नई दिल्ली | 09 फरवरी 2026, सोमवार– क्रिकेट के मैदान पर तूफानी अंदाज़ में रन बरसाने वाले समस्तीपुर के 14 वर्षीय उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी अब एक अलग तरह की परीक्षा के मुहाने पर खड़े हैं। बल्ले से गेंदबाजों की लाइन-लेंथ बिगाड़ देने वाला यह किशोर अब किताबों के पन्नों के बीच समय बाँटने की कोशिश कर रहा है। वजह है—सीबीएसई की 10वीं बोर्ड परीक्षा।
अंडर-19 विश्व कप 2026 में अपनी विस्फोटक बल्लेबाज़ी से भारत को खिताब दिलाने वाले वैभव के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती क्रिकेट और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाने की है। स्कूल प्रशासन ने पुष्टि की है कि उनका एडमिट कार्ड जारी हो चुका है, लेकिन वह परीक्षा देंगे या नहीं—इस पर अभी अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है।
क्या 10वीं की परीक्षा देंगे वैभव सूर्यवंशी?
समस्तीपुर के Modesty School के प्राचार्य आदर्श कुमार उर्फ पिंटू ने बताया कि वैभव का एडमिट कार्ड आ चुका है और उनका परीक्षा केंद्र Poddar International School में पड़ा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा में बैठने का अंतिम निर्णय परिस्थितियों और बोर्ड के निर्देशों पर निर्भर करेगा।
स्कूल के लिए यह गर्व का क्षण है कि उनका छात्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर रहा है, लेकिन साथ ही यह भी सच है कि शैक्षणिक जिम्मेदारियां अपनी जगह अहम हैं।
17 फरवरी से शुरू होंगी CBSE की परीक्षाएं
इस वर्ष Central Board of Secondary Education (CBSE) की 10वीं बोर्ड परीक्षाएं 17 फरवरी 2026 से शुरू होकर 11 मार्च 2026 तक चलेंगी। यही समय वैभव के लिए सबसे अधिक व्यस्त रहने वाला है। क्रिकेट की उपलब्धियों के बीच अब उन्हें तय करना है कि क्या वे परीक्षा हॉल में भी उतनी ही दृढ़ता के साथ उतर पाएंगे, जितनी आत्मविश्वास से वे क्रीज़ पर उतरते हैं।
U-19 विश्व कप में वैभव सूर्यवंशी का जलवा
हाल ही में सम्पन्न ICC Under-19 Cricket World Cup 2026 के फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ वैभव ने महज़ 55 गेंदों में 175 रन की अविश्वसनीय पारी खेली। इस पारी ने न केवल मैच का रुख बदला, बल्कि भारत को छठी बार अंडर-19 विश्व कप ट्रॉफी दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाई।
पूरे टूर्नामेंट में उनके लगातार बेहतरीन प्रदर्शन के कारण उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच और प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट दोनों सम्मान मिले। ऐसा करने वाले वे पहले खिलाड़ी बने। टूर्नामेंट में उन्होंने दूसरा सबसे तेज शतक लगाने का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया।
भारत इससे पहले वर्ष 2000, 2008, 2012, 2018 और 2022 में अंडर-19 विश्व कप जीत चुका था, और 2026 की इस जीत में वैभव का योगदान केंद्रीय रहा।
किताबें बनाम क्रीज़: असली परीक्षा अब
वैभव सूर्यवंशी की कहानी अब केवल खेल तक सीमित नहीं है। यह उस द्वंद्व की कहानी भी है, जिससे देश के कई युवा खिलाड़ी गुजरते हैं—सपनों का पीछा करते हुए पढ़ाई को कैसे साधा जाए।
एक ओर अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिली पहचान है, दूसरी ओर बोर्ड परीक्षा जैसी जीवन की बुनियादी सीढ़ी। परिवार, स्कूल और प्रशंसक—सभी चाहते हैं कि वैभव दोनों मोर्चों पर सफल हों।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या वैभव परीक्षा कक्ष में भी उतनी ही दृढ़ता से उतरेंगे, जितनी आक्रामकता से वे गेंदबाजों का सामना करते हैं।













