प्रयागराज, 29 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश पीसीएस-2025 भर्ती के अंतिम परिणाम का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को फिलहाल और प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भर्ती के अंतिम परिणाम जारी करने पर लगी रोक बरकरार रखते हुए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) से आरक्षित और अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के अंकों तथा उनके समायोजन से संबंधित श्रेणीवार आंकड़े मांगे हैं। अदालत ने आयोग से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि निर्धारित मेरिट हासिल करने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को अनारक्षित श्रेणी में समायोजित किया गया या उनकी मूल आरक्षित श्रेणी में ही रखा गया।
न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की एकलपीठ ने संजय कुमार एवं तीन अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और आयोग को 16 नवंबर तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर 2026 को दोपहर 12 बजे निर्धारित की गई है। ऐसे में साक्षात्कार पूरा होने के बावजूद अभ्यर्थियों को अंतिम परिणाम के लिए अदालत की अगली सुनवाई तक इंतजार करना होगा।
UPPSC PCS-2025 Result पर रोक क्यों बरकरार है?
पीसीएस-2025 भर्ती में विवाद आरक्षण नीति और मेरिट के आधार पर अभ्यर्थियों के समायोजन से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने आयोग की चयन प्रक्रिया और संबंधित प्रावधानों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि आरक्षित वर्ग का कोई अभ्यर्थी बिना किसी छूट का लाभ लिए खुली प्रतियोगिता में अनारक्षित श्रेणी की मेरिट हासिल करता है, तो उसे अनारक्षित सीट पर चयन से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
इसी विवाद की स्पष्टता के लिए हाईकोर्ट ने आयोग से प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के आंकड़े उपलब्ध कराने को कहा है। अदालत यह जानना चाहती है कि विभिन्न श्रेणियों के अभ्यर्थियों के अंक क्या रहे और चयन प्रक्रिया में उनका समायोजन किस आधार पर किया गया।
अंतिम परिणाम पर रोक जारी रहने का मतलब है कि आयोग फिलहाल इस भर्ती का अंतिम चयन परिणाम घोषित नहीं कर सकेगा।
हाईकोर्ट ने UPPSC से क्या-क्या जानकारी मांगी?
अदालत ने आयोग से आरक्षित और अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की मेरिट तथा समायोजन से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों पर जवाब मांगा है।
- प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षित वर्ग के कितने अभ्यर्थियों ने अनारक्षित श्रेणी के अंतिम चयनित अभ्यर्थी से अधिक अंक प्राप्त किए?
- मुख्य परीक्षा में ऐसे अभ्यर्थियों की संख्या कितनी रही?
- निर्धारित मेरिट हासिल करने वाले अभ्यर्थियों को अनारक्षित श्रेणी में समायोजित किया गया या उनकी मूल आरक्षित श्रेणी में रखा गया?
- आयोग ने अभ्यर्थियों के समायोजन के लिए किन नियमों और प्रावधानों का पालन किया?
इन सवालों के जवाब से चयन प्रक्रिया में आरक्षण और मेरिट के नियमों के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है।
नौ जनवरी 2020 के कार्यालय ज्ञापन को दी गई चुनौती
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अभिषेक शुक्ल और दुर्गा शंकर शुक्ल ने पक्ष रखा। याचिका में आयोग के नौ जनवरी 2020 के कार्यालय ज्ञापन और भर्ती विज्ञापन की संबंधित शर्तों को चुनौती दी गई है।
याचीगण का तर्क है कि खुली प्रतियोगिता में अनारक्षित श्रेणी की मेरिट हासिल करने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को, यदि उन्होंने किसी ऐसी छूट का लाभ नहीं लिया है जो उनके समायोजन को प्रभावित करती हो, तो अनारक्षित सीटों पर चयन से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
अब इस मुद्दे पर आयोग और राज्य सरकार को अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा। हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद मामले में श्रेणीवार आंकड़े और संबंधित नियम महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
साक्षात्कार पूरा, फिर भी अंतिम परिणाम का इंतजार
पीसीएस-2025 भर्ती के तहत आयोग ने 24 अक्टूबर 2026 को साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी कर ली थी। हालांकि, हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के कारण अंतिम परिणाम जारी करने पर रोक बनी हुई है।
अदालत ने राज्य सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। आयोग भी पूरक जवाबी हलफनामा दाखिल करेगा। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को प्रत्युत्तर हलफनामा देने के लिए दो दिन का समय मिलेगा।
अब मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर को होगी। इस दौरान आयोग की ओर से प्रस्तुत किए जाने वाले आंकड़े और पक्ष आगे की न्यायिक कार्यवाही के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
PCS अभ्यर्थियों के लिए क्या है इसका मतलब?
पीसीएस-2025 के अभ्यर्थियों के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अंतिम परिणाम पर रोक बरकरार है। साक्षात्कार पूरा हो जाने के बावजूद चयन प्रक्रिया का अंतिम चरण अदालत में लंबित विवाद से प्रभावित है।
हालांकि, अगली सुनवाई में क्या आदेश आएगा और अंतिम परिणाम कब जारी किया जा सकेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। अभ्यर्थियों को आयोग की आधिकारिक सूचनाओं और हाईकोर्ट के आगामी आदेश पर नजर रखनी चाहिए।










