गोरखपुर (रविवार, 1 नवंबर 2026)। गोरखपुर के चौरी चौरा क्षेत्र को रविवार को विकास की बड़ी सौगात मिली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भोपा बाजार में गोरखपुर-भटनी रेलखंड पर नवनिर्मित रेल ओवरब्रिज का लोकार्पण कर इसे जनता को समर्पित किया। करीब 59.44 करोड़ रुपये की लागत से बने इस ओवरब्रिज से क्षेत्र के लोगों को रेलवे क्रॉसिंग पर लगने वाले जाम से राहत मिलेगी। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कुल 287 करोड़ रुपये की लागत वाली 84 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया।
चौरी चौरा पहुंचने पर मुख्यमंत्री सबसे पहले नवनिर्मित ओवरब्रिज पहुंचे और उस पर पैदल चलकर निर्माण कार्य का जायजा लिया। इसके बाद उन्होंने चौरी चौरा बलिदानी स्मारक पर पहुंचकर स्वतंत्रता संग्राम के वीर बलिदानियों को श्रद्धासुमन अर्पित किए। ऐतिहासिक धरती पर विकास परियोजनाओं के लोकार्पण के साथ स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करने का यह कार्यक्रम खास रहा।
चौरी चौरा रेल ओवरब्रिज से मिलेगी जाम से राहत
भोपा बाजार में गोरखपुर-भटनी रेलखंड के समपार संख्या 147बी पर इस रेल ओवरब्रिज का निर्माण किया गया है। रेलवे क्रॉसिंग बंद होने के कारण यहां अक्सर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती थीं। इससे स्थानीय लोगों, व्यापारियों और राहगीरों को आवागमन में परेशानी होती थी।
59.44 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस ओवरब्रिज के शुरू होने से अब लोगों को रेलवे फाटक खुलने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इससे आवागमन अधिक सुगम होने के साथ क्षेत्र में यातायात व्यवस्था को भी बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
287 करोड़ की 84 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चौरी चौरा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कुल 287 करोड़ रुपये की 84 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं के माध्यम से क्षेत्र में विकास कार्यों को गति देने और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री कमलेश पासवान, सांसद संगीता यादव, डॉ. संजय निषाद, विधायक सरवन निषाद, डॉ. धर्मेंद्र सिंह, प्रदीप शुक्ल, श्रीराम चौहान, जयप्रकाश निषाद, विनोद राय और जनार्दन तिवारी सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
ओवरब्रिज पर दर्ज है चौरी चौरा के बलिदानियों का इतिहास
इस रेल ओवरब्रिज की एक खास पहचान इसका ऐतिहासिक स्वरूप भी है। निर्माण के दौरान चौरी चौरा की ऐतिहासिक घटना और स्वतंत्रता संग्राम में बलिदान देने वाले वीरों की स्मृतियों को भी स्थान दिया गया है।
ओवरब्रिज पर उन 19 बलिदानियों की तस्वीरें, उनके पिता के नाम और फांसी की तारीख का उल्लेख किया गया है, जिन्हें चौरी चौरा कांड के बाद फांसी की सजा दी गई थी। इस तरह यह पुल केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि स्थानीय इतिहास और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान की याद दिलाने वाला स्थल भी बन गया है।
4 फरवरी 1922 को चौरी चौरा में भड़का था जनआक्रोश
चौरी चौरा का नाम भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। 4 फरवरी 1922 को यहां हुई घटना ने पूरे देश के राजनीतिक माहौल को प्रभावित किया था।
दरअसल, स्वयंसेवक अपने साथी भगवान अहीर की थानेदार द्वारा कथित पिटाई के विरोध में थाने तक शांतिपूर्ण जुलूस निकाल रहे थे। इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर पहले लाठीचार्ज किया और फिर गोलीबारी की। इस घटना में 26 लोगों की मौत हो गई थी।
पुलिस कार्रवाई से आक्रोशित भीड़ ने चौरी चौरा थाने में आग लगा दी, जिसमें 23 पुलिसकर्मियों की मौत हुई थी। इस घटना के बाद महात्मा गांधी ने 12 फरवरी 1922 को असहयोग आंदोलन वापस लेने का निर्णय लिया था।
चौरी चौरा की यह घटना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। यही वजह है कि यहां बनने वाले ओवरब्रिज पर बलिदानियों की स्मृतियों को विशेष स्थान दिया गया है।
चौरी चौरा रेल ओवरब्रिज की फैक्ट फाइल
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| स्थान | भोपा बाजार, चौरी चौरा, गोरखपुर |
| रेलखंड | गोरखपुर-भटनी |
| समपार संख्या | 147बी |
| कुल लंबाई | 649.047 मीटर |
| रेलवे भाग की लंबाई | 63.50 मीटर |
| चौड़ाई | 2 गुणे 3.75 मीटर |
| कुल लागत | ₹59.44 करोड़ |
| निर्माण कार्य शुरू | जनवरी 2022 |
चौरी चौरा में इस ओवरब्रिज का लोकार्पण क्षेत्र के लोगों के लिए यातायात की सुविधा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। वहीं, पुल पर स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृतियों को स्थान देकर विकास के साथ ऐतिहासिक विरासत को भी जोड़ने की कोशिश की गई है।









