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‘यूपी को Global Food Basket बनाना संकल्प’, वाराणसी में डायरेक्ट सीडेड राइस कॉन्क्लेव में बोले मुख्यमंत्री योगी

On: October 6, 2025
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Global Food Basket
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वाराणसी, सोमवार (06 अक्टूबर 2025) — मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश को Global Food Basket के रूप में तैयार करना सरकार का प्रमुख लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि समय पर आधुनिक तकनीक और गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने से प्रदेश तीन गुना अधिक उत्पादन करने में सक्षम होगा। 2029-30 तक उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलियन डॉलर तक पहुँचाने में कृषि क्षेत्र की अहम भूमिका होगी, जिसके लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से सहयोग लिया जाएगा।

वाराणसी में DSR कॉन्क्लेव का आयोजन

अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI) के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र में आयोजित डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “उत्तर प्रदेश केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए खाद्य सुरक्षा का केंद्र बनेगा। किसानों तक तकनीक और बीज समय पर पहुँचाने से उत्पादन तीन गुना बढ़ सकता है।”

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरी (IRRI) और सीआईपी (CIP) जैसे संस्थानों के सहयोग से Centers of Excellence स्थापित करने की योजना का भी उल्लेख किया।

कृषि के लिए काशी की प्रेरणा

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि काशी की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्ता किसानों को उन्नत खेती के लिए प्रेरित करती है। “अन्नं बहु कुर्वीत तद् व्रतम्” की परंपरा हमें सतत उत्पादन और नवाचार के लिए प्रोत्साहित करती है।

उर्वरता, सिंचाई और धूप — भारतीय कृषि की ताकत

मुख्यमंत्री ने बताया कि अच्छी कृषि के लिए उर्वरता, सिंचाई और पर्याप्त धूप सबसे आवश्यक हैं। देश में 17 करोड़ हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है, जिसमें 60 प्रतिशत सिंचित है। उत्तर प्रदेश अकेले देश का 21 प्रतिशत खाद्यान उत्पादन करता है।

क्रांतिकारी बदलाव और सरकारी योजनाएँ

बीते 11 वर्षों में प्रदेश की कृषि प्रणाली में व्यापक बदलाव आए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड, कृषि बीमा, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, किसानों के लिए लागत से डेढ़ गुना MSP और PM किसान सम्मान निधि जैसी योजनाएँ उपलब्ध कराई गई हैं

धान, गेहूं, गन्ना, आलू, दलहन और तिलहन में यूपी अग्रणी

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश का 11 प्रतिशत भूभाग और 17 प्रतिशत जनसंख्या होने के बावजूद, उत्तर प्रदेश देश के खाद्यान्न उत्पादन में सबसे आगे है। धान, गेहूं, गन्ना, आलू, दलहन और तिलहन की खेती में प्रदेश ने नेतृत्व स्थापित किया है।

कृषि विश्वविद्यालय और अनुसंधान केंद्र

उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार के चार, केंद्र सरकार के दो और एक निजी कृषि विश्वविद्यालय कार्यरत हैं। इसके अलावा, 89 कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे हैं। 2018 में वाराणसी में IRRI के दक्षिण एशिया केंद्र की स्थापना के बाद धान की विभिन्न वैरायटी पर रिसर्च जारी है।

काला नमक चावल और ऐतिहासिक खेती

मुख्यमंत्री ने बताया कि काला नमक चावल तीन हजार साल पहले भगवान बुद्ध द्वारा प्रसाद स्वरूप दिया गया था। इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ावा दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में धान की खेती का 8,000 साल पुराना इतिहास है, जिसके प्रमाण तंजावुर और रामनाथपुरम के शिलालेखों में मिलते हैं।

खाद्यान उत्पादन में पांच गुना वृद्धि

आजादी के बाद यूपी में खाद्यान्न उत्पादन 11.77 मिलियन टन था, जो अब बढ़कर 60 ट्रिलियन टन हो गया है। कृषि योग्य रकबा भी 170 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 240 लाख हेक्टेयर हो गया है।

सीड पार्क और नई पहल

मुख्यमंत्री ने बताया कि लखनऊ में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के नाम पर 250 एकड़ में सीड पार्क स्थापित किया जाएगा, जिससे किसानों को जलवायु-लचीले और बेहतर बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा, आगरा में जल्द ही International Potato Center स्थापित करने की योजना है।

ई-सीडर और प्रिसिजन हिल सीडर का लोकार्पण

कॉन्क्लेव में IRRI और JNVV द्वारा विकसित बैट्री संचालित ई-सीडर और प्रिसिजन हिल सीडर का लोकार्पण किया गया। साथ ही धान की सीधी बुवाई, जीरो टिलेज गेहूं और समृद्धि धान नेटवर्क पर आधारित प्रकाशन सामग्री का विमोचन भी हुआ।

‘लैब टू लैंड’ मॉडल

मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि वैज्ञानिक केवल लैब तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि जमीन पर उतरकर किसानों तक नई तकनीक पहुँचाएंगे। यूपी में 70 लाख हेक्टेयर में धान, 100 लाख हेक्टेयर में गेहूं, और 29 लाख हेक्टेयर में गन्ने की खेती होती है। दलहन और तिलहन के लिए भी पर्याप्त भूमि उपलब्ध है।

उपस्थित गणमान्य व्यक्ति

कार्यक्रम में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, राज्य मंत्री रविंद्र जायसवाल, दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, बलदेव सिंह औलख, प्रमुख सचिव कृषि रविन्द्र कुमार, DG IRRI यवोन पिंटो, DG CIP डॉ. साइमन हेक, श्रीलंका के कृषि सचिव डीबी विक्रमसिंघे, और डायरेक्टर ISARC डॉ. सुधांशु सिंह सहित कई कृषि वैज्ञानिक और जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

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