नई दिल्ली (सोमवार, 19 जनवरी 2026)। भारत ने एक बार फिर आतंकवाद को लेकर अपने रुख में कोई नरमी नहीं दिखाई है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने पोलैंड के शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई अहम बैठक में साफ शब्दों में कहा कि भारत के पड़ोस में सक्रिय आतंकी ढांचे को किसी भी स्तर पर बढ़ावा देना स्वीकार्य नहीं है। यह संदेश न तो औपचारिक था और न ही कूटनीतिक गोलमोल—बल्कि भारत की सुरक्षा चिंताओं को सामने रखता हुआ एक सीधा और स्पष्ट संकेत था।
यह बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद और भू-राजनीतिक टकराव दोनों ही भारत की विदेश नीति के केंद्र में हैं। बैठक में कश्मीर, सीमा पार आतंकवाद और यूक्रेन संघर्ष—तीनों मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई।
Terrorism Diplomacy पर भारत की साफ नीति
बैठक के दौरान जयशंकर ने पोलैंड के विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की के समक्ष भारत की चिंताओं को बिना लाग-लपेट के रखा। उन्होंने कहा कि पोलैंड जैसे मित्र देश से भारत को संतुलित, तथ्यपरक और जिम्मेदार रुख की अपेक्षा है, खासकर उन मामलों में जो भारत की संप्रभुता और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े हैं।
जयशंकर का यह बयान अक्टूबर 2025 में जारी उस पोलैंड–पाकिस्तान संयुक्त बयान की पृष्ठभूमि में आया, जिसमें कश्मीर का उल्लेख किया गया था। भारत ने इसे अनुचित और एकतरफा मानते हुए अपना असंतोष दर्ज कराया। विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि
- सीमा पार आतंकवाद भारत के लिए केवल कूटनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि जमीनी सच्चाई है।
- आतंक से जुड़े राजनीतिक या वैचारिक ढांचों को अप्रत्यक्ष समर्थन भी अस्वीकार्य है।
- मित्र देशों से अपेक्षा है कि वे आतंकवाद पर Zero Tolerance की नीति अपनाएं, न कि चयनात्मक प्रतिक्रिया दें।
यूक्रेन मुद्दे पर ‘चुनिंदा निशाना’ बनने पर नाराजगी
बैठक में यूक्रेन संघर्ष का मुद्दा भी उठा। जयशंकर ने रूस से ऊर्जा खरीद को लेकर भारत पर हो रही आलोचनाओं पर असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा जरूरतों को नजरअंदाज कर उसे बार-बार निशाना बनाना न तो न्यायसंगत है और न ही व्यावहारिक।
इस पर पोलैंड के विदेश मंत्री ने भी यह स्वीकार किया कि कुछ मामलों में भारत को चुनिंदा तौर पर टारगेट किया गया है। यह सहमति दर्शाती है कि मतभेदों के बावजूद संवाद का रास्ता दोनों देशों के बीच खुला है।
भारत–पोलैंड रिश्तों में बढ़ती मजबूती
जयशंकर ने बातचीत के दौरान भारत–पोलैंड संबंधों की सकारात्मक तस्वीर भी सामने रखी। उन्होंने याद दिलाया कि अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोलैंड यात्रा के बाद दोनों देशों के रिश्तों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा मिला।
आज भारत और पोलैंड के बीच:
- द्विपक्षीय व्यापार करीब 7 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है
- रक्षा, स्वच्छ तकनीक, डिजिटल इनोवेशन और निवेश में सहयोग बढ़ रहा है
- पोलैंड में भारतीय निवेश से रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं
विदेश मंत्री ने दोनों देशों के ऐतिहासिक मानवीय संबंधों का भी उल्लेख किया। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ‘डोब्री महाराजा’ की परंपरा के तहत पोलिश बच्चों को भारत में मिली शरण, शिक्षा और सुरक्षा—आज भी रिश्तों की भावनात्मक नींव मानी जाती है।
स्पष्ट संदेश, खुला संवाद
इस बैठक से भारत ने यह साफ कर दिया है कि दोस्ती और साझेदारी के बावजूद आतंकवाद जैसे मुद्दों पर कोई समझौता नहीं होगा। Terrorism Diplomacy भारत की विदेश नीति का अहम हिस्सा है—जहां संवेदनशीलता है, लेकिन अस्पष्टता नहीं।













