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Vaibhav Suryavanshi पर Shashi Tharoor की अपील: “Sachin जैसा टैलेंट है, तो वैसा ही ट्रीटमेंट भी मिले”

On: February 9, 2026
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Vaibhav Suryavanshi पर Shashi Tharoor की अपील
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नई दिल्ली, 09 फरवरी 2026। भारतीय क्रिकेट में एक 14 वर्षीय नाम इन दिनों असाधारण चर्चा में है—Vaibhav Suryavanshi। जूनियर स्तर पर उनकी विस्फोटक बल्लेबाज़ी ने न सिर्फ चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा, बल्कि संसद के गलियारों तक बात पहुँचा दी। कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने सार्वजनिक रूप से अपील की है कि वैभव को उसी तरह ‘फास्ट-ट्रैक’ किया जाए, जैसे कभी Sachin Tendulkar को कम उम्र में मौका मिला था।

थरूर ने X (पूर्व ट्विटर) पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि “पिछली बार जब हमारे पास 14 साल का जीनियस क्रीज़ पर था, उसका नाम सचिन तेंदुलकर था—और हमने उसे ज्यादा इंतज़ार नहीं कराया।” यह टिप्पणी एक विज्ञापन क्लिप पर आई, लेकिन बहस अब गंभीर हो चुकी है: क्या असाधारण टैलेंट को पारंपरिक कतार में खड़ा रहना चाहिए?

U-19 World Cup फाइनल: 80 गेंद, 175 रन… और बहस की शुरुआत

वैभव ने ICC Under-19 Cricket World Cup के फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 80 गेंदों पर 175 रन ठोक दिए। 15 चौके, 15 छक्के—यानी 150 रन सिर्फ बाउंड्री से। भारत ने 411 का स्कोर बनाया और 100 रन से जीतकर रिकॉर्ड छठा खिताब जीता। टूर्नामेंट में 400+ रन के साथ वैभव दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ रहे और ‘Player of the Series’ चुने गए।

सेमीफाइनल में अफगानिस्तान के खिलाफ उनकी अर्धशतकीय पारी ने पहले ही संकेत दे दिया था कि यह खिलाड़ी बड़े मंच से घबराने वाला नहीं है।

तुलना क्यों हो रही है Sachin से?

Sachin Tendulkar को 16 साल की उम्र में 1989 के पाकिस्तान दौरे पर टीम इंडिया में मौका मिला था। स्कूल क्रिकेट में विनोद कांबली के साथ उनकी साझेदारी और रणजी में लगातार प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं को जल्दी निर्णय लेने पर मजबूर किया। थरूर का तर्क यही है—जब प्रतिभा असाधारण हो, तो रास्ता भी असाधारण होना चाहिए।

‘Fast Track’ की मांग और चयन की वास्तविकताएँ

थरूर ने अप्रत्यक्ष रूप से Board of Control for Cricket in India से आग्रह किया है कि वैभव के मामले में पारंपरिक प्रतीक्षा-चक्र को छोटा किया जाए। हालांकि, भारतीय क्रिकेट में आयु, फिटनेस, मानसिक तैयारी और घरेलू क्रिकेट की कसौटियाँ भी उतनी ही अहम मानी जाती हैं। यही संतुलन इस बहस को रोचक बनाता है—टैलेंट बनाम प्रक्रिया।

वैभव की अब तक की राह

एज-ग्रुप क्रिकेट से पहचान बनाने वाले वैभव ने हाल के सीजन में सीनियर फ्रेंचाइज़ी लीग (IPL) में भी प्रभाव छोड़ा, जिससे उनकी प्रोफ़ाइल और मजबूत हुई। तकनीक, टाइमिंग और निर्भीक शॉट-सेलेक्शन—तीनों ने उन्हें अलग श्रेणी में खड़ा कर दिया है।

बहस का सार

यह कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं, भारतीय क्रिकेट की चयन-दर्शन (selection philosophy) की भी है। क्या इतिहास खुद को दोहराएगा? क्या असाधारण प्रतिभा के लिए असाधारण रास्ता चुना जाएगा? फिलहाल, एक 14 वर्षीय बल्लेबाज़ ने इतना तो कर ही दिया है कि देश उसकी अगली पारी का इंतज़ार कर रहा है।

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