प्रयागराज, 17 जुलाई 2026। उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के 21वें दीक्षांत समारोह में शुक्रवार को शिक्षा, संस्कृति और आधुनिकता का संतुलित संदेश देखने को मिला। समारोह की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने की। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आधुनिक युग की जरूरतों के अनुरूप आगे बढ़ना जरूरी है, लेकिन अपनी संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों से रिश्ता कभी नहीं टूटना चाहिए। समारोह के दौरान कुल 30,886 शिक्षार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं।
मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद पद्मश्री से सम्मानित लोकगायिका मालिनी अवस्थी ने भी युवाओं को नई तकनीकों के साथ भारतीय सांस्कृतिक विरासत को अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह किसी छात्र की शिक्षा का अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि ज्ञान, जिम्मेदारी और संस्कारों के साथ जीवन की नई शुरुआत का अवसर होता है।
आधुनिक तकनीक सीखें, लेकिन अपनी जड़ों से जुड़े रहें
मालिनी अवस्थी ने अपने संबोधन में कहा कि आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और आधुनिक तकनीक को समझना समय की आवश्यकता है। हालांकि, यदि युवा अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं से दूर हो जाएंगे तो उनका व्यक्तित्व अधूरा रह जाएगा। उन्होंने संगमनगरी प्रयागराज को केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, साहित्य और सांस्कृतिक चेतना की महत्वपूर्ण भूमि बताया।
उन्होंने महादेवी वर्मा, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ और सुमित्रानंदन पंत जैसे महान साहित्यकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह धरती ज्ञान और विचार की समृद्ध परंपरा का प्रतीक रही है। साथ ही विद्यार्थियों से भारत रत्न राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन के जीवन मूल्यों को अपनाने की अपील भी की।
30,886 विद्यार्थियों को मिली डिग्री, छात्राओं ने जीते सबसे अधिक स्वर्ण पदक
उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह में इस वर्ष कुल 30,886 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 17,788 छात्र और 13,098 छात्राएं शामिल रहीं।
समारोह में विभिन्न संकायों के मेधावी विद्यार्थियों को 26 स्वर्ण पदक दिए गए। इनमें 20 स्वर्ण पदक छात्राओं और 6 स्वर्ण पदक छात्रों ने हासिल किए। यह उपलब्धि उच्च शिक्षा में छात्राओं की बढ़ती भागीदारी और उत्कृष्ट प्रदर्शन को भी दर्शाती है।
रम्या सिंह को मिला कुलाधिपति स्वर्ण पदक
दीक्षांत समारोह का सबसे प्रतिष्ठित कुलाधिपति स्वर्ण पदक अंबेडकर नगर स्थित देव इंद्रावती महाविद्यालय अध्ययन केंद्र की बीएससी छात्रा रम्या सिंह को प्रदान किया गया। रम्या समारोह में उपस्थित नहीं हो सकीं, इसलिए उनकी ओर से उनकी माता ने यह सम्मान ग्रहण किया। यह पल समारोह का भावनात्मक और प्रेरणादायक क्षण बन गया।
स्नातकोत्तर और स्नातक वर्ग के टॉपर्स हुए सम्मानित
स्नातकोत्तर वर्ग में सात विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। इनमें एमए (पत्रकारिता एवं जनसंचार) के शोभित मौर्या, एमए (समाजशास्त्र) की श्रेया यादव, एम.कॉम की रिदम पांडेय, एमसीए के राहुल कुमार मिश्रा, एमए (शिक्षाशास्त्र) की कुमारी दीपिका राठौर, एमएससी (जैव रसायन) की हया मतलूब तथा एमएससी (फूड एंड न्यूट्रीशन) की तान्या त्यागी शामिल रहीं।
वहीं स्नातक वर्ग में सरिता वर्मा, आकृति पटेल, मरियम खानम शाहिद खान, जितेंद्र कुमार जायसवाल, रम्या सिंह और कुशाग्र सिंह को विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया गया।
गोद लिए गए गांवों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को भी मिला सम्मान
दीक्षांत समारोह केवल विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहा। विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों के प्राथमिक, जूनियर और माध्यमिक विद्यालयों में आयोजित खेल, निबंध लेखन, भाषण, चित्रकला और कहानी कथन प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों को भी मंच पर सम्मानित किया गया। इस पहल ने समारोह को सामाजिक सहभागिता और शिक्षा के व्यापक सरोकारों से भी जोड़ दिया।
समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी, विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक, शिक्षार्थी तथा बड़ी संख्या में अभिभावक मौजूद रहे। पूरे आयोजन में शिक्षा के साथ संस्कार, प्रतिभा और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश प्रमुखता से उभरकर सामने आया।










