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संपत्ति का ब्योरा न देने वाले कर्मचारियों का वेतन होगा जारी, लेकिन प्रमोशन पर रहेगी रोक

On: June 19, 2026
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संपत्ति का ब्योरा न देने वाले कर्मचारियों का वेतन होगा जारी, लेकिन प्रमोशन पर रहेगी रोक
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लखनऊ|19 जून 2026: उत्तर प्रदेश सरकार ने उन सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को बड़ी राहत दी है, जिनका वेतन चल-अचल संपत्ति का विवरण समय पर जमा न करने के कारण रोक दिया गया था। राज्य सरकार ने अब ऐसे कार्मिकों का जनवरी और फरवरी माह का रुका हुआ वेतन जारी करने का फैसला किया है। हालांकि, संपत्ति का ब्योरा न देने वाले कर्मचारियों पर अन्य प्रशासनिक प्रतिबंध पहले की तरह लागू रहेंगे।

मुख्य सचिव एस.पी. गोयल द्वारा जारी शासनादेश के अनुसार, जिन सरकारी कर्मचारियों ने 10 मार्च 2026 तक मानव संपदा पोर्टल पर अपनी चल-अचल संपत्ति का ऑनलाइन विवरण दर्ज नहीं कराया था, उनका जनवरी और फरवरी का वेतन रोका गया था। अब संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के बाद उनका लंबित वेतन जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।

दरअसल, राज्य सरकार ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए अपनी संपत्ति का विवरण ऑनलाइन दर्ज करना अनिवार्य किया था। इसके लिए पहले 31 जनवरी 2026 की समयसीमा तय की गई थी। निर्धारित तिथि तक 47 हजार से अधिक कार्मिकों ने अपनी संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया था। बाद में कर्मचारियों की मांग और प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए अंतिम तिथि बढ़ाकर 10 मार्च 2026 कर दी गई थी।

प्रमोशन और एसीपी पर जारी रहेगा प्रतिबंध

हालांकि वेतन जारी करने के फैसले के साथ सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले कर्मचारियों को अन्य मामलों में राहत नहीं मिलेगी। 26 फरवरी 2026 के शासनादेश के तहत ऐसे कार्मिकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

इसके अलावा वर्तमान चयन वर्ष में उनकी पदोन्नति पर विचार नहीं किया जाएगा। उन्हें इस वर्ष एसीपी (Assured Career Progression) का लाभ भी नहीं मिलेगा। साथ ही विदेश यात्रा, प्रतिनियुक्ति अथवा अन्य संवेदनशील प्रशासनिक प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक विजिलेंस क्लियरेंस भी जारी नहीं की जाएगी।

संपत्ति विवरण को लेकर सरकार का सख्त रुख

राज्य सरकार का मानना है कि सरकारी कर्मचारियों द्वारा संपत्ति का नियमित और पारदर्शी विवरण देना जवाबदेही तथा सुशासन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी उद्देश्य से मानव संपदा पोर्टल पर ऑनलाइन संपत्ति विवरण दर्ज करने की व्यवस्था लागू की गई है। सरकार इसे प्रशासनिक पारदर्शिता और भ्रष्टाचार नियंत्रण से भी जोड़कर देख रही है।

एडेड शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की तैयारी तेज

इधर माध्यमिक शिक्षा विभाग ने अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) विद्यालयों के शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा से जोड़ने की प्रक्रिया भी तेज कर दी है। विभाग ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआईओएस) से विद्यालयों, प्रधानाचार्यों और शिक्षकों से संबंधित जानकारी निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध कराने को कहा है।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार अगले चरण में शिक्षकों का व्यक्तिगत डाटा ऑनलाइन भरा जाएगा। इसके सत्यापन की जिम्मेदारी संबंधित प्रधानाचार्य की होगी। प्रधानाचार्य द्वारा सत्यापन के बाद डीआईओएस इसे अनुमोदित करेंगे और डाटा सीधे केंद्र सरकार के पोर्टल पर भेजा जाएगा। प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र शिक्षकों के स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जाएंगे, जिससे उन्हें कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ मिल सकेगा।

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