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प्रवेश में देरी पर रजिस्ट्रार और परीक्षा विलंब पर परीक्षा नियंत्रक होंगे जिम्मेदार, विभाग ने जारी किए सख्त निर्देश

On: June 4, 2026
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प्रवेश में देरी पर रजिस्ट्रार और परीक्षा विलंब पर परीक्षा नियंत्रक होंगे जिम्मेदार
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लखनऊ|04 जून 2026: उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 को समयबद्ध और नियमित बनाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने इस बार कड़ा रुख अपनाया है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रवेश प्रक्रिया में अनावश्यक देरी होने पर संबंधित विश्वविद्यालय के कुलसचिव (रजिस्ट्रार) और परीक्षा समय पर न होने की स्थिति में परीक्षा नियंत्रक सीधे तौर पर जिम्मेदार माने जाएंगे।

उच्च शिक्षा विभाग का मानना है कि वर्षों से सत्र में होने वाली देरी का असर छात्रों की पढ़ाई, परीक्षाओं और रोजगार संबंधी योजनाओं पर पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार शैक्षिक कैलेंडर के पालन को लेकर अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की गई है।

25 जुलाई तक पूरे करने होंगे सभी प्रवेश

विभाग की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार इंटरमीडिएट के परिणाम सामान्यतः 15 मई तक और स्नातकोत्तर स्तर के परिणाम 15 जून तक घोषित हो जाते हैं। ऐसे में सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को 25 जुलाई तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

हालांकि, यदि सीयूईटी या अन्य राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं के परिणाम देर से आने के कारण कुछ विद्यार्थी समय पर दाखिला नहीं ले पाते हैं, तो विश्वविद्यालय उपलब्ध रिक्त सीटों पर उन्हें प्रवेश देने का निर्णय ले सकते हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शैक्षणिक कैलेंडर किसी भी स्थिति में प्रभावित न हो।

प्रवेश में देरी हुई तो कुलसचिव पर होगी कार्रवाई

उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव शकील अहमद सिद्दीकी ने कहा है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रवेश प्रक्रिया पूरी कराना संबंधित विश्वविद्यालय के कुलसचिव की जिम्मेदारी होगी। यदि किसी स्तर पर अनावश्यक विलंब पाया जाता है तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज की जाएगी।

विभाग ने साफ संदेश दिया है कि अब सत्र नियमितीकरण केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का विषय भी होगा।

समय से होंगी परीक्षाएं, परीक्षा नियंत्रक होंगे उत्तरदायी

निर्देशों के अनुसार सेमेस्टर परीक्षाएं वर्ष में दो बार निर्धारित समय पर आयोजित की जाएंगी। विभाग ने यह भी कहा है कि विश्वविद्यालयों द्वारा विभिन्न परीक्षाओं के लिए महाविद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाए जाने से शिक्षण कार्य प्रभावित होता है। इसलिए परीक्षा कार्यक्रम इस प्रकार तैयार किए जाएं कि नियमित पढ़ाई बाधित न हो।

यदि निर्धारित अवधि के बाद भी विश्वविद्यालय की परीक्षाएं संचालित होती पाई जाती हैं, तो संबंधित परीक्षा नियंत्रक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करते हुए उनके खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज की जाएगी। किसी विशेष परिस्थिति में परीक्षा कार्यक्रम बदलने की आवश्यकता होने पर शासन से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

माइनर और स्किल कोर्स परीक्षाओं को लेकर भी निर्देश

उच्च शिक्षा विभाग ने माइनर पेपर और स्किल कोर्स की परीक्षाओं को एक या दो दिनों के भीतर आयोजित करने का सुझाव दिया है। साथ ही संस्थानों को अपने स्तर पर उपलब्ध स्किल आधारित पाठ्यक्रमों की सूची तैयार करने को कहा गया है।

यदि किसी कारणवश पाठ्यक्रम समय पर पूरा नहीं हो पाता है तो ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से उसे पूरा कराना अनिवार्य होगा, ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

सभी विश्वविद्यालय और कॉलेज बनाएंगे वार्षिक गतिविधि कैलेंडर

विभाग ने सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को निर्देश दिया है कि वे शैक्षणिक कैलेंडर के अनुरूप अपना वार्षिक गतिविधि कैलेंडर तैयार करें और उसे संस्थान की वेबसाइट पर सार्वजनिक करें।

इस कैलेंडर में पूरे वर्ष आयोजित होने वाली शैक्षणिक, सह-पाठ्यक्रम (को-करिकुलर) और अन्य गतिविधियों की जानकारी शामिल होगी। इससे विद्यार्थियों को पहले से कार्यक्रमों की जानकारी मिल सकेगी और संस्थानों में बेहतर शैक्षणिक प्रबंधन सुनिश्चित होगा।

उच्च शिक्षा विभाग की यह पहल राज्य में लंबे समय से चली आ रही सत्र विलंब की समस्या को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि निर्देशों का प्रभावी पालन होता है तो छात्रों को समय पर प्रवेश, नियमित कक्षाएं और निर्धारित समय पर परीक्षाओं का लाभ मिल सकेगा।

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