राष्ट्रीय उत्तर प्रदेश राज्य अंतरराष्ट्रीय खेल मनोरंजन एजुकेशन बिजनेस राशिफल

---Advertisement---

यूपी में ‘35 करोड़ पौधरोपण अभियान’ से हरियाली की नई इबारत, CM योगी की छात्रों और आंगनबाड़ी को खास अपील

On: May 3, 2026
Follow Us:
35 करोड़ पौधरोपण अभियान, CM योगी की छात्रों और आंगनबाड़ी को खास अपील
---Advertisement---

लखनऊ, 3 मई 2026। उत्तर प्रदेश एक बार फिर हरियाली की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। इस साल 35 करोड़ पौधरोपण अभियान को लेकर सरकार ने जिस तरह की रणनीति बनाई है, उससे साफ है कि यह महज सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनभागीदारी का एक व्यापक आंदोलन बनने की ओर बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को वृहद पौधरोपण अभियान-2026 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए स्पष्ट कहा कि अब समय है जब हर नागरिक इस अभियान का हिस्सा बने। उनकी अपील में एक खास भावनात्मक जुड़ाव भी नजर आया—‘एक पेड़ मां के नाम’। यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश है।

35 करोड़ पौधरोपण अभियान को जनआंदोलन बनाने की तैयारी

सरकार का लक्ष्य है कि इस साल एक ही दिन में 35 करोड़ पौधे लगाए जाएं। सुनने में यह आंकड़ा भले ही विशाल लगे, लेकिन पिछले वर्षों के रिकॉर्ड इस लक्ष्य को संभव बनाते हैं। वर्ष 2017 से 2025 के बीच प्रदेश में 242.13 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं, जो 2009-2016 के 51.48 करोड़ पौधों की तुलना में कई गुना अधिक है।

सीएम योगी ने निर्देश दिया कि हर आंगनबाड़ी केंद्र में कम से कम पांच सहजन (मोरिंगा) के पौधे लगाए जाएं, वहीं स्कूल-कॉलेजों में हर छात्र कम से कम एक पौधा जरूर लगाए। यानी, हर घर और हर संस्थान इस अभियान का हिस्सा बने—यही इसकी असली ताकत होगी।

गंगा एक्सप्रेसवे से लेकर गांवों तक हरियाली का विस्तार

गंगा एक्सप्रेसवे के दोनों किनारों पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण की योजना बनाई गई है। इसके साथ ही गांवों, नदियों के किनारों और हाइवे पर भी हरियाली बढ़ाने पर जोर है।

सरकार का मानना है कि सड़क किनारे पेड़ लगाने से न सिर्फ पर्यावरण संतुलन मजबूत होगा, बल्कि यात्रियों को भी राहत मिलेगी। यह सोच विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

वैज्ञानिक निगरानी और डिजिटल टेक्नोलॉजी का सहारा

इस बार का 35 करोड़ पौधरोपण अभियान तकनीकी रूप से भी काफी उन्नत होगा। ‘हरितिमा’ ऐप, जीआईएस मैपिंग, क्यूआर कोड ट्रैकिंग और प्लांटेशन मॉनिटरिंग सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों के जरिए पौधों की निगरानी की जाएगी।

सरकार का फोकस सिर्फ पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी जीवितता (Survival Rate) सुनिश्चित करना भी है। वर्ष 2025 के सर्वे में वन विभाग द्वारा लगाए गए पौधों की 80% जीवितता दर्ज की गई—जो एक सकारात्मक संकेत है।

हरित आवरण और कार्बन स्टॉक में यूपी की बढ़त

उत्तर प्रदेश में हरित आवरण अब करीब 9.96% तक पहुंच चुका है। पिछले कुछ वर्षों में 3.38 लाख एकड़ क्षेत्र में हरियाली बढ़ी है।

कार्बन स्टॉक में वृद्धि के मामले में भी राज्य राष्ट्रीय औसत (1.13%) से आगे निकलकर 2.46% तक पहुंच चुका है। सरकार ने वर्ष 2030 तक 15% और 2047 तक 20% हरित आवरण का लक्ष्य तय किया है।

नर्सरियों का विस्तार और गुणवत्ता पर जोर

प्रदेश में इस समय 1935 विभागीय नर्सरियां संचालित हैं और 50 करोड़ से अधिक पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। इसके लिए 34 नई नर्सरियां भी स्थापित की गई हैं।

सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि सभी विभागों को उच्च गुणवत्ता वाले पौधे वन विभाग की नर्सरियों से निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएं। उद्यान, रेशम और निजी क्षेत्र की नर्सरियों को भी इस अभियान से जोड़ा गया है।

शहीदों के नाम पर वन और सांस्कृतिक जुड़ाव

इस अभियान में एक भावनात्मक और सांस्कृतिक पहलू भी जोड़ा गया है। शहीदों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम पर वन और वाटिकाएं विकसित की जाएंगी।

इसके अलावा अयोध्या में रामायणकालीन पौधों के रोपण पर विशेष जोर दिया गया है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ सांस्कृतिक विरासत भी मजबूत हो सके।

रामसर साइट की उपलब्धि ने बढ़ाया गौरव

बैठक के दौरान शेखा झील पक्षी विहार को रामसर साइट घोषित किए जाने का प्रमाण पत्र भी मुख्यमंत्री को सौंपा गया।

यह स्थल 40.309 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है और 2016 में पक्षी विहार के रूप में अधिसूचित किया गया था। अब यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरक्षित आर्द्रभूमि (Wetland) के रूप में मान्यता प्राप्त कर चुका है। प्रदेश में अब कुल 12 रामसर स्थल हो गए हैं।

निष्कर्ष: एक अभियान से आगे, सोच में बदलाव की कोशिश

35 करोड़ पौधरोपण अभियान सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है। यह उस सोच को बदलने की कोशिश है, जहां विकास के साथ पर्यावरण को बराबरी का महत्व दिया जाए।

सीएम योगी की अपील में प्रशासनिक निर्देशों के साथ एक भावनात्मक जुड़ाव भी है—और शायद यही इस अभियान की असली ताकत बनेगा। अगर हर नागरिक एक पौधा भी जिम्मेदारी से लगाकर उसकी देखभाल करे, तो यह लक्ष्य सिर्फ पूरा ही नहीं होगा, बल्कि उत्तर प्रदेश को सचमुच ‘हरा-भरा’ बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now