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देश के 12 खेती प्रधान राज्यों में मानसून की कमी, बिहार-यूपी समेत कई राज्यों में बारिश का इंतजार

On: August 10, 2026
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देश के 12 खेती प्रधान राज्यों में मानसून की कमी
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नई दिल्ली/10 अगस्त 2026: देश के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों के दौरान अच्छी बारिश हुई है, लेकिन इसका असर अभी तक देश की मानसून की कमी को पूरी तरह दूर करने में नहीं दिखा है। खासकर खेती पर निर्भर राज्यों में बारिश की स्थिति चिंता बढ़ाने वाली बनी हुई है। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब और आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों में अब भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है।

12 राज्यों में मानसून की कमी, खेती पर बढ़ी चिंता

पिछले एक सप्ताह में दिल्ली, हरियाणा और पूर्वी राजस्थान में हुई अच्छी बारिश ने इन क्षेत्रों में बारिश की कमी को कुछ हद तक कम किया है। इसके बावजूद देशभर के मानसून आंकड़ों पर इसका प्रभाव सीमित रहा। 2 अगस्त को देश में बारिश की कुल कमी 12 प्रतिशत थी, जो 9 अगस्त तक घटकर 11 प्रतिशत रह गई। यानी एक सप्ताह में कमी सिर्फ एक प्रतिशत कम हुई।

राहत की बात यह है कि बारिश का सिलसिला कुछ इलाकों में बढ़ा है, लेकिन खेती के लिहाज से समय भी महत्वपूर्ण है। कई क्षेत्रों में बारिश तब पहुंची, जब खरीफ फसलों की बुआई काफी आगे बढ़ चुकी थी।

बुआई पूरी होने के बाद हुई बारिश

देश के कुल बोए गए क्षेत्र के करीब 88 प्रतिशत हिस्से में खरीफ फसलों की बुआई पूरी हो चुकी थी। ऐसे में पिछले सप्ताह हुई बारिश से बुआई क्षेत्र की कमी में केवल एक प्रतिशत का सुधार हुआ।

धान की स्थिति भी पूरी तरह राहत देने वाली नहीं है। पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में इस साल धान की बुआई का क्षेत्र अभी भी 4 प्रतिशत कम बताया गया है। बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में धान की खेती के लिए आने वाले दिनों की बारिश इसलिए खास मायने रखती है।

खेती में बारिश का महत्व केवल खेत तक सीमित नहीं रहता। पर्याप्त वर्षा से मिट्टी में नमी बनी रहती है, जल स्रोतों को सहारा मिलता है और किसानों को सिंचाई पर होने वाला खर्च भी कम करने में मदद मिलती है।

13 अगस्त से इन राज्यों में बढ़ सकती है बारिश

मौसम विभाग के पूर्वानुमान से आने वाले दिनों में कुछ राहत की उम्मीद जगी है। विभाग के मुताबिक, गुरुवार के आसपास उत्तरी बंगाल की खाड़ी और पश्चिम बंगाल-बांग्लादेश तट के पास कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है।

इसके प्रभाव से 13 अगस्त से पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ और बिहार में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। अगर पूर्वानुमान के मुताबिक बारिश होती है तो बिहार और झारखंड में धान तथा मक्के की बुआई को कुछ गति मिलने की उम्मीद है।

इन राज्यों के किसानों के लिए यह बारिश सिर्फ मौसम की घटना नहीं होगी। खरीफ सीजन में सही समय पर पानी मिलना फसल की स्थिति और आगे की पैदावार दोनों के लिए अहम होता है।

12 राज्यों में 20 प्रतिशत या उससे ज्यादा बारिश की कमी

रविवार तक देश के 12 राज्यों में 20 प्रतिशत या उससे अधिक बारिश की कमी दर्ज की गई। इनमें बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य शामिल हैं, जो मानसून के मुख्य क्षेत्र यानी मानसून कोर जोन का हिस्सा हैं।

इन राज्यों में कई इलाकों की खेती अभी भी मानसूनी बारिश पर काफी निर्भर है। सिंचाई की पर्याप्त सुविधा नहीं होने के कारण बारिश में देरी या कमी का सीधा असर खेतों की नमी और फसलों की स्थिति पर पड़ सकता है।

यही वजह है कि आने वाले दिनों में होने वाली बारिश पर किसानों की निगाह बनी हुई है। यदि अगस्त में बारिश की गतिविधि बढ़ती है तो मौजूदा कमी को कुछ हद तक पाटने में मदद मिल सकती है।

पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सबसे ज्यादा कमी

क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो मध्य भारत को छोड़कर अन्य क्षेत्रों में जुलाई और अगस्त के पहले सप्ताह में सामान्य बारिश के बावजूद पूरे मानसून सीजन की बारिश में कमी बनी हुई है।

पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में 25 प्रतिशत की कमी सबसे ज्यादा दर्ज की गई। इसके बाद दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में 17 प्रतिशत और उत्तर-पश्चिम भारत में 11 प्रतिशत की कमी रही।

इस स्थिति में अगस्त की बारिश महत्वपूर्ण हो जाती है। आने वाले सप्ताह में बारिश का वितरण कैसा रहता है, यह तय करेगा कि मानसून की मौजूदा कमी कितनी तेजी से कम होती है और खरीफ फसलों को कितना सहारा मिलता है।

जलाशयों के लिए अगस्त की बारिश राहत

बारिश की कमी के बीच अगस्त में होने वाली वर्षा का एक सकारात्मक पहलू जलाशयों से भी जुड़ा है। अच्छी बारिश से जलाशयों में पानी का भंडारण बेहतर होने की उम्मीद है। इसका फायदा पनबिजली उत्पादन की क्षमता के इस्तेमाल में मिल सकता है।

साथ ही, जलाशयों में पर्याप्त पानी भविष्य के बुआई मौसम के लिए भी एक तरह का बैक-अप तैयार करता है। इसलिए मौजूदा मानसून की कमी के बावजूद आने वाले दिनों में होने वाली बारिश खेती के साथ-साथ जल संसाधनों और ऊर्जा क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण रहने वाली है।

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