लखनऊ/26 अक्टूबर 2026: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से जुड़ी अनियमितताओं को लेकर निर्वाचन विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। पीलीभीत में मतदाता सूची में गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने प्रदेशभर में मतदाता सूची तैयार करने और आवेदनों की फीडिंग प्रक्रिया की जांच के निर्देश दिए हैं। इसके तहत 10 अप्रैल के बाद कंप्यूटर सहायकों द्वारा फीड किए गए फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 की अनिवार्य रूप से जांच कराई जाएगी।
निर्देशों के मुताबिक, मतदाता सूची में गड़बड़ी मिलने पर केवल निचले स्तर के कर्मचारियों की ही नहीं, बल्कि संबंधित निर्वाचन अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है। मंडलायुक्तों को अपने-अपने मंडलों में निगरानी बढ़ाने के लिए कहा गया है। साथ ही, भौतिक रूप से प्राप्त आवेदनों की फीडिंग कंप्यूटर सहायकों से कराने पर रोक लगाते हुए इन्हें बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) के माध्यम से डिजिटाइज करने के निर्देश दिए गए हैं।
यूपी मतदाता सूची: 10 अप्रैल के बाद फीड हुए सभी फॉर्म की जांच
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने मंडलायुक्तों, जिला निर्वाचन अधिकारियों, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO), सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (AERO) और कंप्यूटर सहायकों के साथ वर्चुअल बैठक में ये निर्देश दिए।
बैठक में विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) की तैयारियों की समीक्षा की गई। अधिकारियों को स्पष्ट किया गया कि मतदाता सूची में अनियमितताओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवेदनों की जांच और उनकी फीडिंग पर विशेष ध्यान देना होगा।
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान की समाप्ति यानी 10 अप्रैल से अब तक कंप्यूटर सहायकों द्वारा फीड किए गए फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 की जांच कराई जाएगी। इस प्रक्रिया का उद्देश्य आवेदनों में संभावित गलतियों और अनियमितताओं की पहचान करना है।
फॉर्म-6, 7 और 8 का क्या है इस्तेमाल?
मतदाता सूची में अलग-अलग तरह के बदलाव के लिए इन तीनों फॉर्म का इस्तेमाल किया जाता है।
- फॉर्म-6: मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन।
- फॉर्म-7: मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराने या नाम हटाने के लिए आवेदन।
- फॉर्म-8: मतदाता सूची में दर्ज विवरण में सुधार, निवास स्थान बदलने या निर्धारित अन्य संशोधनों के लिए आवेदन।
इन आवेदनों की सही तरीके से जांच और रिकॉर्ड में सटीक जानकारी दर्ज होना जरूरी है। किसी आवेदन की फीडिंग में गलती होने से पात्र मतदाता का नाम छूटने, गलत विवरण दर्ज होने या एक से अधिक स्थानों पर नाम होने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
BLO ऐप से ही डिजिटाइज होंगे भौतिक आवेदन
निर्वाचन विभाग ने भौतिक रूप से प्राप्त आवेदनों की फीडिंग कंप्यूटर सहायकों से कराने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। अब ऐसे आवेदन बूथ लेवल अधिकारी यानी BLO द्वारा BLO ऐप के माध्यम से डिजिटाइज किए जाएंगे।
इस व्यवस्था में मंडलायुक्तों को रोल प्रेक्षक के रूप में अपने मंडल के सभी जिलों में मतदाता सूची से जुड़े कार्यों की सघन निगरानी करनी होगी। जांच के दौरान लापरवाही या अनियमितता मिलने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने निर्देश दिया है कि आवेदन दर्ज करने से लेकर उनके निस्तारण तक पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार होनी चाहिए, ताकि मतदाता सूची की विश्वसनीयता बनी रहे।
चार जिलों में डुप्लीकेट वोटर के मामलों पर जवाब तलब
मतदाता सूची में एक ही व्यक्ति का नाम दो या अधिक स्थानों पर दर्ज होने की शिकायतों को लेकर भी निर्वाचन विभाग ने सख्ती दिखाई है। सोशल मीडिया पर प्रसारित शिकायतों के संबंध में समय पर रिपोर्ट नहीं भेजने पर बुलंदशहर, सीतापुर, गाजियाबाद और अलीगढ़ के जिला निर्वाचन अधिकारियों से जवाब मांगा गया है।
