कोलकाता, 12 अप्रैल 2026 — पश्चिम बंगाल की सियासत एक बार फिर गर्माती नजर आई जब नरेंद्र मोदी ने सिलीगुड़ी की धरती से जोरदार राजनीतिक संदेश दिया। विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि 4 मई के बाद राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनेगी और मौजूदा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को अपने 15 वर्षों के शासन का “पाई-पाई का हिसाब” देना पड़ेगा।
सभा का माहौल जोशीला था, लेकिन भाषण में सिर्फ राजनीतिक नारों की गूंज नहीं थी—उसमें एक रणनीतिक संदेश भी छिपा था। पीएम मोदी ने सिलीगुड़ी को “नॉर्थ बंगाल का प्रवेश द्वार” बताते हुए कहा कि यहां की जनता अब बदलाव के लिए पूरी तरह तैयार है।
“15 साल में विकास नहीं, सिर्फ काले कारनामे”
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में टीएमसी सरकार पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि पिछले डेढ़ दशक में राज्य का समुचित विकास नहीं हुआ। उन्होंने कहा,
“यह समय है काम के मूल्यांकन का, खासकर उन युवाओं के लिए जो पहली बार वोट डालने जा रहे हैं।”
उनके मुताबिक, राज्य में उद्योग, इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यटन को जानबूझकर पीछे रखा गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए फंड का सही उपयोग नहीं हुआ और वह “सिंडिकेट व्यवस्था” में फंस गया।
नॉर्थ बंगाल बनाम कोलकाता: क्षेत्रीय असंतुलन का मुद्दा
पीएम मोदी ने अपने भाषण में एक दिलचस्प राजनीतिक रेखा खींची—नॉर्थ बंगाल और कोलकाता के बीच विकास असंतुलन की। उन्होंने दावा किया कि जब नॉर्थ बंगाल प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहा था, तब राज्य सरकार जश्न में व्यस्त थी।
यह बयान सिर्फ आलोचना नहीं था, बल्कि क्षेत्रीय भावनाओं को संबोधित करने की कोशिश भी थी—एक ऐसा मुद्दा जो अक्सर चुनावों में निर्णायक बन जाता है।
तुष्टिकरण और बजट पर सवाल
प्रधानमंत्री ने टीएमसी सरकार पर “तुष्टिकरण की राजनीति” करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि मदरसों के लिए हजारों करोड़ का बजट रखा गया, लेकिन नॉर्थ बंगाल के विकास के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं दिए गए।
हालांकि, इस तरह के आरोप राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रहे हैं, लेकिन चुनावी मंच से इसे दोहराना यह संकेत देता है कि भाजपा इस मुद्दे को चुनावी एजेंडा बनाए रखना चाहती है।
सुरक्षा और सिलीगुड़ी कॉरिडोर का महत्व
सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे अक्सर “चिकन नेक” कहा जाता है, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है। पीएम मोदी ने इसे “मां भारती की भुजा” बताते हुए कहा कि इस क्षेत्र की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने ऐसे तत्वों को बढ़ावा दिया जो देश की एकता के खिलाफ काम करते हैं। यह बयान सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा को चुनावी मुद्दा बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है।
चाय बागान, युवा और महिलाओं के लिए वादे
प्रधानमंत्री ने नॉर्थ बंगाल के चाय बागान श्रमिकों का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा सरकार बनने पर उन्हें पक्के घर, बिजली, पानी और जमीन के पट्टे दिए जाएंगे।
इसके अलावा, उन्होंने युवा प्रतिभाओं—जैसे क्रिकेटर रिचा घोष और मंटू घोष—का जिक्र करते हुए नॉर्थ बंगाल में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी स्थापित करने का वादा किया। यह घोषणा युवाओं को आकर्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
“भय बनाम भरोसा” की राजनीति
अपने भाषण के अंत में पीएम मोदी ने एक व्यापक राजनीतिक नैरेटिव पेश किया—“भय बनाम भरोसा”। उन्होंने कहा कि टीएमसी ने राज्य में डर का माहौल बनाया है, जबकि भाजपा भरोसे की राजनीति लेकर आएगी।
निष्कर्ष: चुनावी संदेश से आगे की रणनीति
सिलीगुड़ी में पीएम मोदी की हुंकार सिर्फ एक चुनावी भाषण नहीं थी, बल्कि यह एक स्पष्ट राजनीतिक रोडमैप भी था। इसमें विकास, सुरक्षा, क्षेत्रीय असंतुलन और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को एक साथ जोड़कर पेश किया गया।
अब देखना दिलचस्प होगा कि 4 मई के बाद क्या वाकई बंगाल की राजनीति में वह बदलाव आता है, जिसका दावा किया जा रहा है—या यह भी भारतीय चुनावी राजनीति की एक और जोरदार, लेकिन अस्थायी गूंज बनकर रह जाएगा।












