लखनऊ/27 अक्टूबर 2026: उत्तर प्रदेश में जनशिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है। पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण ने नौ जिलों के 10 थानेदारों को निलंबित करने के निर्देश दिए हैं। संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी। मंगलवार को हुई समीक्षा बैठक में डीजीपी ने स्पष्ट किया कि फरियादियों की शिकायतों को नजरअंदाज करना, उन्हें बार-बार थाने के चक्कर लगवाना या उनके साथ अभद्र व्यवहार करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह कार्रवाई उन जिलों की समीक्षा के बाद की गई, जहां अगस्त की तुलना में सितंबर में जनशिकायतों की संख्या में काफी वृद्धि दर्ज की गई। डीजीपी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शिकायतों को केवल दर्ज कर औपचारिकता पूरी न समझें, बल्कि उनका समयबद्ध और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करें।
UP में जनशिकायतों पर कार्रवाई: इन 9 जिलों के 10 थानेदारों पर गिरी गाज
जनशिकायतों के निस्तारण में लापरवाही के मामले में लखीमपुर खीरी, उन्नाव, एटा, आगरा, प्रतापगढ़, बदायूं, बिजनौर, मथुरा और लखनऊ के पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है।
कार्रवाई की जद में आए थानों की सूची इस प्रकार है:
- लखीमपुर खीरी: मैलानी और फरधान थाना
- उन्नाव: सोहरामऊ थाना
- एटा: जसरथपुर थाना
- आगरा: लोहामंडी थाना
- प्रतापगढ़: महेशगंज थाना
- बदायूं: उसावा थाना
- बिजनौर: चांदपुर थाना
- मथुरा: जैत थाना
- लखनऊ: बाबू बनारसी दास (BBD) थाना
इन थानों के प्रभारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। डीजीपी ने संबंधित अधिकारियों को निलंबन के साथ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
फरियादियों से अभद्रता और शिकायतों में टालमटोल पर सख्ती
समीक्षा बैठक में डीजीपी राजीव कृष्ण ने पुलिस अधिकारियों को साफ संदेश दिया कि थाने पहुंचने वाले फरियादियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए। किसी शिकायत को दर्ज करने से इनकार करना, अनावश्यक देरी करना या पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाना गंभीर लापरवाही माना जाएगा।
उन्होंने निर्देश दिया कि आईजीआरएस, जनसुनवाई, मुख्यमंत्री संदर्भ और पीजी पोर्टल सहित विभिन्न माध्यमों से मिलने वाली शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए। प्रत्येक शिकायत के निस्तारण की समयसीमा तय होनी चाहिए। यदि किसी मामले का समाधान तय समय में नहीं हो पाता है, तो देरी का कारण भी दर्ज किया जाए।
शिकायतकर्ता को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि उसकी शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई है और मामला किस स्थिति में है। इसका उद्देश्य शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाना है।
भूमि विवादों की निगरानी करेंगे पुलिस और राजस्व अधिकारी
डीजीपी ने भूमि विवादों से जुड़ी शिकायतों को लेकर भी विशेष निर्देश दिए हैं। प्रत्येक थाने में 10 प्रमुख भूमि विवादों को चिह्नित कर उनके निस्तारण की नियमित निगरानी की जाएगी।
संबंधित सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) या क्षेत्राधिकारी (CO) राजस्व अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करेंगे। दोनों विभागों के बीच बेहतर तालमेल के जरिए विवादों के समाधान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
भूमि विवाद अक्सर स्थानीय स्तर पर लंबे समय तक बने रहते हैं और कई बार कानून-व्यवस्था की समस्या भी पैदा कर सकते हैं। ऐसे मामलों को प्राथमिकता के आधार पर चिह्नित करने से उनकी स्थिति पर नजर रखने और समय पर कार्रवाई करने में मदद मिल सकती है।
हर जिले में बनेगी केंद्रीय निगरानी डेस्क
जनशिकायतों के निस्तारण की व्यवस्था को मजबूत करने के लिए डीजीपी ने प्रत्येक वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) और पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय में केंद्रीय निगरानी डेस्क स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। यह डेस्क थानों और चौकियों पर लंबित शिकायतों की रोजाना समीक्षा करेगी।
इसके तहत शिकायतों के लंबित रहने के कारणों और उनसे जुड़े जिम्मेदार पुलिसकर्मियों की जानकारी जुटाई जाएगी। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किन मामलों में देरी हो रही है और कहां अधिकारियों को हस्तक्षेप करने की जरूरत है।
डीजीपी ने निर्देश दिया कि जनपदीय पुलिस प्रभारी तीन दिन के भीतर अनुपालन आख्या तैयार कर रेंज और जोन के माध्यम से पुलिस मुख्यालय भेजें। निगरानी व्यवस्था में बीट रिपोर्ट में दर्ज भूमि विवादों को भी शामिल किया जाएगा।
पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही पर जोर
इस पूरी कार्रवाई का केंद्र जनशिकायतों का समयबद्ध निस्तारण और पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय करना है। थाने पर शिकायत लेकर पहुंचने वाले व्यक्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह होता है कि उसकी बात सुनी जाए और मामले में उचित कार्रवाई हो।
निलंबन की कार्रवाई के साथ केंद्रीय निगरानी डेस्क और नियमित समीक्षा की व्यवस्था लागू करने के निर्देशों से स्पष्ट है कि पुलिस मुख्यालय शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया पर अधिक व्यवस्थित निगरानी चाहता है। अब इन निर्देशों का प्रभाव इस बात से आंका जाएगा कि लंबित शिकायतों में कितनी कमी आती है और आम लोगों को समय पर राहत मिलती है या नहीं।









