लखनऊ, 12 अप्रैल 2026 (रविवार)। उत्तर प्रदेश में तापमान जैसे-जैसे ऊपर चढ़ रहा है, वैसे-वैसे बिजली की मांग भी तेजी से बढ़ने लगी है। इसी को देखते हुए योगी आदित्यनाथ सरकार पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है। इस बार संदेश साफ है—बिजली व्यवस्था में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल ने सभी अधिकारियों को पहले से तैयारी पूरी करने और किसी भी तरह की बिजली कटौती से बचने के निर्देश दिए हैं।
ट्रांसफार्मर फुंका तो सीधे कार्रवाई
डॉ. आशीष गोयल ने साफ शब्दों में कहा है कि ट्रांसफार्मर में किसी भी तरह की खराबी या फुंकने की घटना को हल्के में नहीं लिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पर्याप्त संसाधन और बजट उपलब्ध होने के बावजूद लापरवाही सामने आई, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई तय है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हर ट्रांसफार्मर पर फ्यूज और टेललेस यूनिट की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि तकनीकी खराबियों को पहले ही रोका जा सके।
यह निर्देश केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं—बल्कि जिम्मेदारी तय करने की सख्त व्यवस्था भी साथ में जोड़ी गई है।
अधूरे कामों पर भी सख्त रुख
बिजली विभाग में लंबित और अधूरे कार्यों को लेकर भी सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। जहां काम तय समय से पीछे चल रहे हैं, वहां संबंधित फर्म और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
डॉ. गोयल ने स्पष्ट किया कि अब “काम में देरी” को बहाना नहीं माना जाएगा। हर स्तर पर जवाबदेही तय होगी—चाहे वह ठेकेदार हो या विभागीय अभियंता।
लखनऊ में ‘नो ट्रिपिंग’ का लक्ष्य
राजधानी लखनऊ को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। निर्देश दिया गया है कि किसी भी हालत में बिजली ट्रिपिंग नहीं होनी चाहिए।
अधिकारियों से कहा गया है कि शहर की बिजली व्यवस्था लगातार सुचारु बनी रहे, इसके लिए ग्राउंड लेवल पर निगरानी बढ़ाई जाए।
दरअसल, गर्मी के दिनों में राजधानी में बिजली की मांग सबसे ज्यादा होती है, ऐसे में छोटी सी तकनीकी समस्या भी बड़े संकट का रूप ले सकती है—इसी को ध्यान में रखते हुए यह सख्त निर्देश दिए गए हैं।
‘जीरो डैमेज’ और ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति लागू
UPPCL ने इस बार दो स्पष्ट नीतियां लागू की हैं—
- जीरो डैमेज पॉलिसी: ट्रांसफार्मर खराब नहीं होने चाहिए
- जीरो टॉलरेंस पॉलिसी: बिजली आपूर्ति में लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होगी
इसके साथ ही विद्युत दुर्घटनाओं को रोकने पर भी विशेष जोर दिया गया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जाए।
निष्कर्ष: गर्मी से पहले तैयारी, जनता को राहत का भरोसा
उत्तर प्रदेश में बढ़ती गर्मी के बीच बिजली व्यवस्था को लेकर सरकार की यह सक्रियता संकेत देती है कि इस बार पहले से ही स्थिति को संभालने की कोशिश की जा रही है।
स्पष्ट निर्देश, तय जिम्मेदारी और सख्त चेतावनी—इन तीनों के जरिए योगी सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि जनता को गर्मी में बिजली संकट का सामना न करना पड़े।
अब देखने वाली बात होगी कि जमीनी स्तर पर ये निर्देश कितनी प्रभावी तरीके से लागू होते हैं और क्या वाकई इस बार “बिजली कटौती” पर पूरी तरह नियंत्रण पाया जा सकेगा।










