नई दिल्ली | 09 फरवरी 2026 (सोमवार) — Narendra Modi ने ‘परीक्षा पे चर्चा’ के नौवें संस्करण के दूसरे एपिसोड में छात्रों से दिलचस्प, व्यावहारिक और समयानुकूल बातचीत की। संदेश साफ था—नई टेक्नोलॉजी से डरने की जरूरत नहीं, लेकिन उसे अपनी जिंदगी का मालिक बनने देना भी ठीक नहीं। मोबाइल से लेकर एआई तक, हर साधन उपयोग के लिए है, आसक्ति के लिए नहीं।
नई टेक्नोलॉजी: डर नहीं, संतुलन ज़रूरी
पीएम ने कहा कि आने वाले समय में तकनीक और तेज़ी से बदलेगी। ऐसे में छात्रों को घबराने के बजाय उसे सीखना चाहिए, पर सीमाएँ तय करनी होंगी। “मोबाइल, एआई या कोई भी नई टेक्नोलॉजी—ये आपके सहायक हैं, स्वामी नहीं,” उन्होंने सहज उदाहरणों के साथ समझाया।
मोबाइल लत पर चिंता: आदतें ही भविष्य बनाती हैं
बातचीत के दौरान उन्होंने बच्चों में बढ़ती मोबाइल निर्भरता का जिक्र किया। कुछ बच्चे ऐसे हो गए हैं कि मोबाइल न हो तो खाना भी नहीं खाते, टीवी न हो तो बेचैनी होने लगती है। पीएम ने इसे आदतों का संकट बताया और कहा—अच्छी आदतें ही विकसित भारत की नींव हैं।
एआई को अवसर की तरह देखें, शॉर्टकट की तरह नहीं
कोयंबटूर, रायपुर, गुजरात और गुवाहाटी के छात्रों के सवालों का जवाब देते हुए पीएम ने एआई (Artificial Intelligence) को कौशल बढ़ाने का माध्यम बताया। उन्होंने कहा, “एआई से डरिए मत, उससे सीखिए। अपनी स्किल्स और क्षमता बढ़ाइए, लेकिन पढ़ाई का विकल्प मत बनाइए।” यानी नई टेक्नोलॉजी सीखने का रास्ता खोले, पर मेहनत की जगह न ले।
लीडर बनने से पहले निडर बनें
एक छात्र के सवाल पर पीएम ने लीडरशिप की सरल परिभाषा दी—लीडर वह नहीं जो बात थोपे, बल्कि वह जो लोगों को समझा सके। “पहले निडर बनिए, जो सही लगे उसे करने का साहस रखिए,” उन्होंने कहा। राजनीति से परे, यह जीवन-कौशल की सीख थी।
परीक्षा तैयारी: पुराने प्रश्नपत्र और पूरी नींद
परीक्षा तनाव पर उन्होंने व्यावहारिक टिप्स दिए—पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का अभ्यास करें और नींद से समझौता न करें। “अच्छी तैयारी के बाद तनाव टिकता नहीं, और अच्छी नींद आपको दिनभर खुश रखती है,” उन्होंने जोड़ा।
करियर चयन: उपलब्धि नहीं, अनुशासन से सीखें
करियर को लेकर दुविधा पर पीएम ने कहा कि सफल लोगों की सिर्फ उपलब्धियाँ न देखें, उनके पीछे का अनुशासन और प्रयास समझें। “सच्ची सफलता शोर नहीं करती, समाज खुद पहचान लेता है,” उन्होंने उदाहरण देकर समझाया।
पढ़ाई और पैशन में संतुलन
पीएम ने स्पष्ट किया—खेल या किसी पैशन में रुचि हो तो पढ़ाई को कमतर न आँकें, और यह भी न मानें कि केवल शिक्षा ही सब कुछ कर देगी। हुनर को लगातार निखारना जरूरी है।
विकसित भारत के लिए विकसित आदतें
छात्रों को उन्होंने छोटी-छोटी आदतों पर ध्यान दिलाया—रेड लाइट पर इंजन बंद करना, भोजन बर्बाद न करना, अनुशासन बनाए रखना। यही आदतें बड़े बदलाव की बुनियाद बनती हैं। साथ ही, उन्होंने अपने छात्र जीवन में शिक्षकों की भूमिका को याद करते हुए गुरु-मार्गदर्शन का महत्व रेखांकित किया।
उल्लेखनीय है कि ‘परीक्षा पे चर्चा’ के नौवें संस्करण का पहला एपिसोड 6 फरवरी को प्रसारित हुआ था, जबकि दूसरे एपिसोड में यह संवाद हुआ।













