नई दिल्ली/लखनऊ, 14 मई 2026। उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब सबसे बड़ी चर्चा नए मंत्रियों के विभागों के बंटवारे को लेकर तेज हो गई है। इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को नई दिल्ली पहुंचकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। राजनीतिक हलकों में इस बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि पिछले कई दिनों से विभाग आवंटन और संगठनात्मक बदलावों को लेकर लगातार मंथन चल रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अमित शाह के बीच हुई बातचीत में मंत्रियों के विभागों के बंटवारे के साथ-साथ प्रदेश भाजपा संगठन की लंबित संरचना और 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
विभागों के बंटवारे में क्यों फंसा है मामला?
हाल ही में हुए योगी मंत्रिमंडल विस्तार में छह नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई थी, जबकि दो मंत्रियों का कद बढ़ाया गया। हालांकि शपथ ग्रहण के कई दिन बाद भी नए मंत्रियों को विभाग नहीं सौंपे गए हैं।
सरकार की ओर से मंत्रियों को कार्यालय और कक्ष आवंटित कर दिए गए हैं, लेकिन विभागों की घोषणा अब तक लंबित है। यही वजह है कि राजनीतिक गलियारों में लगातार अटकलों का दौर जारी है।
भाजपा नेतृत्व नहीं चाहता कि मंत्रिमंडल विस्तार के बाद किसी तरह का असमंजस या अंदरूनी संदेश बाहर जाए। माना जा रहा है कि इसी कारण केंद्रीय नेतृत्व सीधे तौर पर इस प्रक्रिया की निगरानी कर रहा है।
दिल्ली में अमित शाह से अहम बैठक
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार दोपहर करीब तीन बजे दिल्ली पहुंचे और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। भाजपा के भीतर अमित शाह को रणनीतिक फैसलों का प्रमुख चेहरा माना जाता है, ऐसे में इस बैठक को केवल औपचारिक मुलाकात नहीं माना जा रहा।
सूत्रों के अनुसार, विभागों के बंटवारे में क्षेत्रीय संतुलन, जातीय समीकरण और राजनीतिक प्रभाव जैसे कई पहलुओं पर विचार किया जा रहा है। भाजपा 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन से भी मिले योगी
अमित शाह से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भाजपा केंद्रीय कार्यालय भी पहुंचे, जहां उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से शिष्टाचार भेंट की।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मुलाकात केवल औपचारिक नहीं थी, बल्कि इसमें उत्तर प्रदेश भाजपा संगठन में संभावित बदलावों पर भी चर्चा हो सकती है। पिछले कुछ समय से प्रदेश संगठन में फेरबदल की अटकलें लगातार चल रही हैं।
बिना विभाग के हैं आठ मंत्री
योगी मंत्रिमंडल विस्तार रविवार को हुआ था, जिसमें आठ मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली थी। लेकिन पांच दिन बीत जाने के बाद भी ये मंत्री बिना विभाग के हैं।
उत्तर प्रदेश में फिलहाल मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्रियों समेत कुल 60 मंत्री हैं। ऐसे में विभागों का संतुलित वितरण भाजपा नेतृत्व के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि विभागों के बंटवारे में देरी इस बात का संकेत है कि पार्टी नेतृत्व हर निर्णय बेहद सावधानी से लेना चाहता है, ताकि सरकार और संगठन दोनों में संतुलन बना रहे।
सभी मंत्रियों के साथ पहली बैठक
मंत्रिमंडल विस्तार के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को अपने सरकारी आवास पर सभी मंत्रियों के साथ पहली बैठक की थी। इस दौरान वैश्विक परिस्थितियों, प्रशासनिक प्राथमिकताओं और विकास योजनाओं पर चर्चा हुई।
हालांकि इस बैठक में भी विभागों के आवंटन को लेकर कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को विकास कार्यों में तेजी लाने और सरकार की प्राथमिकताओं पर फोकस करने का निर्देश दिया।
ईंधन बचत और पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में ईंधन बचत को लेकर भी सख्त संदेश दिया है। उन्होंने अपने और मंत्रियों के काफिलों में वाहनों की संख्या आधी करने के निर्देश जारी किए हैं।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने मंत्रियों और अधिकारियों से पीएनजी, मेट्रो और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के अधिक इस्तेमाल पर जोर देने की अपील की। सरकार इसे ऊर्जा बचत और संसाधनों के बेहतर उपयोग से जोड़कर देख रही है।
जल्द हो सकता है बड़ा फैसला
भाजपा सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय नेतृत्व अब विभागों के बंटवारे को जल्द अंतिम रूप देना चाहता है। संभावना जताई जा रही है कि अगले कुछ दिनों में मंत्रियों के विभागों की औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी।
राजनीतिक रूप से यह फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि भाजपा 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सरकार और संगठन दोनों को मजबूत और सक्रिय रूप में पेश करना चाहती है।










