था कि 2019 से 2026 के बीच 36 देशों से बड़ी संख्या में भगोड़ों को भारत लाया गया है और भगोड़ों के खिलाफ कार्रवाई में इंटरपोल सहयोग, BHARATPOL तथा नए आपराधिक कानूनों के प्रावधानों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
शहजाद भट्टी नेटवर्क के 40 से ज्यादा मॉड्यूल का भंडाफोड़
गृह मंत्री ने एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के परिणामस्वरूप शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ की गई कार्रवाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि सीमा पार हथियार, विस्फोटक और मादक पदार्थों की तस्करी में कथित रूप से शामिल इस नेटवर्क के 40 से अधिक मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया गया।
इसके अलावा 15 राज्यों में 100 से अधिक एफआईआर दर्ज की गईं और 350 लोगों को गिरफ्तार किया गया। गृह मंत्रालय ने 16 सितंबर 2026 को शहजाद भट्टी नेटवर्क को यूएपीए के तहत आतंकवादी संगठन घोषित किए जाने की जानकारी भी दी थी।
मंत्रालय के अनुसार नेटवर्क पर हथियार, विस्फोटक और मादक पदार्थों की सीमा पार तस्करी तथा युवाओं और छोटे अपराधियों को आतंकवाद की ओर धकेलने जैसे आरोप हैं।
अमित शाह ने लॉन्च किया नया प्रत्यर्पण पोर्टल
सम्मेलन के दौरान अमित शाह ने एक नया प्रत्यर्पण पोर्टल भी लॉन्च किया। इसका उद्देश्य विदेशों में मौजूद भगोड़ों को भारत वापस लाने की प्रक्रिया में विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाना और कार्रवाई में तेजी लाना है।
गृह मंत्री ने राज्य पुलिस बलों से कहा कि वे केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर काम करने के लिए विशेष टीमें गठित करें। इन टीमों का उद्देश्य विदेशों में मौजूद भगोड़ों से जुड़े मामलों पर कार्रवाई को आगे बढ़ाना और उन्हें भारतीय कानून के दायरे में लाने के प्रयासों में केंद्रीय एजेंसियों का सहयोग करना होगा।
‘प्रहार’ को अगले 10 साल के लिए मजबूत करने पर जोर
‘प्रहार’ का उद्देश्य केवल किसी आतंकी घटना के बाद प्रतिक्रिया देना नहीं है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, इसकी रूपरेखा में खुफिया जानकारी के आधार पर पहले से खतरे की पहचान, विभिन्न एजेंसियों के बीच सूचना साझा करना, महत्वपूर्ण ढांचे की सुरक्षा, आतंकवाद के वित्तपोषण पर कार्रवाई और कट्टरपंथ रोकने जैसे पहलू भी शामिल हैं।
यही वजह है कि अमित शाह ने आतंकवादी घटनाओं के विश्लेषण के आधार पर अगले 10 वर्षों के लिए ठोस ‘प्रहार’ तंत्र तैयार करने की जरूरत बताई। उनके मुताबिक रणनीति को समय के साथ बदलते आतंकी तौर-तरीकों के अनुरूप लगातार मजबूत करना होगा।
सम्मेलन में राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों की भागीदारी
नई दिल्ली में हुए सम्मेलन में केंद्रीय गृह सचिव, विदेश सचिव, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और केंद्रीय पुलिस संगठनों के प्रमुखों के अलावा 15 राज्यों के पुलिस महानिदेशक तथा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के आतंकवाद-रोधी दस्तों के प्रमुख शामिल हुए। अन्य राज्यों के पुलिस महानिदेशक और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।
सम्मेलन का व्यापक उद्देश्य आतंकवाद से निपटने में केंद्र और राज्यों की क्षमताओं को एक मंच पर लाना तथा बदलते सुरक्षा खतरों के बीच समन्वित कार्रवाई की व्यवस्था को मजबूत करना रहा।
आतंकवाद के खिलाफ समन्वित कार्रवाई पर जोर
‘प्रहार’ के सात स्तंभों से लेकर थाना स्तर पर इसकी पहुंच और विदेशों में छिपे भगोड़ों के खिलाफ कार्रवाई तक, सम्मेलन में आतंकवाद-रोधी व्यवस्था को ज्यादा समन्वित बनाने पर जोर दिखाई दिया। केंद्र सरकार पहले ही ‘प्रहार’ को भारत की व्यापक राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी नीति और रणनीति के रूप में पेश कर चुकी है।
अब राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच तालमेल को जमीनी स्तर पर किस तरह और प्रभावी बनाया जाता है, इस पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।











