लखनऊ|01 जून 2026: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लोकभवन में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रदेश के मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित करते हुए उन्हें देश का भविष्य और राष्ट्र निर्माण की सबसे मजबूत नींव बताया। इस अवसर पर उन्होंने न केवल छात्रों की उपलब्धियों की सराहना की, बल्कि अभिभावकों और शिक्षकों को भी महत्वपूर्ण संदेश दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की डिजिटल दुनिया में बच्चों को सही दिशा देना बेहद जरूरी है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे सोशल मीडिया की आभासी दुनिया में समय गंवाने के बजाय पुस्तकों, समाचार-पत्रों और ज्ञानवर्धक सामग्री से जुड़ें। साथ ही अभिभावकों से अपील की कि वे कम उम्र में बच्चों को मोबाइल फोन की लत न लगने दें।
CM योगी आदित्यनाथ ने 1682 मेधावियों को किया सम्मानित
लोकभवन में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 223 मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया। इनमें यूपी बोर्ड, सीबीएसई, आईसीएसई, आईएससी और उत्तर प्रदेश संस्कृत शिक्षा परिषद के विद्यार्थी शामिल रहे।
प्रदेश स्तर पर उत्कृष्ट अंक प्राप्त करने वाले शीर्ष मेधावियों को एक-एक लाख रुपये का चेक, टैबलेट और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। वहीं जिला स्तर पर चयनित 1459 मेधावियों को उनके संबंधित जिला मुख्यालयों में आयोजित समारोहों में 21-21 हजार रुपये, मेडल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक साथ 1682 छात्र-छात्राओं का सम्मान किया जाना पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।
‘सोशल मीडिया नहीं, ज्ञान बढ़ाने वाले माध्यम चुनें’
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने छात्रों को विशेष रूप से सोशल मीडिया के सीमित उपयोग की सलाह दी।
उन्होंने कहा, “समाचार-पत्र पढ़ने की आदत डालिए। टीवी देखें तो न्यूज देखें। सोशल मीडिया पर कम से कम समय बिताइए, क्योंकि वहां अधिकांश समय तथ्यहीन और भ्रामक जानकारियों में उलझने का खतरा रहता है।”
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा या इंटरव्यू में यह नहीं पूछा जाएगा कि सोशल मीडिया पर आपके कितने फॉलोअर्स हैं। सफलता का आधार ज्ञान, अनुशासन और मेहनत होती है, न कि आभासी लोकप्रियता।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे डिजिटल लाइब्रेरी और अपने पाठ्यक्रम से जुड़ी अध्ययन सामग्री का अधिक उपयोग करें तथा अनावश्यक रूप से स्मार्टफोन की मांग कर अभिभावकों पर दबाव न बनाएं।
अभिभावकों को भी दी बड़ी सीख
मुख्यमंत्री ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि दो या तीन वर्ष के छोटे बच्चों के हाथ में मोबाइल फोन थमा देना उचित नहीं है। बच्चों को रचनात्मक गतिविधियों, खेल, पुस्तकों और सामाजिक व्यवहार से जोड़ना अधिक आवश्यक है।
उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान राम को महर्षि वशिष्ठ, विश्वामित्र और वाल्मीकि जैसे गुरुओं ने संस्कार और ज्ञान प्रदान किया था। इसी शिक्षा परंपरा ने भारत को विश्वगुरु बनाया।
योगी ने कहा कि माता-पिता और शिक्षक बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनके मार्गदर्शन से ही भविष्य की मजबूत पीढ़ी तैयार होती है।
छात्राएं फिर रहीं आगे, छात्रों पर ली हल्की चुटकी
मुख्यमंत्री ने इस वर्ष की मेरिट सूची का जिक्र करते हुए कहा कि एक बार फिर छात्राओं ने शानदार प्रदर्शन किया है।
उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि मेरिट सूची यह बता रही है कि छात्राओं ने छात्रों की तुलना में अधिक मेहनत की है। छात्रों पर हल्की-फुल्की टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि शायद लड़के अब घर के कामकाज और मोहल्ले की जिम्मेदारियों में अधिक व्यस्त हो गए हैं।
हालांकि उन्होंने दोनों वर्गों के विद्यार्थियों को समान रूप से मेहनत और अनुशासन का संदेश दिया और कहा कि प्रतिस्पर्धा हमेशा स्वयं को बेहतर बनाने के लिए होनी चाहिए।
‘यह उम्र जीवन का लक्ष्य तय करने की है’
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि किशोरावस्था और युवावस्था जीवन का लक्ष्य निर्धारित करने का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है।
उन्होंने ग्रीष्मावकाश का सदुपयोग करने की सलाह देते हुए कहा कि विद्यार्थी अपनी दिनचर्या को संतुलित बनाएं, समय पर सोएं, नियमित व्यायाम करें और अच्छे स्वास्थ्य पर ध्यान दें।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शिक्षा केवल अंक प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी समझने का भी मार्ग है। सफल विद्यार्थी अपने साथियों और परिवार के अन्य बच्चों को भी प्रेरित करें ताकि समाज में सकारात्मक बदलाव आए।
नौ वर्षों में बदली परीक्षा व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में नकलविहीन और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली स्थापित की गई है।
उन्होंने बताया कि आज उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की परीक्षाओं में लगभग 56 लाख विद्यार्थी शामिल होते हैं और निर्धारित समय में परीक्षा तथा परिणाम दोनों घोषित किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक परीक्षा व्यवस्था को लेकर कई तरह की शिकायतें सामने आती थीं, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।
मुख्यमंत्री के अनुसार पारदर्शी परीक्षा प्रणाली ने मेधावी छात्रों को उनकी मेहनत के अनुरूप पहचान दिलाने का काम किया है।
‘सा विद्या या विमुक्तये’ का दिया संदेश
अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने भारतीय शिक्षा दर्शन के प्रसिद्ध वाक्य ‘सा विद्या या विमुक्तये’ का उल्लेख करते हुए कहा कि सच्ची शिक्षा वही है जो व्यक्ति को अज्ञान, भय और सीमाओं से मुक्त करे।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी प्राप्त करना नहीं, बल्कि जीवन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता विकसित करना भी है। विद्यार्थियों को ऐसा ज्ञान अर्जित करना चाहिए जो समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान दे सके।
शिक्षा मंत्री ने भी अभिभावकों और शिक्षकों को किया संबोधित
माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के साथ मित्रवत व्यवहार रखने और उनके मानसिक विकास पर विशेष ध्यान देने की अपील की।
उन्होंने कहा कि शिक्षक और शिक्षिकाओं का व्यवहार, व्यक्तित्व और आचरण बच्चों को गहराई से प्रभावित करता है। इसलिए शिक्षकों की भूमिका केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और शिक्षाविद मौजूद रहे।
निष्कर्ष
मेधावी छात्रों के सम्मान समारोह के जरिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केवल पुरस्कार वितरण नहीं किया, बल्कि नई पीढ़ी को अनुशासन, अध्ययन और संतुलित डिजिटल जीवन का संदेश भी दिया। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच उनका यह संदेश विद्यार्थियों और अभिभावकों दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि सफलता का वास्तविक मार्ग ज्ञान, मेहनत और सही दिशा में किए गए प्रयासों से होकर गुजरता है।









