नई दिल्ली/25 जुलाई 2026: देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों पर केंद्र सरकार अब सख्त रुख अपनाने जा रही है। पेपर लीक संशोधन विधेयक 2026 को सोमवार को संसद में पेश किए जाने की संभावना है। प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक, परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल और संगठित गिरोहों के खिलाफ सजा, जुर्माना और जांच प्रक्रिया को पहले से कहीं अधिक कठोर बनाया गया है। सरकार का उद्देश्य भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता बनाए रखना और अभ्यर्थियों का भरोसा मजबूत करना है।
दोषियों के लिए 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक जुर्माना
सूत्रों के अनुसार, ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026’ में पेपर लीक या परीक्षा में अनियमितता के मामलों में न्यूनतम सजा को 5 वर्ष और अधिकतम सजा को 10 वर्ष तक करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही दोषियों पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने का भी प्रावधान रखा गया है। सरकार का मानना है कि कठोर दंड व्यवस्था से परीक्षा माफियाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
संगठित गिरोहों पर 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना
यदि किसी पेपर लीक मामले में संगठित गिरोह, संस्था या नेटवर्क की संलिप्तता सामने आती है तो कार्रवाई और भी सख्त होगी। प्रस्तावित संशोधन के तहत ऐसे मामलों में न्यूनतम 7 वर्ष की सजा का प्रावधान किया गया है। साथ ही संबंधित गिरोह या संस्था पर 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। सरकार की योजना पेपर लीक के संगठित नेटवर्क को आर्थिक और कानूनी दोनों स्तर पर कमजोर करने की है।
हर हाल में दो महीने के भीतर पूरी होगी जांच
प्रस्तावित कानून की सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्था जांच की समय-सीमा को लेकर है। ड्राफ्ट के अनुसार, पेपर लीक के प्रत्येक मामले की जांच अधिकतम दो महीने के भीतर पूरी करना अनिवार्य होगा। इससे लंबे समय तक लंबित रहने वाली जांच पर रोक लगेगी और दोषियों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी।
फास्ट-ट्रैक कोर्ट में होगी मामलों की सुनवाई
पेपर लीक मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का निर्देश देने की तैयारी में है। इन अदालतों में केवल पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों से जुड़े मामलों की सुनवाई होगी, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आएगी।
तीन महीने में ट्रायल पूरा करने का प्रस्ताव
विधेयक में यह भी प्रस्ताव है कि आरोप पत्र दाखिल होने की तारीख से तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा किया जाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आरोपी वर्षों तक कानूनी प्रक्रिया का लाभ उठाकर कार्रवाई से बच न सकें और प्रभावित अभ्यर्थियों को समय पर न्याय मिल सके।
युवाओं के लिए क्यों अहम है यह कानून?
हाल के वर्षों में विभिन्न भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों अभ्यर्थियों की मेहनत और भविष्य को प्रभावित किया है। ऐसे में सरकार का यह प्रस्तावित संशोधन कानून परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने, पेपर लीक माफियाओं पर कड़ा प्रहार करने और ईमानदार अभ्यर्थियों का विश्वास बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि यह विधेयक संसद से पारित हो जाता है, तो देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था पहले से कहीं अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।