इन अधिकारियों को जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण की प्रारूप मतदाता सूची में एक ही व्यक्ति का नाम दो स्थानों पर दर्ज होने की समस्या रोकने के लिए समय रहते आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।
मतदाता शिकायतों के निस्तारण में देरी पर कार्रवाई की चेतावनी
निर्वाचन विभाग ने 10 अप्रैल से अब तक नेशनल ग्रीवेंस सर्विस पोर्टल (NGSP), जनसुनवाई पोर्टल (IGRS/PGRS), सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से प्राप्त शिकायतों की भी समीक्षा की।
निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को सभी लंबित शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 के लंबित आवेदनों की प्रतिदिन समीक्षा करने और नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा गया है। भौतिक रूप से प्राप्त सभी आवेदनों को सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
निर्वाचन विभाग ने ECI-Net ऐप और मतदाता सेवा पोर्टल पर उपलब्ध ‘Book a Call with BLO’ सुविधा को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं। इसके तहत मतदाताओं की कोई भी कॉल रिक्वेस्ट 48 घंटे से अधिक समय तक लंबित नहीं रहनी चाहिए। शिकायत मिलने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
लॉगिन आईडी और पासवर्ड साझा करने पर भी सख्ती
मतदाता सूची से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड की सुरक्षा के लिए अधिकारियों को ERO-Net की लॉगिन आईडी और पासवर्ड किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, पासवर्ड तत्काल बदलने और डिजिटल प्रणालियों का सुरक्षित इस्तेमाल सुनिश्चित करने को कहा गया है।
ECI-Net पर जिला निर्वाचन अधिकारियों, ERO और AERO को उपलब्ध डैशबोर्ड तथा संबंधित प्रक्रियाओं की जानकारी देने के लिए प्रशिक्षण भी दिया गया। इसके अलावा, BSNL नेटवर्क बाधित होने की स्थिति में काम प्रभावित न हो, इसके लिए अधिकारियों को CUG नंबर के स्थान पर अपने निजी मोबाइल नंबर पोर्टल पर अपडेट कराने के निर्देश दिए गए हैं।
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 32 के तहत कार्रवाई
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने चेतावनी दी है कि फॉर्म की फीडिंग में अनियमितता मिलने पर संबंधित ERO, AERO और कंप्यूटर सहायक की जिम्मेदारी तय की जा सकती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ऐसे मामलों में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत कार्रवाई की बात कही गई है, जिसमें दोष सिद्ध होने पर दो वर्ष तक के कारावास का प्रावधान बताया गया है।
हालांकि, इस धारा के तहत कार्रवाई का निर्धारण मामले के तथ्यों, संबंधित व्यक्ति की भूमिका और कानून की लागू शर्तों के आधार पर होगा। किसी कर्मचारी या अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई स्वतः नहीं मानी जा सकती।
मतदाताओं के लिए क्या है जरूरी?
मतदाता सूची में अपना नाम, पता और अन्य विवरण सही होने की जांच करना नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है। यदि किसी जानकारी में गलती हो या नाम से संबंधित समस्या सामने आए, तो मतदाता निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संबंधित फॉर्म भरकर सुधार या आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।
निर्वाचन विभाग के इन निर्देशों का उद्देश्य आवेदन प्रक्रिया की निगरानी मजबूत करना, शिकायतों का समय पर निस्तारण करना और मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है। आने वाले विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण के दौरान इन व्यवस्थाओं का प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि जांच, निगरानी और शिकायत निस्तारण कितनी प्रभावी तरीके से लागू होते हैं।











