नई दिल्ली/मंगलवार, 29 सितंबर 2026: उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ ने मौसम का मिजाज बदल दिया है। जम्मू-कश्मीर से लेकर उत्तराखंड तक पहाड़ी इलाकों में बारिश और बर्फबारी का दौर जारी है, तो मैदानी क्षेत्रों में भी कई जगह तेज हवाओं के साथ बारिश ने तापमान नीचे ला दिया है। मौसम के इस बदलाव से जहां लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिली है, वहीं पहाड़ों में बारिश और भूस्खलन ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
उत्तराखंड में केदारनाथ मार्ग पर लगातार दूसरे दिन भूस्खलन हुआ। चट्टान की चपेट में आने से एक बच्चे की मौत हो गई, जबकि रास्ते में मलबा आने के कारण 1,500 से अधिक श्रद्धालु फंस गए। बाद में उन्हें सुरक्षित निकालकर गौरीकुंड पहुंचाया गया। खराब मौसम को देखते हुए केदारनाथ यात्रा भी प्रभावित हुई है।
आज नौ राज्यों में आंधी-बारिश के आसार
मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार को उत्तर-पश्चिम और पूर्वी भारत के नौ से अधिक राज्यों में कहीं-कहीं आंधी, तेज हवाओं और बारिश के साथ बिजली गिरने की स्थिति बन सकती है। बुधवार से कई क्षेत्रों में मौसम में कुछ सुधार की उम्मीद है, हालांकि इसके बाद उमस बढ़ सकती है।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख: 29 सितंबर तथा 2 से 4 अक्टूबर के बीच बारिश और आंधी-तूफान की संभावना है।
उत्तराखंड: 29 सितंबर से 4 अक्टूबर तक कुछ स्थानों पर बारिश, तेज हवाओं के साथ आंधी और बिजली गिरने की आशंका है।
हिमाचल प्रदेश: 29 सितंबर को कुछ इलाकों में बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं।
पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़: मंगलवार को कुछ स्थानों पर आंधी-तूफान, बारिश और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है।
दिल्ली, पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश: कुछ इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश और वज्रपात हो सकता है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश: 29 और 30 सितंबर को कुछ स्थानों पर बारिश के साथ तेज हवाएं और बिजली गिरने की संभावना है।
उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का असर
मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम खराब बना हुआ है। मैदानी इलाकों में बारिश के कारण कई जगह तापमान में करीब 10 डिग्री तक की गिरावट दर्ज की गई है।
सोमवार को उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, बिहार और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में गरज के साथ बारिश हुई। इसके अलावा मराठवाड़ा, ओडिशा, पूर्वी असम, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी हल्की बारिश दर्ज की गई।
मौसम विभाग ने बताया कि उत्तर प्रदेश के ऊपर बना निम्न दबाव का क्षेत्र अब कमजोर हो गया है। हालांकि, इससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण अभी बना हुआ है। दूसरी ओर, एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है, जिसके कारण उत्तर भारत में मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है।
दो दिनों तक बना रहेगा निम्न दबाव का असर
मौसम विभाग के अनुसार उत्तरी अंडमान सागर और उससे सटे म्यांमार तट पर बना गहरा निम्न दबाव पिछले छह घंटों में करीब 13 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ा।
28 सितंबर को भारतीय समयानुसार रात करीब 7:30 बजे से 9:30 बजे के बीच यह गहरा निम्न दबाव क्षेत्र म्यांमार के क्यैकटो के पूर्व में तट को पार कर गया। इस दौरान हवा की गति करीब 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा रही।
