लखनऊ|09 जून 2026: उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने विधान भवन रक्षक और अग्निरक्षक के कुल 170 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। लंबे समय से इस भर्ती का इंतजार कर रहे अभ्यर्थी अब ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। खास बात यह है कि इस भर्ती में वही उम्मीदवार आवेदन कर सकेंगे, जिन्होंने प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (PET) 2025 में भाग लिया हो।
आयोग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया के तहत विधान भवन रक्षक के 120 पद और अग्निरक्षक के 50 पद भरे जाएंगे। भर्ती का विज्ञापन पहले ही 10 अप्रैल 2026 को जारी किया जा चुका था, जबकि अब आवेदन और शुल्क जमा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
यूपी विधान भवन भर्ती में आवेदन की अंतिम तिथि 29 जून
भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन करने और शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 29 जून 2026 निर्धारित की गई है। आयोग ने अभ्यर्थियों को सलाह दी है कि वे अंतिम समय की तकनीकी समस्याओं से बचने के लिए समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें।
इसके अलावा, जिन अभ्यर्थियों से आवेदन पत्र भरते समय कोई त्रुटि हो जाती है, उन्हें भी राहत दी गई है। उम्मीदवार 6 जुलाई 2026 तक शुल्क समायोजन कराने के साथ अपने आवेदन पत्र में आवश्यक संशोधन कर सकेंगे।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अंतिम तिथि के बाद किसी भी अभ्यर्थी का आवेदन शुल्क स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसे में अभ्यर्थियों को समय सीमा का विशेष ध्यान रखना होगा।
PET 2025 स्कोर के आधार पर होगा चयन
इस भर्ती की सबसे महत्वपूर्ण शर्त PET 2025 है। आयोग के अनुसार आवेदन प्रक्रिया प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (PET) 2025 के अंकों के आधार पर संचालित की जाएगी। यानी केवल वही अभ्यर्थी आवेदन के पात्र होंगे, जिन्होंने PET 2025 में हिस्सा लिया है और उनका वैध स्कोर उपलब्ध है।
सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए यह भर्ती इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि विधान भवन और अग्निशमन सेवा से जुड़े पदों पर नियुक्ति का अवसर सीमित अंतराल पर ही मिलता है।
साइबर अपराध को लेकर अधिकारियों को किया गया जागरूक
इधर, उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS), लखनऊ में मंगलवार को 48 प्रशिक्षु अधिकारियों को फॉरेंसिक विज्ञान और साइबर अपराध से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।
संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने प्रशिक्षण सत्र के दौरान कहा कि किसी भी अपराध की जांच में साक्ष्य सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और यही अपराधी को सजा तक पहुंचाने का आधार बनते हैं।
उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में अपराध के तौर-तरीके तेजी से बदल रहे हैं। अब साइबर अपराधी नई तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूक रहना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे स्वयं सतर्क रहने के साथ-साथ अपने सहयोगियों और आम लोगों को भी साइबर अपराध से बचाव के प्रति जागरूक करें।










