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लोकसभा में हंगामा जारी: ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष की चर्चा, राहुल गांधी को बोलने देने की मांग

On: February 9, 2026
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बजट सत्र के 9वें दिन भी लोकसभा में हंगामा, ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी में विपक्ष
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नई दिल्ली | 09 फरवरी 2026, सोमवार: संसद के बजट सत्र का नौवां दिन भी शोर-शराबे की भेंट चढ़ गया। सुबह कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने नारेबाज़ी तेज कर दी और माहौल ऐसा बना कि सदन को दोपहर 12 बजे तक स्थगित करना पड़ा। विपक्ष की एकजुट मांग है—राहुल गांधी को बोलने दिया जाए। इसी मांग के इर्द-गिर्द आज का पूरा गतिरोध घूमता रहा।

सदन के भीतर और गलियारों में यह चर्चा भी तेज रही कि विपक्ष लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की रणनीति पर विचार कर रहा है। हालांकि औपचारिक रूप से ऐसा कोई प्रस्ताव अभी पेश नहीं हुआ है, लेकिन विपक्षी खेमे में इस पर गंभीर विमर्श की खबर है।

सदन में क्या हुआ, किस बात पर अटका काम?

सुबह जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसद अपनी सीटों से उठकर नारे लगाने लगे—“राहुल गांधी को बोलने दो।” शोर बढ़ता देख अध्यक्ष ने व्यवस्था बनाए रखने की अपील की।
Om Birla ने स्पष्ट कहा कि सदन नियमों से चलता है, नारेबाज़ी से नहीं। उनका कहना था कि हर सदस्य को नियमों के तहत बोलने का अवसर मिलता है, लेकिन सदन का कामकाज बाधित करना उचित नहीं।

स्थिति काबू में न आते देख कार्यवाही को 12 बजे तक स्थगित कर दिया गया।

अविश्वास प्रस्ताव पर मंथन की चर्चा

सत्र शुरू होने से पहले विपक्षी दलों की एक बैठक भी हुई। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की संभावना पर चर्चा की गई। यह कदम कितना आगे बढ़ेगा, यह अभी साफ नहीं है, पर संकेत राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

विपक्ष का मानना है कि अगर राहुल गांधी को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए तो गतिरोध खत्म हो सकता है।

खरगे और राहुल की एंट्री, सियासी संदेश

संसद पहुंचने पर
Mallikarjun Kharge और
Rahul Gandhi से जब मीडिया ने पूछा कि क्या आज भी सदन नहीं चलेगा, तो खरगे ने पलटकर कहा—“कौन कहता है कि आज सदन नहीं चलेगा?”

यह बयान अपने आप में एक राजनीतिक संदेश था—विपक्ष गतिरोध के लिए खुद को जिम्मेदार नहीं मान रहा, बल्कि अपनी मांग को लोकतांत्रिक अधिकार बता रहा है।

बजट सत्र पर असर

लगातार हो रहे हंगामे का असर बजट सत्र की उत्पादकता पर साफ दिख रहा है। महत्वपूर्ण विधायी कामकाज और चर्चा बार-बार बाधित हो रही है। सरकार की ओर से व्यवस्था बनाए रखने की अपील है, जबकि विपक्ष अपनी मांग पर अडिग है।

सवाल अब यही है कि क्या दोनों पक्षों के बीच कोई मध्य रास्ता निकलेगा, या आने वाले दिनों में टकराव और तीखा होगा।

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