लखनऊ, बुधवार 04 फरवरी 2026। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार इस बार विधान मंडल के बजट सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण के बाद आर्थिक सर्वे रिपोर्ट प्रस्तुत करने जा रही है। परंपरागत ढांचे से आगे बढ़ते हुए इसे व्यापक स्वरूप दिया गया है, ताकि वित्तीय वर्ष 2024–25 की आर्थिक स्थिति के साथ चालू वर्ष के बीते नौ महीनों की उपलब्धियां, आंकड़े और रुझान एक ही दस्तावेज़ में समाहित हो सकें।
सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट एक–दो दिन में मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। उद्देश्य साफ है—विधानमंडल और जनता, दोनों के सामने राज्य की अर्थव्यवस्था का समग्र और ताज़ा परिदृश्य रखना।
किन क्षेत्रों का होगा विस्तृत विश्लेषण
यह रिपोर्ट सिर्फ आय–व्यय का सार नहीं होगी, बल्कि प्रमुख क्षेत्रों की गहराई से पड़ताल भी करेगी। उद्योग, निर्माण, कृषि, सेवा, अवसंरचना, ऊर्जा और रोजगार जैसे सेक्टरों में हुए बदलाव, बजट आवंटन बनाम खर्च, और जीडीपी वृद्धि के संकेतकों को डेटा के साथ रखा जाएगा। इससे यह समझना आसान होगा कि नीतिगत प्राथमिकताएं जमीनी असर में कैसे बदल रही हैं।
पूर्व में भी नियोजन विभाग के अर्थ एवं संख्या प्रभाग द्वारा सर्वे दस्तावेज़ तैयार किए जाते रहे हैं, लेकिन इस बार उसे अधिक वृहद, तुलनात्मक और विश्लेषणात्मक रूप दिया जा रहा है—ताकि आंकड़े सिर्फ दर्ज न हों, बल्कि उनका अर्थ भी स्पष्ट हो।
उपलब्धियां, चुनौतियां और आगे की दिशा
रिपोर्ट में उपलब्धियों के साथ चुनौतियों को भी रेखांकित किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2024–25 के समापन संकेतकों के साथ चालू वर्ष के नौ महीनों के ताज़ा डेटा को शामिल कर भविष्य के अनुमान (projections) भी जोड़े जाएंगे। यानी यह दस्तावेज़ वर्तमान का आकलन करते हुए आगे की नीति-योजना की दिशा भी सुझाएगा।
आर्थिक विकास, संरचनात्मक चुनौतियों और नीतिगत प्राथमिकताओं का समेकित आकलन इस रिपोर्ट की विशेषता होगा। इससे यह संकेत मिलेगा कि राज्य की अर्थव्यवस्था किस दिशा में बढ़ रही है और किन क्षेत्रों में अतिरिक्त हस्तक्षेप की जरूरत है।
क्यों अहम है यह पहल
आर्थिक सर्वे किसी भी राज्य की अर्थव्यवस्था का ‘रिपोर्ट कार्ड’ माना जाता है। यह बताता है कि सरकार की कमाई, खर्च और विकास-यात्रा का संतुलन कैसा रहा। विधानमंडल में इसके औपचारिक प्रस्तुतीकरण से पारदर्शिता बढ़ेगी और नीति-बहस को ठोस आंकड़ों का आधार मिलेगा।
सरकार की यह पहल संकेत देती है कि बजट से पहले आर्थिक परिदृश्य को डेटा-सपोर्टेड तरीके से सामने रखा जाएगा—ताकि चर्चा तथ्यपरक हो और निर्णय अधिक लक्षित।








