लखनऊ, गुरुवार (05 फरवरी 2026)। प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र की तर्ज पर अब उत्तर प्रदेश में पशु औषधि केंद्र खुलने जा रहे हैं। यह पहल उन लाखों पशुपालकों के लिए राहत लेकर आएगी, जो अब तक महंगी पशु-दवाओं और दूरदराज़ उपलब्धता की समस्या से जूझते रहे हैं। राज्य सरकार ने तय किया है कि हर विकास खंड में एक केंद्र स्थापित होगा, जहां गुणवत्तापूर्ण दवाएं सस्ती दरों पर मिलेंगी।
पशु औषधि केंद्र: हर विकास खंड तक सस्ती पशु-दवा की पहुंच
लखनऊ से जारी जानकारी के अनुसार, पशु औषधि केंद्र मॉडल ग्रामीण ढांचे को ध्यान में रखकर बनाया गया है। लक्ष्य साफ है—पशुओं के उपचार में देरी न हो और दवाओं की कीमत पशुपालकों की पहुंच में रहे। अक्सर देखा गया है कि बीमारी के समय दवा देर से मिलने या महंगी होने के कारण पशुधन की उत्पादकता प्रभावित होती है। इस व्यवस्था से समय पर उपचार संभव होगा।
लखनऊ के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुरेश कुमार के मुताबिक, “ब्लॉक स्तर पर उपलब्धता से पशुपालकों को शहर नहीं भागना पड़ेगा। दवाएं मानकीकृत (standardized) होंगी और कीमतें नियंत्रित रहेंगी।”
आवेदन के लिए जरूरी प्रपत्र और पात्रता
केंद्र खोलने के इच्छुक आवेदकों के लिए स्पष्ट मानक तय किए गए हैं:
- फार्मासिस्ट का नाम और वैध पंजीकरण विवरण
- न्यूनतम 120 वर्ग फुट दुकान का प्रमाण
- वैध ड्रग सेल लाइसेंस
- सभी दस्तावेजों का सत्यापन
यह शर्तें इसलिए रखी गई हैं ताकि दवा भंडारण, गुणवत्ता और वितरण में कोई कमी न रहे।
ऑनलाइन आवेदन, 5000 रुपये शुल्क
पूरी प्रक्रिया डिजिटल रखी गई है। इच्छुक व्यक्ति पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे। आवेदन शुल्क ₹5000 निर्धारित है, जिससे अनावश्यक आवेदनों को रोका जा सके और गंभीर इच्छुकों को अवसर मिले।
पशुधन स्वास्थ्य कार्यक्रम से जुड़ी योजना
Livestock Health and Disease Control Programme (LHDCP) के अंतर्गत संचालित यह पहल पशुधन स्वास्थ्य को मजबूत आधार देने की दिशा में उठाया गया कदम है। प्राथमिकता उन आवेदकों को दी जाएगी जो प्रधानमंत्री कृषक समृद्धि केंद्र और सहकारी समितियों से जुड़े हैं, ताकि ग्रामीण नेटवर्क का लाभ सीधे पशुपालकों तक पहुंचे।
विशेषज्ञ मानते हैं कि दवाओं की सुलभता बढ़ने से दूध उत्पादन, पशु-श्रम क्षमता और समग्र पशुधन अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ेगा। पशुपालन, जो पहले लागत के दबाव में था, अब लाभ का समीकरण बना सकेगा।










