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CM योगी का बड़ा एलान: यूपी में आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं का बढ़ेगा मानदेय, विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा संदेश

On: February 16, 2026
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CM योगी का बड़ा एलान- यूपी में आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं का बढ़ेगा मानदेय
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लखनऊ, 16 फरवरी 2026। उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में सोमवार का दिन अहम रहा, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधान परिषद में बड़ा ऐलान करते हुए आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाने की घोषणा की। यह घोषणा ऐसे समय आई है जब राज्य में सामाजिक कल्याण योजनाओं और कर्मचारियों के हितों को लेकर चर्चाएं तेज हैं और सरकार चुनावी वर्ष से पहले जनहित योजनाओं को मजबूती देने की रणनीति पर आगे बढ़ती दिख रही है।

मुख्यमंत्री ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान कहा कि सरकार का उद्देश्य जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मियों को बेहतर आर्थिक सम्मान देना है। इससे पहले सरकार वृद्धावस्था पेंशन, दिव्यांगजन पेंशन और निराश्रित विधवा महिलाओं की सहायता राशि बढ़ाने का फैसला भी ले चुकी है। ऐसे में यह स्पष्ट संकेत माना जा रहा है कि सरकार सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर लगातार बड़े कदम उठा रही है।

राजनीतिक गलियारों में इसे ग्रामीण स्वास्थ्य और पोषण तंत्र से जुड़े लाखों कर्मचारियों के लिए राहत भरा फैसला माना जा रहा है, क्योंकि आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे थे। सरकार का यह कदम न केवल प्रशासनिक स्तर पर बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

‘फियर जोन से फेथ जोन’ तक: CM योगी का दावा

विधान परिषद में अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने कानून व्यवस्था को सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में गिनाते हुए कहा कि विकास की पहली शर्त ‘रूल ऑफ लॉ’ है। उनका कहना था कि उत्तर प्रदेश अब “फियर जोन” से “फेथ जोन” में बदल चुका है, जहां कानून का राज स्थापित हुआ है और समाज में विश्वास का वातावरण बना है।

उन्होंने कहा कि बीते नौ वर्षों में प्रदेश ने अपराध और अस्थिरता से निकलकर अनुशासन और विकास की ओर कदम बढ़ाया है। उनके अनुसार, पहले जहां दंगे और कर्फ्यू जैसी स्थितियां चर्चा में रहती थीं, वहीं अब उत्सव और धार्मिक पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था (Temple Economy) तेजी से विकसित हो रही है।

मुख्यमंत्री ने पुलिस सुधारों का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि वर्ष 2017 के बाद राज्य में कोई बड़ा सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ और प्रदेश अब “रेवेन्यू सरप्लस” की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस बयान को सरकार की कानून-व्यवस्था पर मजबूत पकड़ के दावे के तौर पर देखा जा रहा है।

विपक्ष पर तीखा हमला, वंदे मातरम विवाद का भी जिक्र

अपने भाषण के दौरान योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों पर तीखे शब्दों में निशाना साधा। उन्होंने कहा कि समाज में विद्वेष फैलाने वाला आचरण लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है और विपक्ष को संवैधानिक मर्यादा का पालन करना चाहिए।

वंदे मातरम के मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंदुस्तान में रहकर राष्ट्रगीत का विरोध स्वीकार्य नहीं हो सकता। साथ ही उन्होंने राज्यपाल के प्रति विपक्ष के व्यवहार की आलोचना करते हुए कहा कि संवैधानिक पदों का सम्मान लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी शर्त है।

रोजगार और विकास मॉडल पर सरकार का जोर

मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले खेती और उद्योग को लेकर स्पष्ट नीतियों का अभाव था, लेकिन अब “डबल इंजन सरकार” के जरिए विकास की रफ्तार तेज हुई है। उन्होंने दावा किया कि ओडीओपी (One District One Product) और अन्य योजनाओं के कारण प्रदेश में तीन करोड़ से अधिक युवाओं को रोजगार मिला है।

उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश अब केवल कृषि आधारित राज्य नहीं रह गया, बल्कि उद्यमिता और तकनीकी विकास की ओर तेजी से बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एआई इंपैक्ट समिट के उद्घाटन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश और राज्य दोनों नई तकनीकों को अपनाने की दिशा में दूरदर्शी सोच के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

राजनीतिक मायने: चुनावी संदेश या सामाजिक संतुलन?

राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में यह घोषणा सिर्फ प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर अहम संकेत देती है। आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ता ग्रामीण ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और इनका सीधा संपर्क आम जनता से रहता है। ऐसे में मानदेय वृद्धि का फैसला सरकार की जनहित और सामाजिक आधार मजबूत करने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।

सरकार की ओर से दिए गए संदेश में यह स्पष्ट नजर आता है कि आने वाले समय में विकास, कानून व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा – इन तीन स्तंभों को केंद्र में रखकर राजनीतिक नैरेटिव तैयार किया जा रहा है।

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