नई दिल्ली, 09 नवंबर 2025 (रविवार): भारत और अफ्रीकी देशों के बीच रणनीतिक सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपनी छह दिवसीय Diplomatic Visit के पहले पड़ाव पर शनिवार को अंगोला पहुँचीं। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, यह यात्रा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देगी, बल्कि अफ्रीकी महाद्वीप के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी नए रूप में सामने रखेगी।
राष्ट्रपति मुर्मू को मिला पारंपरिक स्वागत
राष्ट्रपति मुर्मू का विमान जैसे ही अंगोला की राजधानी लुआंडा के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरा, वहां उनका स्वागत अंगोला के विदेश मंत्री टेट एंटोनियो और शीर्ष अधिकारियों ने किया। यह मौका ऐतिहासिक रहा, क्योंकि यह पहली बार है जब कोई भारतीय राष्ट्राध्यक्ष अंगोला की धरती पर पहुँचा है। यह यात्रा दोनों देशों के राजनयिक संबंधों की 40वीं वर्षगांठ के दौरान हो रही है, जो इसे और भी अहम बनाती है।
क्या है इस यात्रा का एजेंडा?
तीन दिनों के अंगोला प्रवास के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू कई उच्च-स्तरीय बैठकों में हिस्सा लेंगी। इनमें अंगोला के राष्ट्रपति जोआओ मैनुअल गोनकाल्वेस लौरेंको के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी शामिल है। इसके अलावा, वह अंगोला की संसद को संबोधित करेंगी और भारतीय प्रवासी समुदाय से भी मुलाकात करेंगी। इस यात्रा का एक खास पड़ाव अफ्रीकी देश की स्वतंत्रता के 50 वर्ष पूरे होने के जश्न में राष्ट्रपति मुर्मू की उपस्थिति भी है।
विदेश मंत्रालय के सचिव (आर्थिक संबंध) सुधाकर दलेला ने कहा कि भारत और अंगोला के संबंध वर्षों से ऊर्जा (Energy), कृषि (Agriculture), स्वास्थ्य (Health), टेक्नोलॉजी (Technology), रक्षा (Defense) और अवसंरचना (Infrastructure) जैसे क्षेत्रों में लगातार मजबूत होते रहे हैं। इस यात्रा से इन सभी क्षेत्रों में नए अवसरों की खोज की उम्मीद जताई जा रही है।
क्यों मायने रखती है ये Diplomatic Visit?
यह दौरा कई मायनों में खास है। सबसे पहले, यह अफ्रीकी देशों के साथ भारत के रिश्तों को गहराई देने की दिशा में एक रणनीतिक पहल है। दूसरे, भारत- अंगोला संबंधों की 40वीं वर्षगांठ होने के चलते यह प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण है। तीसरे, ऊर्जा साझेदारी के मामले में अंगोला भारत का अहम सहयोगी है, जिसे और व्यापक बनाने की संभावनाएँ हैं।
आगे का सफर: बोत्सवाना की ओर
राष्ट्रपति मुर्मू 11 नवंबर को अपने विदेशी दौरे के दूसरे चरण में बोत्सवाना जाएंगी। वहाँ वह राष्ट्रपति डूमा गिदोन बोको से मुलाकात करेंगी, नेशनल असेंबली को संबोधित करेंगी और भारत द्वारा चीतों के संरक्षण से जुड़े ‘प्रोजेक्ट चीता’ कार्यक्रम में भी शामिल होंगी।
सचिव दलेला के शब्दों में, “यह यात्रा भारत की अफ्रीका नीति में नए आयाम जोड़ेगी और इससे सहयोग व साझेदारी का दायरा और व्यापक होगा।”