अगले दो दिनों में इसके तटीय म्यांमार और उससे सटे पूर्वी-मध्य तथा उत्तर-पूर्वी बंगाल की खाड़ी और दक्षिण-पूर्वी बांग्लादेश की ओर उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने की संभावना है।
हिमाचल में बर्फबारी से सड़कें बंद
हिमाचल प्रदेश में सोमवार को लगातार तीसरे दिन ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हुई। किन्नौर, लाहौल-स्पीति और चंबा के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ गिरी, जबकि शिमला, धर्मशाला समेत कई अन्य स्थानों पर बारिश हुई।
बारिश और बर्फबारी के कारण प्रदेश के अधिकतम तापमान में 8 से 10 डिग्री तक की गिरावट दर्ज की गई। ठंड बढ़ने के साथ जनजीवन भी प्रभावित हुआ है। प्रदेश में 61 सड़कों पर वाहनों की आवाजाही बाधित रही, जबकि 49 बिजली ट्रांसफार्मर भी प्रभावित हुए।
उत्तराखंड की व्यास घाटी में पांच फीट तक बर्फ
उत्तराखंड की व्यास घाटी में मौसम ने एक अलग तस्वीर दिखाई है। आदि कैलाश, नाभीढांग और कुटी में करीब दो से पांच फीट तक बर्फ की चादर बिछ गई है। भारी बर्फबारी के कारण कुटी से आदि कैलाश को जोड़ने वाला मार्ग बंद हो गया है।
बर्फबारी से पर्यटकों के चेहरे जरूर खिल उठे हैं, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों की चिंता भी बढ़ी है। फसलों को संभावित नुकसान का डर लोगों को सता रहा है। पहाड़ों में मौसम का यह बदलाव पर्यटन के लिए आकर्षण जरूर पैदा करता है, लेकिन कृषि और रोजमर्रा की आवाजाही के लिए चुनौतियां भी साथ लेकर आता है।
बिहार में कई नदियां खतरे के निशान के ऊपर
नेपाल और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में हुई भारी बारिश का असर राज्य की नदियों पर दिखाई दे रहा है। गंडक, कोसी और बागमती कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। निचले इलाकों में पानी भरने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
सुपौल और पश्चिम चंपारण जिलों में करीब 82 हजार लोग प्रभावित बताए गए हैं। नदी किनारे रहने वाले इलाकों में प्रशासन और स्थानीय लोगों के लिए जलस्तर में उतार-चढ़ाव लगातार चिंता का विषय बना हुआ है।
पश्चिमी विक्षोभ के आगे बढ़ने के बाद साफ होगा मौसम
आईएमडी के मुताबिक जम्मू के आसपास सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ अगले 36 घंटों में पहाड़ी क्षेत्रों से आगे निकल सकता है। इसके बाद मंगलवार से निचले स्तरों पर उत्तर-पश्चिमी हवाओं की गति बढ़ने की संभावना है।
इन हवाओं के प्रभाव से उत्तर भारत के कई हिस्सों में बादल छंट सकते हैं और मौसम धीरे-धीरे साफ होने की उम्मीद है। हालांकि, मौसम में सुधार के बाद उमस बढ़ने की संभावना भी जताई गई है।
नेपाल में बारिश से हालात बिगड़े, नदी में बहा क्रूज शिप
नेपाल में भी लगातार बारिश के कारण कई इलाकों में स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। बागलुंग में नदी के कटाव के कारण नगर पालिका भवन का एक हिस्सा ढह गया। सामने आए वीडियो में इमारत को देखते ही देखते नदी में समाते हुए दिखाया गया है।
दूसरी ओर, नारायणी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद नदी में बंधे एक क्रूज शिप की रस्सी टूट गई। तेज बहाव में जहाज करीब 100 मीटर तक बहता चला गया और बाद में पुल के पिलर से टकरा गया। नेपाल के कई हिस्सों में एक बार फिर बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है।
फिलहाल उत्तर भारत में मौसम का यह बदलाव कई इलाकों के लिए राहत और चुनौती दोनों लेकर आया है। मैदानी क्षेत्रों में तापमान गिरने से लोगों को गर्मी से राहत मिली है, लेकिन पहाड़ों में भूस्खलन, बर्फबारी और सड़क बंद होने की घटनाओं ने सावधानी की जरूरत बढ़ा दी है।













