लखनऊ/मंगलवार, 29 सितंबर 2026: उत्तर प्रदेश की मंडी व्यवस्था अब डिजिटल स्तर पर एक और बड़े नेटवर्क से जुड़ गई है। प्रदेश की सभी 251 कृषि उपज मंडियां राष्ट्रीय कृषि बाजार सूचना नेटवर्क एगमार्कनेट 2.0 से कनेक्ट हो गई हैं। उत्तर प्रदेश मंडी परिषद के ई-मंडी पोर्टल का एगमार्कनेट 2.0 से एपीआई आधारित एकीकरण पूरा होने के बाद सभी मंडियों से 100 प्रतिशत मार्केट रिपोर्टिंग सुनिश्चित होने की बात कही गई है।
इस व्यवस्था का सीधा संबंध किसानों तक बाजार की जानकारी पहुंचाने से है। अब उत्तर प्रदेश की मंडियों में दर्ज कृषि जिंसों के भाव और आवक से संबंधित आंकड़े राष्ट्रीय कृषि बाजार सूचना नेटवर्क पर उपलब्ध हो सकेंगे। इससे किसान अलग-अलग मंडियों में अपनी उपज की बाजार स्थिति को समझने में मदद ले सकेंगे।
यूपी की 251 मंडियां एगमार्कनेट 2.0 से जुड़ीं
उत्तर प्रदेश मंडी परिषद के ई-मंडी पोर्टल और एगमार्कनेट 2.0 के बीच एपीआई आधारित तकनीकी एकीकरण पूरा किया गया है। इसके साथ ही प्रदेश की सभी 251 मंडियों से मार्केट रिपोर्टिंग को राष्ट्रीय नेटवर्क से जोड़ दिया गया है।
केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से भी इस एकीकरण की सराहना की गई है। मंत्रालय के संयुक्त सचिव चिन्मय गोटमारे ने 251 मंडियों के सफल एपीआई एकीकरण और शत-प्रतिशत मार्केट रिपोर्टिंग की सराहना की है।
यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब कृषि बाजार में सही और समय पर उपलब्ध जानकारी किसानों के लिए काफी मायने रखती है। फसल बेचने से पहले आसपास या दूसरे बाजारों में चल रहे भाव की जानकारी होने से किसान अपने विपणन से जुड़े फैसले ज्यादा जानकारी के साथ ले सकते हैं।
किसान जान सकेंगे किस मंडी में क्या भाव
नई व्यवस्था का सबसे अहम पहलू बाजार भाव और आवक की जानकारी है। किसान यह पता लगा सकेंगे कि अलग-अलग मंडियों में उनकी कृषि उपज के क्या भाव चल रहे हैं और संबंधित बाजार में कितनी आवक हो रही है।
मसलन, यदि किसी किसान को अपनी फसल बेचनी है तो वह केवल स्थानीय मंडी की स्थिति पर निर्भर रहने के बजाय अन्य मंडियों के भाव और बाजार की गतिविधि को भी देख सकेगा। हालांकि वास्तविक बिक्री मूल्य फसल की गुणवत्ता, ग्रेड, स्थानीय मांग और अन्य बाजार परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
भाव और आवक के आंकड़ों की व्यापक उपलब्धता से व्यापारियों को भी अलग-अलग बाजारों की स्थिति समझने में सुविधा होगी। साथ ही कृषि बाजार के रुझानों का विश्लेषण करने और नीतिगत निर्णयों के लिए भी अधिक व्यवस्थित आंकड़े उपलब्ध होंगे।
भाव और आवक की सूचना का होगा डिजिटल प्रवाह
उत्तर प्रदेश मंडी परिषद के निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा है कि प्रदेश की मंडी व्यवस्था को तकनीक के माध्यम से अधिक पारदर्शी और किसानोपयोगी बनाने पर काम किया जा रहा है।
उनके अनुसार, तकनीक का वास्तविक लाभ तभी है जब सही बाजार सूचना सही समय पर किसानों तक पहुंचे। सभी 251 मंडियों को एगमार्कनेट 2.0 से जोड़ने के बाद भाव और आवक से संबंधित सूचनाओं के प्रवाह को राष्ट्रीय डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा गया है।
इससे किसानों को बाजार की स्थिति समझने और अपनी उपज के विपणन से जुड़े निर्णय लेने में मदद मिलने की उम्मीद है।
100 प्रतिशत मार्केट रिपोर्टिंग क्यों महत्वपूर्ण?
251 मंडियों के नेटवर्क से शत-प्रतिशत मार्केट रिपोर्टिंग सुनिश्चित होना इस व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इतने बड़े मंडी नेटवर्क से नियमित रूप से बाजार संबंधी आंकड़े मिलना किसानों और कृषि बाजार से जुड़े अन्य लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है।
एपीआई आधारित एकीकरण से अलग-अलग प्रणालियों के बीच डेटा का डिजिटल आदान-प्रदान संभव होता है। इससे बाजार की जानकारी को राष्ट्रीय स्तर के प्लेटफॉर्म तक पहुंचाने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित बनती है।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव चिन्मय गोटमारे ने इस उपलब्धि को मंडी परिषद, मंडी समितियों, अधिकारियों, तकनीकी टीम और फील्ड स्तर के कर्मचारियों के समन्वित प्रयास का परिणाम बताया है।
क्या है एगमार्कनेट 2.0?
एगमार्कनेट (Agricultural Marketing Information Network) कृषि बाजारों से संबंधित सूचना उपलब्ध कराने वाला राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इसमें विभिन्न कृषि जिंसों की मंडी आवक और बाजार भाव से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।
उत्तर प्रदेश के ई-मंडी पोर्टल को एगमार्कनेट 2.0 से एपीआई के माध्यम से जोड़ने के बाद प्रदेश की मंडियों से संबंधित बाजार सूचना राष्ट्रीय नेटवर्क तक डिजिटल तरीके से पहुंच रही है।
नई व्यवस्था में किसानों के लिए सबसे अहम बात यही है कि मंडी भाव की जानकारी तक पहुंच आसान हो सकती है। इससे किसान अपनी उपज बेचने से पहले बाजार की स्थिति का तुलनात्मक आकलन कर सकेंगे।
किसानों और व्यापारियों दोनों को मिलेगी बाजार जानकारी
एगमार्कनेट 2.0 से जुड़ाव का लाभ सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रहेगा। व्यापारी भी अलग-अलग मंडियों में उपलब्ध कृषि जिंसों की आवक और कीमतों की स्थिति को समझ सकेंगे।
वहीं, बाजार से जुड़े आंकड़ों का बड़ा डेटाबेस कृषि क्षेत्र में रुझानों को समझने में भी उपयोगी हो सकता है। भविष्य में यही आंकड़े कृषि विपणन से जुड़ी योजनाओं और नीतियों के लिए भी आधार प्रदान कर सकते हैं।
यानी यूपी की सभी 251 मंडियों का राष्ट्रीय कृषि बाजार सूचना नेटवर्क से जुड़ना केवल एक तकनीकी बदलाव नहीं है। इसका बड़ा उद्देश्य मंडी से जुड़ी सूचनाओं को डिजिटल तरीके से अधिक व्यवस्थित करना और किसानों को बाजार की जानकारी तक बेहतर पहुंच देना है।










